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विसर्जन सिर्फ मूर्ति का नहीं होता, कुछ भाव भी आज पानी में उतरते हैं…

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Published On: 26 September 2026
विसर्जन

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विसर्जन सिर्फ मूर्ति का नहीं होता…

विसर्जन सिर्फ मूर्ति का नहीं होता,
कुछ भाव भी आज पानी में उतरते हैं…
कुछ प्रार्थनाएं चुप हो जाती हैं,
कुछ आंसू बिना कहे बिखरते हैं।

जिस बप्पा को रोज निहारा था,
आज उन्हीं से नजरें चुरानी पड़ती हैं।
जिनके सामने दिल खोलकर रोए थे,
आज उन्हीं से विदाई कहनी पड़ती है।

**बप्पा…**

आपको मिट्टी से बनाकर पूजा था,
आज उसी मिट्टी में लौटाना है।
शायद यही जीवन का सच है—
जो आया है, उसे एक दिन लौट जाना है।

पर एक बात समझ आई,
ईश्वर मूर्ति में बसते हैं,
मगर सिर्फ मूर्ति तक सीमित नहीं होते।
विसर्जन के बाद भी
अगर मन में श्रद्धा बची रहे,
तो बप्पा कभी हमसे दूर नहीं होते।

आज आपकी प्रतिमा जाएगी,
पर आपकी सीख यहीं रहेगी…
आपकी कृपा यहीं रहेगी…
और सबसे बढ़कर—
आपका नाम हमारे भीतर हमेशा जीवित रहेगा।

इसलिए आंखों में आंसू हैं,
पर दिल में विश्वास भी है—
बप्पा आज जा नहीं रहे,
बस अगली मुलाकात का वादा कर रहे हैं।

**गणपति बप्पा मोरया…
अगले बरस तू जल्दी आ।**

**— पूनम रमेश गांधी**
**राजस्थान**

चाहें तो मैं इसके लिए **Hindi/English headline, सोशल मीडिया caption और hashtags** भी तैयार कर सकता हूं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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