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निधन के बाद दिलीप झामर के परिवार ने लिया बड़ा फैसला, दो लोगों की जिंदगी में लौटेगी रोशनी

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Published On: 9 August 2026
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दिलीप झामर के निधन के बाद झामर परिवार ने नेत्रदान का अनुकरणीय फैसला लिया। लायन्स क्लब जावरा की टीम ने प्रक्रिया पूरी की, दो जरूरतमंदों को मिलेगा दृष्टि का लाभ।

दिलीप झामर नेत्रदान: निधन के बाद परिवार का अनुकरणीय फैसला, दो जरूरतमंदों के जीवन में लौटेगी रोशनी

जावरा। दिवंगत दिलीप झामर नेत्रदान का निर्णय उनके परिवार ने लेकर समाज के सामने मानवीय संवेदना और परोपकार की एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। दिलीप झामर के निधन के बाद उनके परिजनों ने दुख की इस घड़ी में ऐसा पुनीत फैसला लिया, जिससे दो जरूरतमंद व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लौटाने की उम्मीद जगी है। परिवार के इस निर्णय की जावरा में सराहना की जा रही है।

रिपोर्टर: संदीप रांका

परिवार ने लिया नेत्रदान का निर्णय

दिवंगत दिलीप झामर के स्वर्गवास के उपरांत उनके परिवार ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया। परिवार का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया, जब परिजन अपने प्रियजन को खोने के गम में थे। इसके बावजूद उन्होंने मानवीय संवेदना को प्राथमिकता देते हुए मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया।

इस दिलीप झामर नेत्रदान के माध्यम से दो जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि का लाभ मिलने की उम्मीद है। परिवार के इस निर्णय ने यह संदेश दिया है कि इंसान अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे के जीवन में उजाला छोड़ सकता है।

नेत्रदान को समाज में मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। लायन्स इंटरनेशनल भी लंबे समय से दृष्टि संरक्षण और नेत्र सेवा के क्षेत्र में कार्य करता रहा है।

लायन्स नेत्र चिकित्सालय की टीम ने पूरी की प्रक्रिया

दिवंगत दिलीप झामर के नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया लायन्स क्लब जावरा द्वारा संचालित लायन्स नेत्र चिकित्सालय जावरा की टीम द्वारा संपन्न कराई गई।परिवार की सहमति मिलने के बाद चिकित्सालय की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने सहयोग प्रदान किया और दिवंगत दिलीप झामर की स्मृति को समाजसेवा से जोड़ते हुए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया।लायन्स क्लब इंटरनेशनल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लायन्स से जुड़े आई बैंक मानव नेत्र ऊतक को प्राप्त करने, उसका मूल्यांकन, संरक्षण और दृष्टि बहाली से जुड़ी चिकित्सा प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं।

भाइयों और पुत्रों की सहमति से हुआ पुनीत कार्य

दिवंगत दिलीप झामर के भाई अशोक झामर, विजय झामर और संजय झामर तथा उनके पुत्र अमित झामर और शोभित झामर की सहमति से यह पुनीत कार्य संपन्न हुआ।परिवार ने अपने दुख को समाज के लिए प्रेरणा में बदलते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। यही कारण है कि झामर परिवार के इस कदम को जावरा में मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।यह फैसला दूसरे परिवारों को भी नेत्रदान के प्रति जागरूक करने में मददगार साबित हो सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला लौटाना निश्चित रूप से मानव सेवा का एक महत्वपूर्ण रूप है।

लायन्स क्लब जावरा और भारत विकास परिषद ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत दिलीप झामर को लायन्स क्लब जावरा और भारत विकास परिषद की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।लायन्स क्लब जावरा की ओर से परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की गई कि वे शोकाकुल झामर परिवार को इस दुखद वज्रपात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें तथा दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।परिवार के इस परोपकारी निर्णय के लिए लायन्स क्लब जावरा की ओर से झामर परिवार को साधुवाद दिया गया और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सेवा कार्य में इन लोगों का रहा विशेष सहयोग

नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान लायन्स क्लब जावरा के पदाधिकारी, भारत विकास परिषद के प्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।इस अवसर पर प्रमुख रूप से:

  • संदीप रांका — सचिव, लायन्स क्लब जावरा
  • प्रदीप शर्मा — चेयरमैन, लायन्स नेत्र चिकित्सालय
  • विपिन चौरडिया — कोषाध्यक्ष
  • शेखर नाहर — अध्यक्ष, भारत विकास परिषद

इसके अलावा लायन्स नेत्र चिकित्सालय की टीम के सदस्य अजय प्रजापत, विपुल पंवार और पूरण सिंह का नेत्रदान प्रक्रिया में विशेष और सराहनीय सहयोग रहा।लायन्स क्लब की वैश्विक गतिविधियों में भी दृष्टि सेवा एक प्रमुख क्षेत्र है और संस्था ने नेत्र देखभाल तथा दृष्टि संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए हैं।

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समाज के लिए प्रेरणादायी बना झामर परिवार का फैसला

दिवंगत दिलीप झामर के परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय केवल एक परिवार की संवेदना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को मानवता और परोपकार का संदेश भी देता है।किसी अपने को खोने का दुख बेहद गहरा होता है। ऐसे समय में परिवार द्वारा नेत्रदान के लिए सहमति देना निश्चित रूप से साहस और मानवीय संवेदना का परिचायक है।झामर परिवार ने यह साबित किया है कि जीवन समाप्त होने के बाद भी इंसान किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में उम्मीद और उजाला छोड़ सकता है। दिलीप झामर नेत्रदान इसी भावना का प्रतीक बन गया है।लायन्स क्लब जावरा और लायन्स नेत्र चिकित्सालय की टीम द्वारा किए गए इस सेवा कार्य से भी समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश जाता है।

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