मुनिश्री सुधासागर जी ने लगभग छह हजार शिविरार्थियों के मस्तक पर लगाया गंधोदक, दलाल बाग में उमड़े श्रद्धालु
राजेश जैन दद्दू
इंदौर। श्रावक संस्कार शिविर एवं पर्वराज दशलक्षण महापर्व के अवसर पर दलाल बाग स्थित विद्या सुधा देशना मंडप में श्रद्धा का भावुक दृश्य देखने को मिला। मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने भगवान की शांतिधारा का गंधोदक अपने हाथों से लगभग छह हजार शिविरार्थी श्रावकों के मस्तक पर लगाया और उन्हें आशीर्वाद दिया। विशाल पंडाल में पंक्तिबद्ध बैठे श्रद्धालुओं के बीच मुनिश्री के आगमन पर जयकारे गूंज उठे।
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रावक संस्कार शिविर में भाग लेने वाले श्रद्धालु इस अवसर की पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं। उनके अनुसार, जब मुनिश्री शिविरार्थियों के बीच पहुंचे और एक-एक कर उनके मस्तक पर गंधोदक लगाने लगे, तो कई श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पंडाल में बड़ी संख्या में मौजूद श्रावक इस क्षण को अपनी साधना और पर्व की स्मृति के रूप में देख रहे थे।
दद्दू ने कहा कि लगभग छह हजार लोगों तक पहुंचकर उन्हें अपने हाथों से गंधोदक लगाना मुनिश्री के स्नेह और पुरुषार्थ का परिचय था। उन्होंने बताया कि यह क्रम घंटों तक चला। शिविरार्थी अपनी बारी आने पर श्रद्धापूर्वक मुनिश्री के समक्ष पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त किया। उपस्थित समाजजनों के लिए आयोजन का यह क्षण विशेष रहा, क्योंकि इतने बड़े शिविर में प्रत्येक सहभागी को व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद मिला।
श्रावक संस्कार शिविर दशलक्षण महापर्व के दौरान आयोजित किया गया है। इस अवसर पर इंदौर के साथ मालवा-निमाड़ क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दलाल बाग पहुंचे। विद्या सुधा देशना मंडप और उससे जुड़े विशाल पंडाल में शिविरार्थियों की उपस्थिति के बीच धार्मिक वातावरण बना रहा। दद्दू के अनुसार, मुनिश्री के आने से पहले सभी श्रद्धालु पंक्तिबद्ध बैठकर प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके पहुंचते ही जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन और उपस्थित समाजजनों ने मुनिश्री की साधना तथा श्रद्धालुओं के प्रति उनके वात्सल्य की सराहना की। उन्होंने भावविभोर होकर कहा, “इतनी शक्ति कहाँ से आती है? यह रहस्य तो स्वयं महाश्रमण जगतपूज्य ही जानें। जहाँ परोपकार ही जीवन का लक्ष्य हो, वहाँ शरीर की सीमाएँ भी मानो छोटी पड़ जाती हैं।” समाजजनों ने कहा कि लंबे समय तक लगातार शिविरार्थियों को आशीर्वाद देते देखना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा।
जैन परंपरा में भगवान के अभिषेक और शांतिधारा में प्रयुक्त जल को गंधोदक कहा जाता है। श्रद्धालु इसे पवित्र मानते हैं और सम्मान के साथ मस्तक पर धारण करते हैं। आयोजन में मुनिश्री ने इसी गंधोदक को शिविरार्थियों के मस्तक पर लगाया। शिविर में शामिल श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक विधि नहीं, बल्कि गुरु के हाथों से आशीर्वाद पाने का अवसर भी था। दद्दू ने बताया कि इसी भावना के कारण शिविरार्थी इस पल की प्रतीक्षा करते हैं।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना की। चक्रवर्ती नवीन गोधा ने मुनिश्री की तपस्या को नमन करते हुए कहा, “नमन है जगतपूज्य गुरुदेव आपको और आपकी तपस्या को।” धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों ने भी श्रावक संस्कार शिविर के इस अवसर को लंबे समय तक याद रहने वाला क्षण बताया।
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि दशलक्षण महापर्व के बीच मुनिश्री से मिला यह आशीर्वाद शिविरार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार, दलाल बाग में एकत्र हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। लगभग छह हजार मस्तकों पर मुनिश्री के हाथों गंधोदक लगाए जाने का दृश्य उपस्थित लोगों के लिए आस्था, गुरु वात्सल्य और सामूहिक साधना का स्मरणीय अनुभव बन गया।
