आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी महाराज के 85वें जन्मोत्सव पर जावरा में विशेष आत्म-ध्यान शिविर आयोजित हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक आत्म-साधना कर उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगल कामना की।
आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी महाराज के 85वें जन्मोत्सव पर जावरा में भव्य आत्म-ध्यान शिविर
जावरा (निप्र)। आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी महाराज के 85वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में जावरा नगर में विशेष आत्म-ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। जैन श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट, प्रख्यात ध्यानयोगी एवं दार्शनिक संत डॉ. शिव मुनि जी महाराज के जन्मोत्सव पर आयोजित शिविर में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आत्म-साधना की।
यह आयोजन श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस आत्म-ध्यान योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंटू कर्नावट के देशव्यापी आह्वान के तहत संपन्न हुआ।
देशभर में आयोजित हो रहे आत्म-ध्यान शिविर
आत्म-ध्यान योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संदीप रांका एवं कार्यकारिणी सदस्य शेखर नाहर ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे भारतवर्ष में आयोजित हो रहे ध्यान शिविरों की श्रृंखला में जावरा में भी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आत्म-साधना की।
उच्च शिक्षित और ध्यानयोग के प्रणेता हैं आचार्य श्री
श्री रांका एवं श्री नाहर ने आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी महाराज के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पूज्य आचार्य सम्राट का जन्म 18 सितंबर 1942 को मलोट (पंजाब) में हुआ था।
वे उच्च शैक्षणिक योग्यता के धनी हैं। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र व अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘भारतीय धर्मों में मुक्ति की अवधारणा’ विषय पर शोध कर पी-एच.डी. एवं डी.लिट की उपाधियां अर्जित कीं।
1300 से अधिक साधु-साध्वियों का कुशल नेतृत्व
आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी महाराज ने 17 मई 1972 को राष्ट्र संत श्री ज्ञान मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की थी। दीक्षा के बाद से ही वे निरंतर भारतीय संस्कृति, अहिंसा और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में रत हैं।
वर्तमान में उनके कुशल नेतृत्व व मंगलमय निश्रा में 1300 से अधिक साधु-साध्वी पूरे भारतवर्ष में धर्म की प्रभावना और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
अपने उच्च दार्शनिक ज्ञान, गहन आत्म-ध्यान साधना और सरल जीवन शैली के कारण आचार्य श्री संपूर्ण जैन समाज में अत्यंत आदरणीय एवं पूजनीय हैं। शिविर में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने ध्यान प्रयोगों के माध्यम से आचार्य श्री के दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की मंगल कामना की।
