रिमझिम बारिश के बीच बप्पा की विदाई, ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंजा झकनावदा
झकनावदा (मनीष कुमट)। दस दिवसीय गणेशोत्सव के समापन अवसर पर शुक्रवार को झकनावदा नगर में भगवान श्री गणेश की भव्य विसर्जन यात्रा निकाली गई। रिमझिम बारिश के बीच निकली इस यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। आसमान से लगातार बरसती बूंदें भी भक्तों की आस्था और उमंग को कम नहीं कर सकीं। नगर की गलियां ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंज उठीं।
नगर के सिरवी मोहल्ला के राजा, अंबिका चौक के राजा, सार्वजनिक गणेश उत्सव समिति, राठौड़ मोहल्ला के राजा, मिस्त्री मोहल्ला के राजा, नीम चौक के राजा, गायरी मोहल्ला के राजा और पुराना बस स्टैंड के राजा सहित विभिन्न स्थानों पर विराजित गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु सजी-धजी झांकियों के साथ विसर्जन यात्रा में लेकर निकले। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। रास्तेभर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
सजी-धजी झांकियों के साथ निकली विसर्जन यात्रा
गणेशोत्सव के दौरान विभिन्न गणेश पंडालों और घरों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन से पहले आकर्षक ढंग से सजाया गया। प्रतिमाओं को रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित झांकियों में विराजित किया गया। इसके बाद श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ उन्हें लेकर विसर्जन यात्रा में शामिल हुए।
रिमझिम बारिश के बावजूद यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। नगर के प्रमुख मार्गों पर लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। धार्मिक गीतों और जयघोष के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
ढोल की थाप पर थिरके युवा, बच्चों में भी दिखा उत्साह
विसर्जन यात्रा के दौरान ढोल की थाप ने माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया। युवा श्रद्धालु धार्मिक गीतों पर जमकर थिरकते नजर आए। बारिश के बीच भी उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई। जगह-जगह ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे सुनाई देते रहे।
बच्चे भी गणपति बप्पा की भक्ति में लीन नजर आए। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं ने विसर्जन यात्रा में हिस्सा लिया। बारिश की फुहारों के बीच ढोल की आवाज और श्रद्धालुओं के जयघोष ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया।
सप्तऋषि महादेव को जल अर्पित करने वाली झांकी रही आकर्षण
विसर्जन यात्रा में शामिल विभिन्न झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इनमें सप्तऋषि महादेव को जल अर्पित करने वाली आकर्षक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। धार्मिक स्वरूप और रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित झांकियों को देखने के लिए मार्ग में लोगों की भीड़ नजर आई।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। गणेशोत्सव के दौरान नगर में कई दिनों तक धार्मिक आयोजनों का दौर चलता रहा, जिसका समापन विसर्जन यात्रा के साथ हुआ।
बप्पा की विदाई पर भावुक हुआ माहौल
दस दिनों तक घरों और गणेश पंडालों में विराजमान रहे भगवान गणेश को विदाई देने का अवसर श्रद्धालुओं के लिए भावुक कर देने वाला रहा। विसर्जन से पहले विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर नगर में पधारने की प्रार्थना की।
‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल की ओर लेकर रवाना हुए। कई श्रद्धालुओं की आंखों में विदाई का भाव नजर आया।
पुलिस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था, गोताखोर दल रहा तैनात
गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। मधुकन्या नदी और माही नदी स्थित श्रृंगेश्वर धाम पर चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया, झकनावदा ने पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर पुलिस टीम लगातार निगरानी करती रही। वहीं माही नदी स्थित श्रृंगेश्वर धाम तट पर गोताखोर दल को भी तैनात किया गया था। पुलिस और गोताखोर दल की मौजूदगी में प्रतिमा विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
बारिश के बीच भक्ति और आस्था का दिखा अनोखा संगम
झकनावदा में रिमझिम बारिश के बीच निकली गणेश विसर्जन यात्रा ने भक्ति और आस्था का अलग ही रंग दिखाया। एक ओर आसमान से बारिश की बूंदें बरसती रहीं, तो दूसरी ओर श्रद्धालु ढोल की थाप पर नाचते और गणपति बप्पा के जयकारे लगाते रहे।
दस दिवसीय गणेशोत्सव के समापन पर नगरवासियों ने अपने आराध्य भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई दी। प्रतिमा विसर्जन के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष बप्पा के फिर से आगमन की कामना की। पूरे नगर में यही स्वर गूंजता रहा—‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।’
