इंदौर-मनमाड़ रेलवे परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने धार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने उचित मूल्यांकन, पूरी जानकारी और नियमानुसार मुआवजे की मांग की।
इंदौर-मनमाड़ रेलवे परियोजना: मुआवजे को लेकर किसानों ने उठाए सवाल, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने की उचित मूल्यांकन और पूरी जानकारी देने की मांग, कम मुआवजा मिलने की आशंका पर आंदोलन की चेतावनी
धामनोद। कौशिक पण्डित। इंदौर-मनमाड़ नई रेलवे परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर धार जिले के किसानों ने मुआवजा निर्धारण और अधिग्रहण प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने इस संबंध में धार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किसानों को भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन और प्रस्तावित मुआवजे की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि परियोजना के लिए किसानों की कृषि भूमि का सर्वे, सीमांकन और नाप-जोख किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों को अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण से संबंधित पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है।
कृषि भूमि ही किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के धरमपुरी तहसील अध्यक्ष महादेव पटेल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि कृषि भूमि किसानों के जीवनयापन और आय का प्रमुख साधन है। भूमि अधिग्रहित होने से किसानों की आजीविका एवं भविष्य प्रभावित होगा। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों और भूमि के वास्तविक मूल्य को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार उचित मुआवजा एवं सभी वैधानिक लाभ दिए जाने चाहिए।
गांवों का क्लस्टर बनाकर मुआवजा तय करने की मांग
महासंघ ने मांग की कि धरमपुरी तहसील के सुन्द्रेल, पटलावद, बिखरौन, पडरान्या, श्यामपुरखेड़ी, लुन्हेराबुर्द और नागझिरी सहित जिन गांवों की भूमि परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है, उनके स्थान और आसपास हुए विकास को मुआवजा निर्धारण में ध्यान में रखा जाए।
संगठन का दावा है कि ये गांव राष्ट्रीय राजमार्ग, धामनोद शहर और जेतापुर औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन गांवों का क्लस्टर बनाकर धामनोद शहर की उच्च गाइडलाइन को आधार मानते हुए मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए।
जमीन की मौजूदा कीमत को लेकर दिया उदाहरण
ज्ञापन में ग्राम पडरान्या की एक भूमि का उदाहरण देते हुए महासंघ ने दावा किया कि सर्वे क्रमांक 65/5, रकबा 0.050 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2019 में रजिस्ट्री क्रमांक MP11122019A1819620, दिनांक 5 दिसंबर 2019 के माध्यम से 4.95 लाख रुपये में खरीदी गई थी।
महासंघ ने दावा किया कि उक्त भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य करीब एक करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। संगठन ने मांग की कि जमीन की कीमतों में समय के साथ हुई वृद्धि और क्षेत्र के विकास को भी मुआवजा निर्धारण के दौरान ध्यान में रखा जाए। इस मूल्य संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि समाचार में उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं की गई है।
अधिग्रहण से पहले लिखित जानकारी देने की मांग
किसान संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से पहले प्रभावित किसानों को पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन के आधार, मुआवजा राशि और मिलने वाले अन्य वैधानिक लाभों की जानकारी लिखित रूप में दी जाए।
महासंघ ने कहा कि यदि किसानों को पूरी जानकारी दिए बिना उनकी भूमि कम मुआवजे पर अधिग्रहित करने का प्रयास किया गया तो संगठन आंदोलन करेगा।
रिपोर्ट — कौशिक पण्डित, धामनोद/मनावर, जिला धार
