डोल ग्यारस पर विमानों में विराजकर नगर भ्रमण पर निकले भगवान
पड़ाना के विभिन्न मंदिरों से निकले विमान सदर बाजार में हुए एकत्र; झिरी आश्रम के सामने पूजा-अर्चना और जल विहार के बाद लौटे मंदिर
पड़ाना। डोल ग्यारस, जिसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है, का पर्व मंगलवार को पड़ाना नगर और आसपास के गांवों में मनाया गया। इस अवसर पर नगर के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल को विमानों में विराजित कर चल समारोह निकाला गया। भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों के साथ निकले विमानों ने नगर भ्रमण किया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना की, आरती उतारी और प्रसाद चढ़ाया।
पड़ाना के अलावा मऊ, गुलावता, रामपुरिया, मगराना, आसारेटा और पंवार सहित अंचल के गांवों में भी डोल ग्यारस का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। पड़ाना में शाम होते ही अलग-अलग मंदिरों से भगवान के विमान निकलने शुरू हुए। नगर की परंपरा के अनुसार सबसे पहले गांधी चौक बस स्टैंड स्थित शासकीय श्रीराम मंदिर नर्मदेश्वर महादेव से शाम करीब 5 बजे भगवान को विमान में विराजित कर नगर भ्रमण के लिए निकाला गया। इसके साथ ही चल समारोह की शुरुआत हुई।
सदर बाजार में एकत्र हुए विभिन्न मंदिरों के विमान
पहला विमान निकलने के बाद पटेल मोहल्ला स्थित श्रीराम मंदिर, गुजराती दर्जी समाज के राधा-कृष्ण श्रीराम मंदिर, वर्मा समाज श्रीराम मंदिर, बैरागी समाज श्रीराम मंदिर, तलेन रोड स्थित मंदिर और माली मोहल्ला श्रीराम मंदिर से भी विमान निकाले गए। हाट बाजार स्थित राधा-कृष्ण श्रीराम मंदिर का विमान भी चल समारोह में शामिल हुआ।
अलग-अलग स्थानों से निकले ये विमान सदर बाजार के बड़े गणपति श्रीराम मंदिर पर एकत्र हुए। वहां से सभी विमानों के साथ सामूहिक चल समारोह आगे बढ़ा। विभिन्न मंदिरों के भगवान को एक साथ नगर भ्रमण पर देखकर श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस वार्षिक धार्मिक परंपरा में मंदिरों के पुजारियों के साथ समाजजन और अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए।
रास्ते में श्रद्धालुओं ने उतारी आरती
नगर भ्रमण के दौरान रास्ते में लोगों ने विमानों में विराजित भगवान की जगह-जगह पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने प्रसाद अर्पित किया और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर चल समारोह का स्वागत भी किया गया। भजन-कीर्तन तथा ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ श्रद्धालु विमानों के साथ चलते रहे।
सदर बाजार से निकला सामूहिक चल समारोह गांधी चौक बस स्टैंड और पीपली चौराहा होते हुए झिरी आश्रम की ओर बढ़ा। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन का अवसर मिला। जिन स्थानों से विमान गुजरे, वहां स्थानीय लोग आरती और पूजा के लिए एकत्र हुए।
झिरी आश्रम के सामने हुआ जल विहार
चल समारोह शाम करीब 7 बजे झिरी आश्रम मंदिर के सामने पहुंचा। यहां सभी विमानों को उतारा गया। विमानों में विराजित भगवान की पुजारियों ने पूजा और आरती की। इस दौरान पुजारियों ने एक-दूसरे के विमानों में विराजित भगवान की भी आराधना की। इसके बाद डोल ग्यारस की परंपरा के अनुसार भगवान का जल विहार कराया गया।
झिरी आश्रम के सामने पूजा-अर्चना और जल विहार संपन्न होने के बाद देर शाम सभी विमान अपने-अपने मंदिरों के लिए लौटे। मंदिर पहुंचने पर भगवान की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस तरह शाम 5 बजे शुरू हुआ नगर भ्रमण मंदिरों में आरती के साथ संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं को वितरित किए फल
चल समारोह के दौरान समाजसेवी श्रद्धालु मनोहर पुष्पद ने विमानों के साथ आए लोगों और अन्य श्रद्धालुओं को फल प्रसाद वितरित किया। नगर के विभिन्न मंदिरों के पुजारियों, समाजजनों और श्रद्धालुओं ने पूरे कार्यक्रम में सहभागिता की।
डोल ग्यारस के इस आयोजन में अलग-अलग मंदिरों से निकले विमानों का एक स्थान पर एकत्र होना, सामूहिक नगर भ्रमण और झिरी आश्रम के सामने जल विहार प्रमुख कार्यक्रम रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल के दर्शन कर पर्व मनाया।
