भव्य मंगल प्रवेश कुंडलपुर दमोह में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ का ऐतिहासिक आगमन 14 मार्च 2026 को होगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंगल अगवानी करेंगे।
भव्य मंगल प्रवेश कुंडलपुर दमोह
भव्य मंगल प्रवेश कुंडलपुर दमोह
सौभाग्य की शुभ घड़ी में जैन समाज के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण आने जा रहा है। समाधीष्टगणाचार्य प्रवर श्री 108 विरागसागर जी महाराज के योग्य शिष्य, श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ का भव्य मंगल प्रवेश कुंडलपुर दमोह में होने जा रहा है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू, इंदौर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मंगलमय प्रवेश शनिवार दिनांक 14 मार्च 2026 को प्रातः कुंडलपुर स्थित बड़े बाबा के दरबार में संपन्न होगा।
आचार्य विशुद्ध सागर जी का आगमन
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ का यह मंगल प्रवेश जैन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। आचार्य श्री की तप, त्याग और साधना से प्रेरित होकर हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए पहुंचेंगे।
कुंडलपुर, जो जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, वहां आचार्य श्री का मंगल प्रवेश श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण निर्मित करेगा।
श्रद्धालुओं की भव्य मंगल अगवानी
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्य श्री की भव्य मंगल अगवानी के लिए सागर, जबलपुर, दमोह, इंदौर, कटनी सहित अनेक शहरों से गुरु भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
इस अवसर पर
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महिलाएं मंगल कलश और केसरिया वस्त्र में
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पुरुष श्वेत वस्त्र में
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बच्चे शुभ्र वेशभूषा में
शामिल होकर आचार्य श्री की अगवानी करेंगे।
श्रद्धालु “नमोस्तु शासन जयवंत हो” के जयघोष के साथ आचार्य श्री का स्वागत कर अपने जीवन को धन्य बनाएंगे।
आहारचर्या और विहार की जानकारी
कार्यक्रम के अंतर्गत आहारचर्या श्री कुंडलपुर, दमोह (मध्य प्रदेश) में सम्पन्न होगी। इसके बाद सायंकाल आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ का आगे की ओर विहार होगा।
यह संपूर्ण कार्यक्रम जैन समाज के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्म जागरण का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
कार्यक्रम का धार्मिक महत्व
कुंडलपुर में होने वाला यह भव्य मंगल प्रवेश कुंडलपुर दमोह जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पावन अवसर है। ऐसे अवसरों पर संतों के दर्शन, प्रवचन और मंगलमय उपस्थिति से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त होती है।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का आगमन समाज में धर्म, संयम और संस्कारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
