अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर उज्जैन की एकता झंवर ने योग के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। जानिए अष्टांग योग, प्राणायाम, ध्यान, समाधि और स्वस्थ जीवन में योग की भूमिका।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: योग का अद्भुत विज्ञान, स्वस्थ जीवन का शक्तिशाली मंत्र
एकता झंवर, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
उज्जैन। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर योग के महत्व को लेकर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उज्जैन की साहित्यकार एवं योग प्रेमी एकता झंवर ने योग के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व को अपनी भावपूर्ण रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उनकी यह रचना न केवल योग के शारीरिक लाभों को दर्शाती है, बल्कि मन, आत्मा और समाज को जोड़ने वाले योग के वास्तविक स्वरूप को भी सामने लाती है।
योग का वास्तविक अर्थ
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संदेश देता है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया है। संस्कृत में योग का अर्थ जोड़ना होता है। यह मनुष्य को स्वयं से, समाज से और परमात्मा से जोड़ता है।एकता झंवर अपनी रचना में लिखती हैं—
“योग में दो अर्थ समाएं,
योग वह भी जो विच्छेदन को दूर भगाएं,
मिलकर रहे, जुड़ कर रहे, प्रेम से, व्यवहार से,
साथ ही होते हैं उत्सव सीखें ग्रंथों के सार से।”
यह संदेश वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है, जब समाज में आपसी सौहार्द और सकारात्मकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 और योग की जीवन शैली
योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है। यह जीवन जीने की एक कला है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखता है।रचना में कहा गया है—
“एक योग जीवन शैली को सहज बनाएं,
शरीर ही नहीं मन को भी सरल कर जाए,
योग से जुड़े हर व्यक्ति को दुनिया भगवान की बनाई सुंदर प्रकृति की तरह नजर आए।”
योग व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। इससे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
अष्टांग योग का महत्व
महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
अष्टांग योग के आठ अंग
- यम
- नियम
- आसन
- प्राणायाम
- प्रत्याहार
- धारणा
- ध्यान
- समाधि
एकता झंवर अपनी रचना में लिखती हैं—
“अष्टांग योग आठ प्रकार
यम नियम आसन प्राणायाम और प्रत्याहार,
आगे धारणा ध्यान समाधि
सबकी ही हर लेती व्याधि।”
इन आठ चरणों के माध्यम से व्यक्ति आत्मिक और मानसिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।
सप्त चक्र और कुंडलिनी जागरण
योग विज्ञान में शरीर के सात प्रमुख चक्रों का वर्णन मिलता है।
सात प्रमुख चक्र
- मूलाधार चक्र
- स्वाधिष्ठान चक्र
- मणिपुर चक्र
- अनाहत चक्र
- विशुद्धि चक्र
- आज्ञा चक्र
- सहस्रार चक्र
रचना के अनुसार—
“सर्वप्रथम सप्त चक्र का है विधान,
जिनका हमारे शरीर में है अलग-अलग स्थान।”
योग साधना और ओम् के उच्चारण के माध्यम से इन चक्रों को सक्रिय करने की परंपरा भारतीय योग विज्ञान में वर्णित है।
प्राणायाम का वैज्ञानिक पक्ष
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर विशेषज्ञ भी प्राणायाम को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर बल दे रहे हैं।एकता झंवर लिखती हैं—
“हमारे शरीर में होते हैं पांच प्रमुख प्राण,
प्राणायाम देता है प्राणों को आयाम।”
प्राणायाम के लाभ:
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
- रक्त संचार बेहतर होता है
- तनाव कम होता है
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
- मानसिक एकाग्रता बढ़ती है
सूक्ष्म व्यायाम और आसनों की उपयोगिता
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग शारीरिक गतिविधियों से दूर हो चुके हैं। ऐसे में सूक्ष्म व्यायाम और योगासन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।रचना में उल्लेख है—
“शरीर के हर अंग के लिए होता है सूक्ष्म व्यायाम,
लचीला बनाता, स्फूर्ति जगाता,
आज के मशीनी युग में यही हर अंग को स्वस्थ बनाता।”
स्वाध्याय और नियम का महत्व
योग का एक महत्वपूर्ण अंग है “नियम”। इसमें स्वाध्याय का विशेष स्थान है।
स्वाध्याय क्या है?
स्वयं का अध्ययन करना और आत्मविश्लेषण करना ही स्वाध्याय कहलाता है।रचना में कहा गया है—
“स्वयं का अध्ययन ही स्वाध्याय कहलाता है,
जितना चिंतन करते हैं उतना ही चित्त प्रसन्न होता जाता है।”
धारणा, ध्यान और समाधि
योग के अंतिम तीन चरण व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।
धारणा
मन को एक लक्ष्य पर केंद्रित करना।
ध्यान
लगातार एकाग्रता बनाए रखना।
समाधि
योग की सर्वोच्च अवस्था।एकता झंवर लिखती हैं—
“ध्यान जीवन में एकाग्रता लाता है,
मानसिक रोगों को हर ले जाता है,
समाधि योग की चरम अवस्था,
जो इंद्रियों पर विजय पाता है वही समाधिस्थ कहलाता है।”
एकता झंवर का विशेष संदेश
उज्जैन की एकता झंवर ने अपनी रचना के माध्यम से समाज को योग अपनाने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं बल्कि आत्मिक शांति, सामाजिक समरसता और सकारात्मक जीवन का आधार है।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया है।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह याद दिलाता है कि योग भारत की प्राचीन परंपरा ही नहीं बल्कि आधुनिक जीवन की आवश्यकता भी है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। एकता झंवर की यह प्रेरणादायक रचना योग के इसी व्यापक स्वरूप को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती है।
