Gold Silver Price Today: रिकॉर्ड के करीब पहुंचे सोने-चांदी के दाम, बाजार में तेज उछाल
वैश्विक घटनाओं का असर सर्राफा बाजार पर
15 जून 2026 को घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और US-Iran के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में बड़े बदलाव देखने को मिले। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आई, जिससे निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख किया।
सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं को हमेशा वैश्विक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ती है, इन धातुओं की मांग में तेजी आ जाती है। इस बार भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां सोने में करीब 2 प्रतिशत और चांदी में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा 24 कैरेट सोना
भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना लगभग 1.59 लाख रुपये से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर रहा है।
22 कैरेट सोना भी मजबूती के साथ 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि 18 कैरेट सोना भी अपने उच्च स्तर पर ट्रेड कर रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम ग्राहकों और निवेशकों दोनों के लिए चिंता और रणनीति बदलने की स्थिति पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अस्थिरता बनी रहती है तो सोना और भी ऊंचे स्तर को छू सकता है।
प्रमुख शहरों में सोने के दामों का हाल
देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिला है। यह अंतर स्थानीय टैक्स, ट्रांसपोर्ट लागत और मांग के आधार पर होता है।
दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, चंडीगढ़, जयपुर और कानपुर जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,49,230 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
मुंबई, कोलकाता, पुणे, नागपुर, रायपुर, बैंगलोर, गुवाहाटी और केरल जैसे शहरों में यह दर ₹1,49,080 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज की गई।
चेन्नई में सोने की कीमतें सबसे अधिक देखी गईं, जहां 24 कैरेट सोना ₹1,51,200 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। दक्षिण भारत में सोने की मांग पारंपरिक रूप से अधिक रहने के कारण यहां कीमतें अन्य शहरों की तुलना में अधिक रहती हैं।
22 और 18 कैरेट सोने की स्थिति
केवल 24 कैरेट ही नहीं, बल्कि 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी मजबूती देखने को मिली है। 22 कैरेट सोना, जो आमतौर पर गहनों के लिए इस्तेमाल होता है, उसकी मांग में शादी-ब्याह के सीजन के कारण लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
18 कैरेट सोना, जो हल्के आभूषणों और फैशन ज्वेलरी में उपयोग होता है, उसकी कीमतों में भी समान अनुपात में वृद्धि हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के बावजूद सोने की मांग पूरी तरह से खत्म नहीं होती, बल्कि उपभोक्ता अपनी खरीदारी की मात्रा और समय में बदलाव करते हैं।
चांदी की कीमतों में भी मजबूत उछाल
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी बाजार में दमदार प्रदर्शन किया है। देशभर में चांदी की कीमतें लगभग 2.60 लाख रुपये से 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। औद्योगिक उपयोग और निवेश दोनों क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और औद्योगिक निर्माण में भी होता है, जिससे इसकी मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं रहती। यही कारण है कि वैश्विक आर्थिक बदलावों का असर चांदी की कीमतों पर भी तेजी से पड़ता है।
शहरवार चांदी के दाम
देश के प्रमुख शहरों में चांदी की कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं, हालांकि कुछ जगहों पर मामूली अंतर देखा गया है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गुरुग्राम, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में चांदी लगभग ₹2,60,000 प्रति किलोग्राम के आसपास रही।
वहीं चेन्नई, हैदराबाद, भुवनेश्वर, कटक और केरल जैसे शहरों में यह कीमत ₹2,65,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
इस अंतर का मुख्य कारण स्थानीय मांग और टैक्स संरचना मानी जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कच्चा तेल लगभग 4 प्रतिशत तक टूट गया है।
तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जहां एक ओर यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात होती है, वहीं दूसरी ओर यह निवेश बाजारों में नए बदलाव लाता है।
तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर की कमजोरी ने मिलकर सोने की कीमतों को बढ़ावा दिया है।
डॉलर इंडेक्स की भूमिका
सोने की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य देशों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है।
भारत जैसे देशों में इसका असर सीधे तौर पर देखा जाता है, जहां आयातित सोने की कीमतें डॉलर पर निर्भर करती हैं। इस बार भी यही स्थिति देखने को मिली, जिससे सोने में तेजी आई।
निवेशकों के लिए बदलती रणनीति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर सोने में निवेश करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड स्तर के आसपास हैं, ऐसे में अचानक गिरावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। इससे जोखिम कम होता है और औसत खरीद मूल्य भी संतुलित रहता है।
शादी-ब्याह या पारिवारिक जरूरतों के लिए खरीदारी करने वाले लोगों को भी बाजार पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की कीमतों को लगातार प्रभावित करती हैं। जब भी दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
इस समय भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां निवेशक शेयर बाजार की बजाय सोने और चांदी में निवेश बढ़ा रहे हैं।
आगे की संभावनाएं और बाजार का रुख
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों, डॉलर इंडेक्स की स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी।
यदि वैश्विक तनाव कम होता है और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में हल्की गिरावट संभव है। वहीं यदि अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोना और चांदी नए रिकॉर्ड भी बना सकते हैं।
निष्कर्ष
15 जून 2026 का दिन सर्राफा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा, जहां सोने और चांदी दोनों में मजबूत तेजी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की कमजोरी और निवेशकों की बढ़ती मांग ने मिलकर इस तेजी को और मजबूत किया।
फिलहाल बाजार रिकॉर्ड स्तर के करीब है और निवेशकों की नजरें वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी संभावना है।
