दिलीप सिंह भूरिया 11वीं पुण्यतिथि पर Jhabua में हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। आदिवासी परंपरा से पूजन, 30 मीटर साफा बांधकर स्व. दिलीप सिंह भूरिया को याद किया गया। कार्यक्रम में मंत्री निर्मला भूरिया सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
दिलीप सिंह भूरिया 11वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, आदिवासी परंपरा से दी गई श्रद्धांजलि
Jhabua प्रतिनिधि : मनीष कुमट
दिलीप सिंह भूरिया 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब
दिलीप सिंह भूरिया 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को Jhabuaमें आदिवासी समाज के कद्दावर नेता एवं पेसा एक्ट के जनक स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी प्रतिमा स्थल पर सुबह से ही हजारों अनुयायियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों का तांता लगा रहा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर आदिवासी समाज के इस महान जननायक को नमन किया।कार्यक्रम स्थल पर पूरे दिन श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ती रही। श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोगों ने स्वर्गीय भूरिया के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था।
आदिवासी परंपरा से हुआ पूजन-अर्चन
स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया की 11वीं पुण्यतिथि पर उनके परिवार के सदस्यों ने आदिवासी संस्कृति और परंपरा के अनुसार विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा पर विशेष रूप से 30 मीटर लंबा साफा बांधा गया, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान “जब तक सूरज चांद रहेगा, भूरिया जी का नाम रहेगा” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
निर्मला भूरिया ने कहा- महान व्यक्तित्व कभी विदा नहीं होते
प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री एवं स्व. दिलीप सिंह भूरिया की पुत्री निर्मला भूरिया भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुईं।उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्व कभी विदा नहीं होते, बल्कि अपने विचारों, कार्यों और प्रेरणाओं के माध्यम से सदैव समाज के बीच जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए जीवनभर संघर्ष किया और समाज को नई दिशा प्रदान की।निर्मला भूरिया ने कहा कि पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष के रूप में स्व. दिलीप सिंह भूरिया ने आदिवासी हितों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पेसा एक्ट के माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
नेताओं ने याद किए स्व. भूरिया के योगदान
भाजपा जिलाध्यक्ष भानु भूरिया ने कहा कि स्व. दिलीप सिंह भूरिया आदिवासी समाज की बुलंद आवाज थे। उन्होंने अपने संघर्षों और कार्यों के माध्यम से समाज के अधिकारों की रक्षा की और आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाया।वरिष्ठ आदिवासी नेता श्यामा ताहेड़ ने कहा कि स्व. भूरिया ने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों और विरोधों का सामना किया, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे अंतिम समय तक आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे।
पेसा एक्ट और आदिवासी अधिकारों की विरासत
पेसा एक्ट के जनक के रूप में मिली पहचान
स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया को देशभर में पेसा एक्ट के जनक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को अधिकार दिलाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए।उनके प्रयासों का परिणाम था कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिले और स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हुई। यही कारण है कि आज भी आदिवासी समाज उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानता है।
बड़ी संख्या में पहुंचे जनप्रतिनिधि एवं नागरिक
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कलसिंह भाबर, पूर्व सांसद गुमान सिंह डामोर, रमेश सोलंकी, नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि बिट्टू सिंगार सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लेकर स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे कार्यक्रम के दौरान भावनात्मक माहौल बना रहा और लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
