दीक्षा अर्ध-शताब्दी वर्ष पर गूंजा गुरु गुणगान, झाबुआ श्री संघ ने लिया 9 करोड़ जाप का महासंकल्प
89 वर्ष की उम्र में भी उत्कृष्ट संयम साधना कर रहे आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी, गुरु गुणानुवाद सभा से लेकर सामूहिक सामायिक, आयम्बिल तप और प्रभु भक्ति तक विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित
झाबुआ। श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पावन धरा पर वर्तमान सोधर्म-बृहत्तपागच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब के दीक्षा अर्ध-शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर गुरु भक्ति और संयम अनुमोदना का अनुपम वातावरण देखने को मिला। अत्र विराजित विदुषी साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में जैन श्री संघ झाबुआ द्वारा गुरु गुणानुवाद सभा, सामूहिक सामायिक, आयम्बिल तप, नवकार महामंत्र जाप और प्रभु भक्ति सहित विविध अमृत अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर आचार्य श्री के दीर्घ संयम जीवन की अनुमोदना की। इस दौरान पूरा वातावरण गुरु भक्ति और जिनशासन के जयकारों से गुंजायमान रहा।
गुरु गुणानुवाद सभा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर जी म.सा. के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा. एवं आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी तपस्वी साध्वी श्री शशिकलाश्री जी म.सा. की सुशिष्या विदुषी साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावनकारी निश्रा में प्रातः 9:15 बजे गुरु गुणानुवाद सभा का शुभारंभ हुआ।
गुरु गुणानुवाद सभा में उपस्थित समाजजनों ने आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब के संयम जीवन, जिनशासन प्रभावना और धार्मिक योगदान का स्मरण करते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
’89 वर्ष की उम्र में भी उत्कृष्ट संयम साधना प्रेरणादायी’
साध्वी श्री अविचलद्रष्टा श्री जी म.सा. ने पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब की संयम साधना की अनुमोदना करते हुए कहा कि दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात पूज्य गुरुदेव ने उत्कृष्ट संयम साधना के माध्यम से भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात किया तथा इन्हें जन-जन तक पहुंचाने का भगीरथ कार्य किया।
उन्होंने कहा कि 89 वर्ष की उम्र में भी जिस दृढ़ता, सजगता और उत्कृष्टता के साथ पूज्य गुरुदेव संयम जीवन की साधना कर रहे हैं, वह साधु जीवन की उत्कृष्ट पालना का अनुपम उदाहरण है। उनका जीवन प्रत्येक साधक के लिए प्रेरणा के प्रकाशस्तंभ के समान है।
‘झाबुआ श्री संघ के शिरस्थ गुरु भगवंत हैं आचार्य श्री’
श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने गुरु गुणानुवाद करते हुए कहा कि जैन श्री संघ झाबुआ के शिरस्थ गुरु भगवंत गच्छाधिपति आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वर जी महाराज साहेब हैं। उनके मार्गदर्शन, प्रेरणा और आशीर्वाद से झाबुआ में अंजनशलाका प्रतिष्ठा, उपधान तप सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्य संपन्न हुए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूज्य गुरुदेव की आज्ञा में 200 से अधिक साधु-साध्वी भगवंत विचरण कर रहे हैं। उनकी निश्रा में 50 से अधिक उपधान तप संपन्न हुए हैं, जिनमें 15 हजार से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने सूत्रों की ज्ञान-वाचना लेकर योगोद्वहन किया। उन्होंने इसे जिनशासन की प्रभावना के क्षेत्र में गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
400 से अधिक पुस्तकों के माध्यम से जिनवाणी का प्रसार
श्री संघ के वरिष्ठ अशोक कटारिया ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने 400 से अधिक पुस्तकों का लेखन कर भगवान महावीर के संदेश, जिनवाणी और आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का अतुलनीय कार्य किया है।
श्रीमती हंसा कोठारी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य श्री चलते-फिरते भगवान के समान हैं तथा दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वर जी महाराज साहेब की साक्षात प्रतिमूर्ति प्रतीत होते हैं।
इस अवसर पर आयु छाजेड़ ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर गुरुदेव के प्रति श्रद्धा और भक्ति के भाव व्यक्त किए।
विशुद्ध चारित्र साधना से जिनशासन प्रभावना को नई गति
वरिष्ठ सुश्रावक धर्मचंद मेहता, मनोहरलाल छाजेड़ और निखिल भण्डारी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव विशुद्ध चारित्र के पालक एवं जिनशासन के प्रभावक संत हैं। उनकी प्रेरणा और निश्रा में सैकड़ों जिन मंदिरों एवं गुरु मंदिरों की प्रतिष्ठा हुई, अनेक उपाश्रयों के निर्माण की प्रेरणा मिली तथा विशिष्ट छरिपालित संघों में निश्रा प्रदान कर जिनशासन के अनेक प्रभावक कार्यों को गति दी गई।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1,500 से अधिक आराधकों के साथ गुजरात स्थित श्री शंखेश्वर तीर्थ में पूज्य गुरुदेव का चातुर्मास प्रवर्तमान है।
सामूहिक सामायिक और आयम्बिल तप में उमड़ी श्रद्धा
संयम अनुमोदना के क्रम में दोपहर के समय आयम्बिल तप और सामूहिक सामायिक का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्म आराधना की।
इस दौरान नवकार महामंत्र और गुरुदेव द्वारा प्रदत्त जाप किए गए। सामूहिक जाप से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से सराबोर हो गया।
सायंकाल प्रतिक्रमण के पश्चात श्री ऋषभदेव बावन जिनालय को दीपकों से भव्य रूप से सजाया गया। जिनालय में आयोजित संगीतमय प्रभु भक्ति में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए और आदिनाथ प्रभु की भक्ति में भावविभोर होकर लीन हो गए।
50वें दीक्षा वर्ष में 9 करोड़ जाप का महासंकल्प
गुरुदेव के दीक्षा अर्ध-शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से स्मरणीय बनाने के लिए जैन श्री संघ झाबुआ द्वारा वर्षभर विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
इसी क्रम में दादा गुरुदेव द्वारा प्रदत्त मंत्रों के 9 करोड़ जाप करने का सामूहिक महासंकल्प झाबुआ श्री संघ ने लिया है। वर्षभर आयोजित होने वाले अमृत अनुष्ठानों के माध्यम से अधिक से अधिक श्रावक-श्राविकाओं को साधना, आराधना और गुरु भक्ति से जोड़ने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
गुरु गुणानुवाद, संयम अनुमोदना, सामूहिक आराधना और 9 करोड़ जाप के महासंकल्प से सुसज्जित यह आयोजन झाबुआ जैन समाज के लिए गुरु भक्ति, जिनशासन प्रभावना और आध्यात्मिक चेतना का विशेष अवसर बन गया।
