उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर
पर्युषण पर्व के आठवें दिन विद्या सुधा देशना मंडप में उमड़ा जनसैलाब, मुनिश्री ने श्रावकों को प्रदान किया गंधोदक
दैनिक स्वराज वाणी
राजेश जैन दद्दू, इंदौर
इंदौर। दशलक्षण पर्वराज पर्युषण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर विद्या सुधा देशना मंडप में आयोजित धर्मसभा को परम पूज्य तीर्थ चक्रवर्ती मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने त्याग धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि वस्तुओं को छोड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रति मोह, ममता और आसक्ति का त्याग करना आवश्यक है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रावक संस्कार शिविर के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मुनिश्री ने कहा कि संयोग संबंध को छोड़ने के लिए इच्छाओं का त्याग आवश्यक है, जबकि अंतरंग संबंध को तोड़ने के लिए तप, साधना, भेद-विज्ञान और पूर्ण त्याग की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोना भट्टी में तपकर शुद्ध होता है, उसी प्रकार तपस्या से कर्मों की निर्जरा होती है। तप के बाद भी त्याग आवश्यक है, क्योंकि तप से अधिक कठिन त्याग है।
मुनिश्री ने गृहस्थों को प्रेरणा देते हुए कहा कि जो वस्तु उपकारी हो, उसका पहले दान करें और उसके बाद स्वयं उपयोग करें। साधु-संतों ने जिन उपकारी वस्तुओं का त्याग किया है, उनके लिए आहार और औषधि आदि का दान करना चाहिए। जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों की सहायता करना ही सच्चे दान और त्याग का स्वरूप है।
उन्होंने संदेश दिया, “जो हेय है उसका त्याग करो, जो उपकारी है उसका दान करो और दान के बाद ही उसका भोग करो—यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।”
धर्मसभा में मुनिश्री ने अपने कर कमलों से श्रावकों को गंधोदक प्रदान कर आशीर्वाद दिया। चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा ने मुनिश्री को गंधोदक देकर श्रद्धा और विनय प्रकट की।
इस अवसर पर सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, मनीष गोधा, सपना गोधा, आलोक, आकाश कोल, अशोक डोशी, हर्ष जैन, संजय पाटोदी, हुकुमचंद जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, कमल जैन चैलेंजर, ब्रह्मचारी प्रदीप, पारस भैया, विजय धुर्रा, राहुल सेठी और भूपेंद्र भोपाली सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
