दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि और संयम का संदेश देता है: आचार्य उदारसागर
Morena (मनोज जैन नायक)। दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर चातुर्मासरत आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दशलक्षण पर्व केवल दस दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मा को विकारों से मुक्त करने और आत्मशुद्धि की साधना का अवसर है। उत्तम क्षमा से प्रारंभ होकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक पहुंचने वाले दस धर्म मनुष्य को संयम, सत्य, त्याग, तप और आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि पर्व के दौरान अपनाए गए सद्गुणों को जीवनभर व्यवहार में उतारना ही इसकी वास्तविक सार्थकता है। मनुष्य को क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग करते हुए अपने आत्मस्वरूप की ओर बढ़ना चाहिए। केवल बाहरी पूजा और धार्मिक अनुष्ठान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके साथ मन और व्यवहार की शुद्धि भी जरूरी है। यदि दशलक्षण पर्व के बाद व्यक्ति के व्यवहार में क्षमा, विनम्रता, सत्य और संयम दिखाई देने लगे, तभी पर्व की साधना सार्थक मानी जाएगी।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि दस दिनों के दौरान किए गए जप, तप और उपासना को पर्व समाप्त होने के साथ छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें आगे भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यंत पुण्य कर्मों के उदय से मनुष्य पर्याय प्राप्त हुई है, इसलिए इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। सत्कार्य, पुण्यार्जन और संयम की साधना करते हुए मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना ही मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
धर्म को जीवन में उतारना ही पर्व की सार्थकता: मुनिश्री उपशांत सागर
मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दशलक्षण पर्व समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब इसके संदेश को जीवन में उतारने की शुरुआत हुई है। दस धर्म मनुष्य को यह समझाते हैं कि वास्तविक सुख और शांति बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर निहित हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन आत्मावलोकन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से पूछना चाहिए कि आज उसने किसी को दुख तो नहीं दिया, किसी के प्रति क्रोध या अहंकार तो नहीं किया और अपने मन, वचन एवं काय को कितना संयमित रखा। दशलक्षण धर्म का उद्देश्य मनुष्य को श्रेष्ठ आचरण की ओर ले जाना है। श्रद्धा के साथ साधना और साधना के साथ सदाचार को अपनाने से जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है।
बड़े जैन मंदिर में हुआ जिनेन्द्र प्रभु का भव्य जलाभिषेक
दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज एवं मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर और लोहिया बाजार स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन पल्लीवाल मंदिर में भगवान जिनेन्द्र प्रभु के कलशाभिषेक का आयोजन किया गया। दोनों जिनालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री, पूर्व प्राचार्य, के निर्देशन में कुएं के सात्विक एवं प्रासुक जल से भगवान जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक किया गया। दशलक्षण पर्व के समापन पर स्वर्ण कलशों से हुए जलाभिषेक में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सुरेन्द्र जैन नायक डिब्बे परिवार एवं मोहित जैन तार परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य महेशचंद्र-अनिलकुमार अजहेड़ा परिवार एवं मोहित जैन तार वाले को मिला।

चंद्रप्रभु जिनालय में फूलमाला की बोली
लोहिया बाजार स्थित श्री चंद्रप्रभु पल्लीवाल दिगम्बर जैन मंदिर में भी जलाभिषेक समारोह श्रद्धा और भक्तिभाव के वातावरण में संपन्न हुआ। विशाल जनसमुदाय की उपस्थिति में फूलमाला की बोली प्राप्त करने का सौभाग्य माधवप्रसाद-संजय जैन सर्राफ को मिला।
प्रथम कलश का सौभाग्य हितेन्द्रकुमार-लाभांश जैन को प्राप्त हुआ, जबकि आरती करने का अवसर राजेंद्रप्रसाद साकेत जैन भंडारी परिवार को मिला। सभी इंद्रों ने सामूहिक रूप से भगवान जिनेन्द्र प्रभु की शांतिधारा की।
जयकारों से गूंजे अभिषेक मंडप
जलाभिषेक के दौरान दोनों जिनालयों में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण रहा। जैसे ही प्रासुक जल की धारा भगवान जिनेन्द्र प्रभु के मस्तक पर पड़ी, श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ भगवान के जयकारे लगाए। इंद्रों के रूप में श्रद्धालु चांदी के मुकुट, हार, मणिमाला एवं केसरिया पूजन वस्त्रों से सुसज्जित होकर अभिषेक में शामिल हुए।
इस अवसर पर मंचासीन आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज एवं मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण किया गया। दशलक्षण महापर्व के दस दिनों की धार्मिक साधना के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र की आराधना कर सुख-शांति, आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने की मंगलकामना की।
