📌 बिहार विधानसभा चुनाव 2025: दो चरणों में मतदान — 6 और 11 नवंबर को वोटिंग, 14 नवंबर को आएंगे नतीजे
पटना / नई दिल्ली | अक्टूबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की औपचारिक घोषणा सोमवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हो गई। आयोग ने बताया कि इस बार राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। पहला चरण 6 नवंबर 2025 को और दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। मतगणना की प्रक्रिया 14 नवंबर 2025 को पूरी होगी और उसी दिन नतीजे घोषित किए जाएंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयोग ने इस बार कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं, ताकि मतदाता सूची से लेकर मतदान प्रक्रिया तक हर स्तर पर पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।
🗓️ चुनाव की रूपरेखा और प्रमुख तिथियाँ
बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। प्रत्येक चरण के लिए अधिसूचना, नामांकन और मतदान की तारीखें तय कर दी गई हैं।
| चरण | अधिसूचना जारी | नामांकन की अंतिम तिथि | नामांकन पत्रों की जांच | नाम वापस लेने की तिथि | मतदान तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| पहला चरण | 10 अक्टूबर | 17 अक्टूबर | 18 अक्टूबर | 20 अक्टूबर | 6 नवंबर |
| दूसरा चरण | 13 अक्टूबर | 20 अक्टूबर | 21 अक्टूबर | 23 अक्टूबर | 11 नवंबर |
मतगणना और परिणाम: 14 नवंबर 2025
आयोग के अनुसार, पहले चरण में उत्तर बिहार और मध्य क्षेत्र के जिले शामिल होंगे, जबकि दूसरे चरण में दक्षिण और सीमांचल इलाके की विधानसभा सीटों पर मतदान होगा।
🗳️ बिहार विधानसभा चुनाव 2025: प्रमुख आंकड़े
🔹 कुल सीटें और आरक्षण स्थिति
- बिहार विधानसभा की कुल सीटें — 243
- सामान्य (GEN): 203 सीटें
- अनुसूचित जाति (SC): 38 सीटें
- अनुसूचित जनजाति (ST): 02 सीटें
🔹 मतदाता संख्या और जनसांख्यिकी
-
कुल मतदाता: 7.42 करोड़
- पुरुष मतदाता: 3.92 करोड़
- महिला मतदाता: 3.50 करोड़
- ट्रांसजेंडर मतदाता: 1,725
- दिव्यांग मतदाता: 7.2 लाख
- 85 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाता: 4.04 लाख
- 100 वर्ष पूरे कर चुके मतदाता: 14,000
- पहली बार वोट देने वाले मतदाता: 14 लाख से अधिक
🔹 युवा मतदाता
इस चुनाव में लगभग 1.63 करोड़ युवा (20-29 वर्ष आयु वर्ग) मतदाता शामिल होंगे। आयोग का अनुमान है कि युवा वर्ग की भागीदारी इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
📋 विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि बिहार में लगभग 22 वर्षों के बाद पहली बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया गया है।
यह प्रक्रिया जून 2025 से शुरू हुई थी और 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।
2020 की तुलना में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या में 5,44,697 की वृद्धि दर्ज की गई है। हालाँकि, सूची शुद्धिकरण के दौरान करीब 47 लाख फर्जी या दोहराए गए नाम हटाए गए हैं।
ज्ञानेश कुमार ने कहा —
“राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स के सहयोग से यह बड़ा सुधार कार्य किया गया। अब हर मतदान केंद्र पर मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी का नाम सूची में छूट गया हो तो नामांकन की प्रक्रिया के 10 दिन पहले तक उसका नाम जुड़वाया जा सकता है।
🏫 मतदान केंद्रों की व्यवस्था और नई पहलें
चुनाव आयोग ने इस बार मतदान केंद्रों पर सुविधा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है।
- कुल पोलिंग स्टेशन: 90,712
- ग्रामीण बूथ: 76,801
- शहरी बूथ: 13,911
- प्रति बूथ औसत मतदाता: 818
- महिला द्वारा संचालित बूथ: 1,044
- युवा द्वारा प्रबंधित बूथ: 38
- मॉडल बूथ: 1,350
नई व्यवस्थाएँ:
- प्रत्येक बूथ पर मोबाइल फोन रखने के लिए विशेष काउंटर बनाया जाएगा। वोट डालने से पहले मतदाता अपना फोन वहाँ जमा कर सकेंगे।
- दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा अनिवार्य की गई है।
- प्रत्येक बूथ पर सेक्शन-वार पहचान पत्र सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है।
- सभी मतदान कर्मियों को डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि इस बार मतदाता पहचान पत्र (EPIC) जारी होने की अधिकतम अवधि 15 दिन रखी गई है, ताकि नए मतदाता समय पर अपने दस्तावेज़ प्राप्त कर सकें।
🏛️ राजनीतिक माहौल और प्रमुख प्रतिक्रियाएँ
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही बिहार की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ एनडीए (NDA), विपक्षी महागठबंधन (RJD-Congress-Left) और अन्य क्षेत्रीय दल अपने-अपने स्तर पर रणनीतियाँ बना रहे हैं।
🔹 एनडीए की तैयारी
राज्य सरकार के मंत्री नितिन नबीन ने कहा कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे पर बातचीत जारी है।
“हमारा लक्ष्य 200 से अधिक सीटें जीतने का है। NDA एकजुट है और जनता विकास पर वोट देगी।”
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा —
“जनता ने मन बना लिया है कि डबल इंजन की सरकार को फिर मौका देगी। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने जिस ‘नए बिहार’ का सपना दिखाया है, उसे आगे बढ़ाने का यह चुनाव निर्णायक साबित होगा।”
🔹 विपक्ष का रुख
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने चुनाव आयोग की घोषणा पर टिप्पणी करते हुए कहा —
“चुनाव की घोषणा बहुत पहले होनी चाहिए थी। बिहार के लोग अब मुद्दों पर वोट देंगे — अपराध, शिक्षा, रोजगार और पेपर लीक के सवाल पर।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी कहा कि
“महागठबंधन पूरी तरह तैयार है। बस हमारी अपेक्षा यही है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों, ताकि गरीब और वंचित वर्ग अपना वोट निश्चिंत होकर डाल सके।”
🔹 नए चेहरे और संभावनाएँ
लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर के चुनाव लड़ने की चर्चा भी इस बार राजनीतिक गलियारों में गर्म है। पिछले दिनों उन्होंने भाजपा नेताओं विनोद तावड़े और नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में उतर सकती हैं।
📊 निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता पर फोकस
ज्ञानेश कुमार ने SIR को लेकर उठे सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए हर राजनीतिक दल को अवसर दिया गया था।
“दावा-आपत्ति प्रक्रिया के दौरान सभी पार्टियों को अपने बूथ लेवल एजेंट्स के माध्यम से भागीदारी का मौका मिला। अब भी यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा हो या किसी अयोग्य का नाम रह गया हो, तो संबंधित अधिकारी को आवेदन देकर सुधार कराया जा सकता है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदान केंद्र पर पारदर्शिता के लिए ‘मॉक पोल’ अनिवार्य रूप से एजेंट्स की मौजूदगी में होगा और मतदान समाप्ति के बाद फॉर्म 17C प्रत्येक पोलिंग एजेंट को उपलब्ध कराया जाएगा।
🌐 अन्य राज्यों में भी SIR की मांग
बिहार में सफल SIR प्रक्रिया के बाद अब अन्य राज्यों में भी मतदाता सूची शुद्धिकरण की मांग उठ रही है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र में SIR लागू करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बिहार में 40 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद अब महाराष्ट्र में भी ऐसा कदम जरूरी है।
🚆 विकास के एजेंडे पर भी फोकस
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के दिन ही पटना मेट्रो के उद्घाटन को लेकर जेडीयू नेताओं ने सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखने की रणनीति बनाई। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा —
“नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। पटना मेट्रो इसका प्रमाण है। यह ट्रैफिक की समस्या को काफी हद तक कम करेगा और बिहार के शहरीकरण को नई दिशा देगा।”
📅 ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
बिहार में विधानसभा चुनाव परंपरागत रूप से सितंबर-अक्टूबर के बीच घोषित होते रहे हैं।
- 2010 में पहले चरण की अधिसूचना 27 सितंबर को जारी हुई थी और अंतिम चरण का मतदान 20 नवंबर को हुआ था।
- 2015 में चुनाव 16 सितंबर को घोषित हुए थे, जबकि अंतिम चरण का मतदान 5 नवंबर को हुआ।
- 2020 में पहले चरण की अधिसूचना 1 अक्टूबर को और मतदान 7 नवंबर तक संपन्न हुआ था।
2025 में आयोग ने त्योहारों के बाद दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय प्रवासी मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया है।
🔚 निष्कर्ष
बिहार में इस बार का चुनाव कई दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
एक ओर जहां मतदाता सूची का ऐतिहासिक पुनरीक्षण हुआ है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच सीट बंटवारे से लेकर नए चेहरों की संभावनाओं तक, हर पहलू पर जनता की नजर टिकी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के शब्दों में —
“लोकतंत्र का यह पर्व निष्पक्षता, पारदर्शिता और सहभागिता के साथ मनाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक को वोट डालने का अवसर मिले और बिहार देश के लिए चुनावी सुधारों का उदाहरण बने।”

