सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सीएमओ के पास सरकारी वाहन! सारणी नगर पालिका में उठे सवाल, प्रशासन ने बताया सुरक्षा कारण
संवाददाता: संदीप तायड़े
सारणी/घोड़ाडोंगरी। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की नगर पालिका परिषद सारणी में सरकारी वाहन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। नगर पालिका के पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सी.के. मेश्राम की सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी वाहन उनके पास होने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में नगर पालिका की कार्यप्रणाली, सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
पूर्व सीएमओ 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद नगर पालिका का एक वाहन अभी तक उनके निवास पर होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, इस संबंध में नगर पालिका के प्रभारी सीएमओ हितेश शाक्य का कहना है कि वाहन सुरक्षा के उद्देश्य से पूर्व सीएमओ के घर रखा गया है।
ऐसे में मामला केवल वाहन के उपयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी संपत्ति के प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
सेवानिवृत्ति के बाद वाहन को लेकर शुरू हुई चर्चा
नगर पालिका परिषद सारणी में पूर्व सीएमओ सी.के. मेश्राम के सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी वाहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जिस वाहन का उपयोग नगर पालिका के प्रशासनिक कार्यों के लिए होना चाहिए, वह अब भी पूर्व अधिकारी के निवास पर रखा हुआ है।
हालांकि, इस संबंध में यह स्पष्ट नहीं है कि वाहन किस प्रशासनिक आदेश अथवा प्रक्रिया के तहत वहां रखा गया है। इस संबंध में नगर पालिका की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
वाहन को लेकर अलग-अलग दावे
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि वाहन नगर पालिका को तत्काल वापस मिलना चाहिए ताकि वर्तमान प्रशासनिक कार्यों में उसका उपयोग हो सके।
दूसरी ओर, प्रभारी सीएमओ का कहना है कि वाहन सुरक्षा की दृष्टि से पूर्व सीएमओ के घर रखा गया है।
यही कारण है कि इस पूरे मामले को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक स्थिति सामने आने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका के पास उपलब्ध सरकारी वाहन नियमित प्रशासनिक कार्यों में उपयोग नहीं हो पा रहा है, तो इसका प्रभाव दैनिक कार्यों पर पड़ सकता है।
हालांकि इस संबंध में नगर पालिका द्वारा यह नहीं बताया गया है कि वर्तमान में प्रशासनिक कार्यों के लिए वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था है या नहीं।
यदि वाहन वास्तव में उपयोग में नहीं है, तो इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता आवश्यक मानी जा रही है।
सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर पारदर्शिता जरूरी
सरकारी वाहन सार्वजनिक संसाधन होते हैं और उनका उपयोग निर्धारित नियमों एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी संपत्ति के उपयोग, रखरखाव और सुरक्षा से संबंधित प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
यदि किसी कारणवश वाहन किसी अधिकारी के निवास पर रखा जाता है, तो उसके पीछे स्पष्ट प्रशासनिक आदेश, जिम्मेदारी और रिकॉर्ड होना भी आवश्यक माना जाता है।
कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का विषय
नगर पालिका से जुड़े कुछ कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई है।
हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि इस प्रकार की स्थितियों पर संबंधित विभाग समय रहते स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
सरकारी वाहन का उद्देश्य क्या है?
नगर पालिका के सरकारी वाहन सामान्यतः अधिकारियों के आधिकारिक दौरे, निरीक्षण, विकास कार्यों की निगरानी, आपातकालीन प्रशासनिक गतिविधियों तथा अन्य सरकारी कार्यों के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
ऐसे वाहनों का उपयोग संबंधित नियमों के अनुसार किया जाना अपेक्षित होता है।
यही कारण है कि किसी भी सरकारी वाहन की वर्तमान स्थिति और उपयोग को लेकर सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठने पर प्रशासनिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हो जाता है।
नियम क्या कहते हैं?
सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार किसी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके पास उपलब्ध सरकारी संसाधन, कार्यालयीन सामग्री और वाहन संबंधित विभाग को वापस सौंपे जाते हैं।
हालांकि यदि किसी विशेष परिस्थिति में कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है, तो वह सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है।
इस मामले में ऐसी किसी प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
डीजल और रखरखाव को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि वाहन अभी तक नगर पालिका के नियंत्रण में वापस नहीं आया है, तो उसके रखरखाव, ईंधन और अन्य खर्चों का वहन किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।
इन सवालों पर भी अभी तक नगर पालिका की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यदि वाहन नगर पालिका के रिकॉर्ड में सक्रिय है, तो उसके उपयोग और व्यय का रिकॉर्ड भी विभागीय अभिलेखों में उपलब्ध होना चाहिए।
प्रशासनिक स्पष्टता की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूरे मामले में प्रशासन को स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
यदि वाहन सुरक्षा कारणों से रखा गया है, तो यह भी बताया जाना चाहिए कि:
- किस अधिकारी के निर्देश पर यह व्यवस्था की गई?
- वाहन कब तक वहां रहेगा?
- वर्तमान में वाहन का आधिकारिक उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है?
- वाहन के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों के जवाब मिलने से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रभारी सीएमओ का पक्ष
इस मामले में प्रभारी सीएमओ हितेश शाक्य ने कहा—
“नगर पालिका परिषद सारणी की सीएमओ वाहन को सुरक्षा के उद्देश्य से पूर्व सीएमओ साहब के घर रखी गई है।”
फिलहाल नगर पालिका की ओर से यही आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
पूर्व सीएमओ का पक्ष सामने आना बाकी
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में पूर्व सीएमओ सी.के. मेश्राम की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
यदि भविष्य में उनका पक्ष सामने आता है, तो उसे भी प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा ताकि मामले के सभी पक्ष पाठकों के सामने आ सकें।
पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता
सरकारी संस्थानों में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक प्रशासन की महत्वपूर्ण आवश्यकता मानी जाती है। नगर पालिका परिषद सारणी में सरकारी वाहन को लेकर उठे सवालों के बीच अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।
यदि वाहन सुरक्षा कारणों से पूर्व अधिकारी के निवास पर रखा गया है, तो इस संबंध में विस्तृत प्रशासनिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने से सभी तरह की आशंकाओं और चर्चाओं पर विराम लग सकता है। वहीं यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, तो संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई कर स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण तथा आवश्यक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
