धार जिले के बेगंदा गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान JCB से तीन मकान तोड़े गए। परिवार के दो सदस्यों ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। परिवार ने जमीन के अधिकार पत्र होने का दावा किया है।
धार में अतिक्रमण कार्रवाई के बीच दो लोगों ने खाया जहरीला पदार्थ, JCB से तीन मकान ध्वस्त
परिवार का दावा- जमीन के अधिकार पत्र थे मौजूद; एक दिन पहले नोटिस देने का आरोप, घटना का वीडियो आया सामने
धार। जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के बेगंदा गांव में अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान गंभीर घटनाक्रम सामने आया है। प्रशासनिक अमले ने जेसीबी की मदद से तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया। इसी दौरान प्रभावित परिवार के दो सदस्यों ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की। घटना का वीडियो भी सामने आया है।
जहरीला पदार्थ सेवन करने वालों की पहचान गोपाल और रेखा बाई के रूप में बताई गई है। दोनों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार दोनों का उपचार जारी है।
परिवार का दावा- पंचायत ने दिए थे जमीन के अधिकार पत्र
प्रभावित परिवार का कहना है कि जिस जमीन पर मकान बनाए गए थे, उसके अधिकार पत्र उन्हें कई साल पहले पंचायत की ओर से दिए गए थे। परिवार का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने मकानों का निर्माण किया था। इसके बावजूद प्रशासन ने निर्माण को अतिक्रमण मानते हुए जेसीबी से तीन मकान ध्वस्त कर दिए।
परिजनों ने कार्रवाई की समय-सीमा पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 20 सितंबर की शाम नोटिस दिया गया और अगले ही दिन सुबह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। बारिश के बीच मकान टूटने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है।
प्रशासनिक अमले के सामने जहरीला पदार्थ सेवन करने का दावा
कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब परिवार के गोपाल और रेखा बाई ने कथित तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।
गर्भवती महिला और बच्चे को वज्र वाहन में बैठाने का आरोप
मामले में ग्रामीणों की ओर से एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान नौ माह की गर्भवती महिला और करीब आठ महीने के बच्चे को पुलिस के वज्र वाहन में बैठाया गया। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अधिकार पत्र और कार्रवाई के आधार पर उठे सवाल
बेगंदा गांव की इस कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभावित परिवार जमीन के कथित अधिकार पत्र, नोटिस दिए जाने और अगले ही दिन की गई कार्रवाई के कानूनी एवं प्रशासनिक आधार को लेकर जवाब मांग रहा है।
एक ओर जेसीबी से मकान ध्वस्त किए गए और दूसरी ओर कार्रवाई के दौरान दो लोगों द्वारा जहरीला पदार्थ सेवन करने की घटना सामने आई। अब प्रशासन का पक्ष और संबंधित जमीन के दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कार्रवाई किन अभिलेखों और आदेशों के आधार पर की गई थी।
नोट: मामले में प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।



