Bhopal एम्स में मरीजों को अब AI देगा रास्ता, देश का पहला अस्पताल बनकर रोजाना 10‑12 हजार लोगों को फायदा
Bhopal : एम्स Bhopal ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश का पहला AI आधारित नेविगेशन सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। यह तकनीक अब अस्पताल में इलाज, जांच और परामर्श के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सही रास्ता दिखाएगी, जिससे उनकी परेशानी कम होगी और समय की भी बचत होगी। एम्स भोपाल अब एक स्मार्ट अस्पताल बनने की दिशा में बढ़ रहा है, जहां तकनीकी नवाचार के जरिए मरीजों को उच्च गुणवत्ता की सेवा दी जाएगी।
AI तकनीक से मरीजों को मिलेगा सही रास्ता
एम्स Bhopal के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन के अनुसार, अस्पताल में एआई आधारित एक स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस सिस्टम के जरिए मरीजों को QR कोड स्कैन करने पर दिशा-निर्देश मिलेंगे, जिससे वे आसानी से अपने आवश्यक विभाग तक पहुंच सकेंगे। यह सुविधा गूगल मैप्स की तरह काम करेगी, जो मरीजों को चरणबद्ध मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
QR कोड को स्कैन करते ही मरीज को यह जानकारी मिल जाएगी कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरोसर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है। इससे मरीज और उनके परिवार के सदस्य किसी भी विभाग में जाने के लिए रास्ता पूछने के लिए परेशान नहीं होंगे, जिससे उनका समय बचेगा और मानसिक तनाव भी कम होगा।
समस्या और समाधान
एम्स भोपाल का परिसर काफी विशाल है और अस्पताल भवनों की आंतरिक बनावट लगभग एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक होने के बावजूद रास्ते मिलते-जुलते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कत होती है। पहली बार अस्पताल आने पर मरीजों को ओपीडी, वार्ड, पैथोलॉजी या एमआरआई ढूंढ़ने में बहुत समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ से पूछने की स्थिति बनती है, जिससे समय के साथ तनाव भी बढ़ता है।
इस समस्या का समाधान एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम द्वारा किया जाएगा। इस स्मार्ट तकनीक के जरिए मरीज आसानी से किसी भी विभाग तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बचेंगे। एम्स के प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि मरीजों को अस्पताल में सबसे कम समय में सही स्थान पर पहुंचाया जाए।
AI आधारित नेविगेशन सिस्टम की आवश्यकता
एम्स भोपाल की आंतरिक संरचना और भवनों के डिजाइन के कारण मरीजों को हमेशा सही रास्ता ढूंढ़ने में परेशानी होती रही है। अब AI आधारित नेविगेशन सिस्टम का उपयोग करके इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। इसके तहत हर एक भवन के प्रवेश द्वार पर QR कोड लगाए गए हैं। इन QR कोड्स को स्कैन करके मरीजों को अस्पताल के विभिन्न विभागों के बारे में जानकारी मिल जाएगी।
यह सिस्टम पहले से मौजूद गूगल मैप्स की तरह कार्य करेगा, जो हर एक दिशा को चरणबद्ध तरीके से बताएगा। अस्पताल में आते ही मरीज अपने आप को पहले से तय रास्तों पर पाएंगे, जिससे उनका यात्रा का अनुभव सुखद होगा। यह तकनीक मरीजों के लिए एक बड़े बदलाव का कारण बनेगी।
IIT इंदौर और स्टार्टअप के साथ सहयोग
एम्स भोपाल ने इस AI सिस्टम को लागू करने के लिए आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम और एक स्थानीय स्टार्टअप के साथ मिलकर कार्य शुरू किया है। अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करके इस सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया है। इससे न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों के अनुभव में भी काफी सुधार होगा।
स्थानीय स्टार्टअप और आईआईटी इंदौर की टीम इस प्रणाली को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस सहयोग से अस्पताल में तकनीकी विकास और मरीजों की सुविधा दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह पहल एम्स भोपाल को आधुनिक तकनीकी की दिशा में अग्रणी बना सकती है, जिससे अन्य अस्पताल भी इस तरह की तकनीकी पहल को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
आगे की योजना
यह प्रणाली पहले चरण में अस्पताल के कुछ चुनिंदा विभागों में लागू की जाएगी। बाद में इसे पूरे परिसर में विस्तारित किया जाएगा, ताकि सभी मरीजों को इसकी सुविधा मिले। एम्स भोपाल ने इसे एक रणनीतिक योजना के रूप में तैयार किया है, जिसमें हर एक विभाग को डिजिटल तकनीकी सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
प्रारंभ में यह नेविगेशन सिस्टम सिर्फ भवन के भीतर की दिशा-निर्देश के लिए ही होगा, लेकिन भविष्य में इसे और अधिक स्मार्ट बनाने की योजना है। इसमें मेडिकल उपकरणों और सेवाओं के बारे में जानकारी भी जोड़ी जा सकती है, जिससे मरीजों को न केवल सही दिशा मिलेगी, बल्कि अन्य उपयोगी जानकारी भी प्राप्त होगी।
नतीजा: एक स्मार्ट और कुशल अस्पताल
एम्स भोपाल का यह कदम एक स्मार्ट अस्पताल की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां तकनीकी नवाचार मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने में सहायक होगा। अब मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुंचने के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस सुविधा के बाद अस्पताल में आने वाले 10,000 से ज्यादा लोग हर दिन इस AI नेविगेशन प्रणाली से लाभान्वित होंगे, और उन्हें कहीं भी जाने में परेशानी नहीं होगी।
यह पहल न केवल मरीजों के लिए फायदेमंद है, बल्कि अस्पताल प्रशासन को भी अपने कार्यों को और अधिक सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने का अवसर मिलेगा।
एम्स भोपाल के इस अभिनव कदम से यह साबित होता है कि अस्पताल अब केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी नेतृत्व का अनुसरण कर रहे हैं। इस कदम से एम्स भोपाल का नाम न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक उन्नत और स्मार्ट स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में उभर सकता है।
