बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन साल से डॉक्टर नहीं होने पर युवाओं ने धरना और चक्काजाम किया। चार डॉक्टरों की पदस्थापना के पत्र के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
बम्हौरी अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से हाहाकार: 3 साल बाद 4 डॉक्टरों की पदस्थापना, युवाओं का जोरदार आंदोलन
लोकेशन: बम्हौरी |
रिपोर्टर: बम्हौरी संवाददाता
बम्हौरी अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने की समस्या को लेकर शनिवार को युवाओं का आक्रोश आखिरकार सड़क पर दिखाई दिया। करीब तीन साल से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही थी। क्षेत्र के 84 गांवों के ग्रामीणों को सामान्य उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी सिलवानी, गैरतगंज सहित अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा था।
लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर युवाओं ने शनिवार को बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आंदोलन कर रहे युवाओं की मांग थी कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचें और डॉक्टरों की पदस्थापना को लेकर लिखित आदेश जारी करें।
84 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित
बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के करीब 84 गांवों के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। इसके बावजूद यहां करीब तीन वर्षों से डॉक्टरों की नियमित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए भी उन्हें दूसरे शहरों और कस्बों में जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की परेशानी बढ़ रही थी। खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह समस्या और गंभीर बनी हुई थी।
युवाओं ने इसी मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोला और मांग की कि बम्हौरी में नियमित चिकित्सकीय सेवाएं सुनिश्चित की जाएं।
सीएमएचओ को मौके पर बुलाने की मांग
धरना दे रहे युवाओं ने मांग रखी कि सीएमएचओ को बम्हौरी बुलाया जाए और डॉक्टरों की पदस्थापना को लेकर लिखित आश्वासन दिया जाए। युवाओं का कहना था कि मौखिक आश्वासन पहले भी मिलते रहे हैं, लेकिन अब उन्हें लिखित आदेश चाहिए।
शाम तक जब मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन कर रहे युवाओं ने बम्हौरी-बरेली मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर आंदोलन शुरू होने से आवागमन प्रभावित हुआ और प्रशासन को मौके पर पहुंचना पड़ा।
एसडीएम अलका सिंह और तहसीलदार महेंद्र सिंह राजपूत पहुंचे
चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद एसडीएम सिलवानी अलका सिंह और तहसीलदार महेंद्र सिंह राजपूत मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे युवाओं से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया।
अधिकारियों ने युवाओं से आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन युवा लिखित आदेश मिलने तक अपनी मांग पर अड़े रहे। युवाओं का स्पष्ट कहना था कि जब तक डॉक्टरों की पदस्थापना का लिखित आदेश नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
चार डॉक्टरों की पदस्थापना का पत्र जारी
युवाओं के आंदोलन के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए चार डॉक्टरों की पदस्थापना का पत्र जारी किया गया।
जारी पत्र के अनुसार चारों डॉक्टर बम्हौरी में दो-दो दिवस सेवाएं देंगे। डॉक्टरों की पदस्थापना से क्षेत्र के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
लिखित पत्र मिलने के बाद आंदोलन कर रहे युवाओं ने धरना समाप्त कर दिया। इसके साथ ही बम्हौरी-बरेली मार्ग पर किया गया चक्काजाम भी समाप्त कर दिया गया और आवागमन सामान्य हुआ।
युवाओं ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन समाप्त करते समय युवाओं ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की पदस्थापना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नियमित रूप से अपनी सेवाएं दें, ताकि 84 गांवों के ग्रामीणों को वास्तविक राहत मिल सके।
युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि पदस्थापना के बावजूद डॉक्टर नियमित रूप से अस्पताल में सेवाएं नहीं देते हैं तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब आदेश के पालन पर नजर
करीब तीन साल से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे बम्हौरी क्षेत्र में चार डॉक्टरों की पदस्थापना का आदेश सामने आने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जारी आदेश के अनुसार डॉक्टर नियमित रूप से बम्हौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं देते हैं या नहीं।
क्षेत्र के ग्रामीणों की नजर अब स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति पर रहेगी।
निष्कर्ष: बम्हौरी में तीन साल से चली आ रही डॉक्टरों की कमी को लेकर युवाओं के आंदोलन के बाद चार डॉक्टरों की पदस्थापना का पत्र जारी होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि डॉक्टर नियमित रूप से सेवाएं देंगे और 84 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार आएगा।

