श्राद्ध पक्ष के अवसर पर श्री मार्तंड फाउंडेशन ने पितरों की स्मृति, उनके संस्कार और आशीर्वाद को समर्पित भावपूर्ण संदेश प्रस्तुत किया। पूनम रमेश गांधी ने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
श्राद्ध पक्ष: पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मृति और कृतज्ञता का भाव
श्री मार्तंड फाउंडेशन ने पूर्वजों के आशीर्वाद और उनकी स्मृतियों को समर्पित किया भावपूर्ण संदेश
राजस्थान। श्राद्ध पक्ष भारतीय संस्कृति में अपने पूर्वजों और पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इसी भाव को व्यक्त करते हुए श्री मार्तंड फाउंडेशन की ओर से 27 सितंबर 2026 को पितरों की स्मृति में भावपूर्ण संदेश प्रस्तुत किया गया। संदेश में उन अपनों को याद किया गया, जो आज हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी सीख, संस्कार और आशीर्वाद आज भी परिवार के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पूनम रमेश गांधी ने अपने भावों को व्यक्त करते हुए कहा कि समय अपनों को हमसे दूर कर सकता है, लेकिन उनकी स्मृतियां कभी दूर नहीं होतीं। जिन हाथों ने जीवन की कठिन परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन किया और जिनके आशीर्वाद ने आगे बढ़ने की शक्ति दी, उनका स्नेह जीवनभर महसूस होता रहता है।
उन्होंने श्राद्ध पक्ष में किए जाने वाले पिंडदान, तर्पण और श्रद्धा अर्पण को केवल परंपरा या धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति बताया। व्यक्ति के संस्कार, जीवन मूल्य और पारिवारिक परंपराओं में पूर्वजों की सीख सदैव जीवित रहती है।
श्री मार्तंड फाउंडेशन के संदेश में पितृगण से परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की गई। साथ ही यह भाव व्यक्त किया गया कि पूर्वज केवल बीते हुए कल का हिस्सा नहीं होते, बल्कि उनकी दी हुई सीख और संस्कार वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करते हैं।
श्राद्ध पक्ष हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और पूर्वजों के योगदान को स्मरण करने का अवसर देता है। यही स्मरण उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और कृतज्ञता का प्रतीक है।
