—Advertisement—

फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पने का सनसनीखेज मामला: जिंदा महिला को दस्तावेजों में बताया मृत, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

Author Picture
Published On: 1 April 2026
img 1774949675515 gfvd3a photo 8

—Advertisement—

इंदौर में फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पने का मामला सामने आया। जीवित महिला को मृत घोषित कर पौने दो बीघा जमीन हड़प ली गई। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर।

फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पी: जिंदा महिला को दस्तावेजों में बताया मृत, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

इंदौर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया और उसकी जमीन हड़प ली गई। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

इंदौर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पने का यह मामला इतना चौंकाने वाला है कि कलेक्टर को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। सांवेर तहसील की रहने वाली गीताबाई नाम की बुजुर्ग महिला अपने बेटे हरिराम के साथ कलेक्टर के समक्ष न्याय की गुहार लेकर पहुंची।

कलेक्टर कार्यालय में पहुंची जिंदा महिला

जनसुनवाई के दौरान जब गीताबाई ने अपनी बात रखी तो वहां मौजूद अधिकारी और अन्य लोग हैरान रह गए। महिला ने आरोप लगाया कि सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वह पूरी तरह से जीवित है और स्वस्थ है। उसने बताया कि जब उसे इस धोखाधड़ी के बारे में पता चला तो उसके होश उड़ गए।

गीताबाई ने कलेक्टर को बताया, “मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं, अपनी जमीन देखने जाती हूं, लेकिन सरकारी कागजात में मैं मृत हूं। मेरी जमीन किसी और के नाम कर दी गई है। यह मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय है।”

सरपंच कार्यालय की मिलीभगत से बना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र

गीताबाई के अनुसार, यह पूरा खेल सरपंच कार्यालय के कर्मचारियों और कुछ जमीन माफियाओं की मिलीभगत से खेला गया। उसने आरोप लगाया कि बिना किसी सत्यापन के, बिना मेडिकल रिपोर्ट के, ग्राम पंचायत कार्यालय से उसका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र (Fake Death Certificate) जारी कर दिया गया।एक जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना कोई मामूली धोखाधड़ी नहीं है। यह साफ तौर पर सरकारी तंत्र के गलत इस्तेमाल को दर्शाता है। आमतौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पंचनामा, अंतिम संस्कार की पुष्टि और स्थानीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया होती है, लेकिन इस मामले में यह सब नजरअंदाज किया गया।

पौने दो बीघा जमीन का हड़पने का आरोप

इस फर्जी दस्तावेज का सबसे बड़ा फायदा जय बजाज नाम के एक व्यक्ति को हुआ। गीताबाई का आरोप है कि जय बजाज ने इस फर्जी मौत प्रमाण पत्र के आधार पर राजस्व विभाग में दस्तावेज दाखिल किए और उसकी करीब पौने दो बीघा (लगभग 1.75 बीघा) जमीन अपने नाम करवा ली। यह जमीन गीताबाई के परिवार की मुख्य आय का साधन थी और उसके पूर्वजों से चली आ रही थी।ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी ने न केवल सरपंच कार्यालय बल्कि राजस्व विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत से पटवारी रिकॉर्ड में नामांतरण कराया। जब तक गीताबाई और उसके परिवार को इसकी भनक लगी, तब तक जमीन के कागजात बदल चुके थे।

Read also :Ambedkar Nagar: महिलाओं ने लाठी-डंडे उठाकर किया शराब दुकान का विरोध, महू-नीमच हाईवे पर लगाया जाम – जानिए पूरा मामला

जमीन पर पहुंचे बेटे के साथ मारपीट

जब गीताबाई के बेटे हरिराम को यह धोखाधड़ी का मामला पता चला, तो वह तुरंत अपनी जमीन पर पहुंचा। हरिराम का कहना है कि जब उसने जमीन पर अपना हक जताने की कोशिश की, तो वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की।हरिराम ने बताया, “मैंने उन लोगों से पूछा कि वे हमारी जमीन पर क्यों कब्जा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने मुझे धमकाया और मारा-पीटा। जब मैं थाने गया तो वहां भी मेरी सुनवाई नहीं हुई। पुलिस वाले कह रहे थे कि यह सिविल मामला है।”

पुलिस की लापरवाही और कलेक्टर से गुहार

हरिराम ने बताया कि जब उसने थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी। पुलिस की इस लापरवाही से निराश होकर, हरिराम अपनी मां गीताबाई को लेकर सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचा।उन्होंने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि जब तक प्रशासन हस्तक्षेप नहीं करेगा, उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा। हरिराम ने कहा, “हम गरीब लोग हैं। अगर कलेक्टर साहब हमारी मदद नहीं करेंगे तो कोई नहीं करेगा। पुलिस और पटवारी मिलकर हमारी जमीन लूट रहे हैं।”

जांच के आदेश और संभावित कार्रवाई

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने इस मामले में तुरंत जांच के आदेश दे दिए। कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम को निर्देश दिया कि वह इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करें और रिपोर्ट पेश करें।कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पने जैसे गंभीर मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जांच के मुख्य बिंदु

  • मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता: जांच का सबसे अहम बिंदु यह होगा कि एक जीवित महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे और किसके आदेश पर जारी किया गया।
  • राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण: यह देखा जाएगा कि पटवारी सर्कल में बिना किसी भौतिक सत्यापन के नामांतरण कैसे स्वीकार कर लिया गया।
  • पुलिस की भूमिका: मारपीट की शिकायत दर्ज न करने पर भी जांच होगी कि आखिर संबंधित थाने की पुलिस ने क्यों लापरवाही बरती।

विशेषज्ञ की राय

भूमि विवादों के जानकार वकील राजेश शर्मा के अनुसार, “यह मामला बेहद गंभीर है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना धारा 468 (जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का प्रयोग) के तहत दंडनीय अपराध है। अगर सरकारी अधिकारी इसमें शामिल पाए जाते हैं, तो यह भ्रष्टाचार का मामला भी बनता है। पीड़ित को तुरंत राहत मिलनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।”

राजनीतिक हलचल

इस मामले ने इंदौर के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह से धराशायी हो चुका है। एक स्थानीय नेता ने कहा, “अगर कोई जिंदा इंसान को मृत घोषित कर सकता है, तो फिर इस व्यवस्था पर कैसे भरोसा किया जा सकता है? यह सिर्फ एक महिला के साथ नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के साथ धोखा है।”

पीड़िता की दशा

गीताबाई इन दिनों मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। उनका कहना है कि जमीन ही उनके परिवार का एकमात्र सहारा थी। उनके बेटे हरिराम ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरी करता है, लेकिन अब उसकी नौकरी भी खतरे में है क्योंकि आरोपी लगातार उन्हें धमकी दे रहे हैं।हरिराम ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कलेक्टर साहब की जांच के बाद हमें इंसाफ मिलेगा। हम चाहते हैं कि हमारी जमीन वापस हमारे नाम हो और जिन लोगों ने यह सब किया, उन्हें सजा मिले।”

कैसे बचें इस तरह की धोखाधड़ी से?

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने के लिए नागरिकों को खुद सतर्क रहना होगा:

  • लैंड रिकॉर्ड की नियमित जांच: हर छह महीने में अपने गांव के पटवारी से अपने नाम पर दर्ज जमीन का रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) जरूर चेक करें।
  • फर्जी दस्तावेजों से सावधान: अगर आपको कभी लगे कि किसी ने आपके नाम का फर्जी दस्तावेज बना लिया है, तो तुरंत राजस्व विभाग और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
  • साइबर पोर्टल का उपयोग: अब कई राज्यों में लैंड रिकॉर्ड ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। इस सुविधा का लाभ उठाएं।

निष्कर्ष

इंदौर का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है। फर्जी मौत का कागज बनाकर जमीन हड़पने की यह घटना दर्शाती है कि अगर व्यवस्था पर नजर नहीं रखी गई तो कोई भी अपनी जमीन सुरक्षित नहीं रख सकता। अब सबकी निगाहें कलेक्टर द्वारा बैठाई गई जांच टीम पर हैं। देखना यह होगा कि क्या पीड़िता को न्याय मिलता है और क्या इस मामले में शामिल लोगों को सजा मिल पाती है।

Related News

Comments are closed.

Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp