कुक्षी में आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मदिवस ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया,
पतंजलि योग परिवार ने हर घर आयुर्वेद, हर घर औषधि का लिया संकल्प
कुक्षी (रिपोर्ट: नरेंद्र सिरवी)। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं आयुर्वेद के विद्वान परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मदिवस कुक्षी में श्रद्धा और उत्साह के साथ ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान औषधीय एवं फलदार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
यह आयोजन योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन में पतंजलि योग परिवार की ओर से किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भाग लिया।
भैरव नगर गार्डन में हुआ आयोजन
कुक्षी के भैरव नगर स्थित गार्डन परिसर में सुबह 7 बजे नियमित योग कक्षा के बाद विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। योग साधकों ने योगाभ्यास के बाद पौधरोपण अभियान में भाग लिया और विभिन्न औषधीय पौधे लगाए।
इस अवसर पर तुलसी, नीम, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा, आंवला और आम सहित कई उपयोगी पौधों का रोपण किया गया। उपस्थित लोगों ने “हर घर आयुर्वेद, हर घर औषधि” के संकल्प को दोहराते हुए अपने घरों और आसपास अधिक से अधिक औषधीय पौधे लगाने का आह्वान किया।
आचार्य बालकृष्ण जी के योगदान पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण जी के जीवन, कार्यों और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
लुणकरण गुप्ता ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण जी ने देश की विलुप्त होती जा रही कई महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके प्रयासों से आयुर्वेद को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि आचार्य जी का जीवन प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और स्वस्थ जीवन शैली के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।
औषधीय पौधों के महत्व पर दिया संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण बेहद आवश्यक है।
डॉ. घनश्याम मिणा ने औषधीय पौधों के स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरों में लगाए जाने वाले कई पौधे सामान्य बीमारियों में उपयोगी साबित हो सकते हैं और आयुर्वेदिक परंपरा में इनका विशेष महत्व है।
डॉ. बालकृष्ण मालवीया ने आम नागरिकों को अपने घरों के आंगन और आसपास औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण को बताया राष्ट्र सेवा
डॉ. निर्मल कुमार पाटीदार ने कहा कि प्रकृति संरक्षण ही सच्ची राष्ट्र सेवा है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते बल्कि मानव जीवन के स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए भी आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पौधरोपण और उनकी देखभाल को प्राथमिकता देनी चाहिए।
योग साधकों ने लिया स्वस्थ भारत निर्माण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने आचार्य बालकृष्ण जी के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की। साथ ही उनके बताए मार्ग पर चलते हुए स्वस्थ भारत निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
योग साधकों ने कहा कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रह सकता है और समाज को भी बेहतर दिशा दे सकता है।
बड़ी संख्या में योग साधक रहे उपस्थित
इस अवसर पर पतंजलि योग परिवार के वरिष्ठ योग साधक नाथूलाल तैल्या, लुणकरण गुप्ता, डॉ. घनश्याम मिणा, लक्ष्मीनारायण गुप्ता, डॉ. निर्मल कुमार पाटीदार, एडवोकेट हरीश रेवड़िया, डॉ. बालकृष्ण मालवीया, मोहनलाल सोनी, नरेंद्र जैन, महेंद्र पटेल, गोपाल भावसार, प्रविण पाटीदार, हिरालाल राठौड़ पटवारी, ओंकारलाल पाटीदार, महेश राठौड़, श्रीमती मंजुला गुप्ता, श्रीमती सीमा मिणा और ओमप्रकाश पाटीदार सहित बड़ी संख्या में योग साधक एवं नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण संरक्षण, आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प दोहराया।
