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मैं कैसा हूं, उससे पहले जानो मेरा देव, गुरु और धर्म कैसा है : मुनिपुंगव सुधासागर जी

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Published On: 20 September 2026
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इंदौर में श्रावक संस्कार शिविर के पांचवें दिन मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए देव, गुरु और धर्म के वास्तविक स्वरूप को जानने का संदेश दिया।

*मैं कैसा हूं, उससे पहले जानो – मेरा देव, गुरु और धर्म कैसा है : मुनिपुंगव सुधासागर जी*
राजेश जैन दद्दू
*इंदौर।* श्रावक संस्कार शिविर के पांचवें दिन विद्या सुधा मंडप में उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा – *सत्य केवल बोलना नहीं, वस्तु के यथार्थ स्वरूप को जानना भी सत्य धर्म है।*
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आज की देशना में गुरु देव ने सत्य धर्म की विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने बारे में निर्णय लेने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसका देव कैसा है, गुरु कैसा है और धर्म का स्वरूप क्या है। संसार में हर कोई अपने भगवान को सच्चा मानता है, पर केवल मान लेना पर्याप्त नहीं, पहले जानना जरूरी है।
*सत्य व्रत और सत्य धर्म में अंतर -*
महाराज जी ने कहा कि सत्य व्रत व्यवहार में झूठ न बोलना और अहिंसा की रक्षा है, जबकि सत्य धर्म वस्तु के यथार्थ स्वरूप को जानना है। “मैं झूठ नहीं बोलूंगा” यह संकल्प ही पूरा सत्य नहीं, प्रश्न यह भी होना चाहिए कि “सत्य वास्तव में है क्या?”
वृक्ष का तना, शाखा, पत्ते, फूल दिखाई देते हैं, पर किसी एक को पूरा वृक्ष नहीं कहा जा सकता। इसी प्रकार द्रव्य, गुण, पर्याय को समझकर वस्तु के वास्तविक स्वभाव को पहचानना ही सत्य धर्म है।
*भगवान को मानने से पहले जानो -*
जैन दर्शन अंधविश्वास से भगवान मानने को नहीं कहता। सच्चा देव वही है जो *अठारह दोषों से रहित, राग-द्वेष रहित वीतराग* हो। भगवान की पहचान नाम-आकृति से नहीं, गुणों से होती है। “जियो तो उसी दरवाजे, मरो तो उसी दरवाजे” का भाव रखो।
*सच्चा गुरु कौन? -*
व्यक्ति स्वयं पूर्ण न हो तो भी उसका मार्गदर्शक सच्चा होना चाहिए। सच्चा गुरु वही जो स्वयं ज्ञान, ध्यान, तप, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चले और मोक्षमार्ग दिखाए। गुरु का मूल्य भीड़ या प्रसिद्धि से नहीं, त्याग और तप से आंका जाता है। गुरु की दिशा गलत तो शिष्य का मार्ग भी भटकेगा।
*किसी को सुधारना है तो दोष नहीं, दिशा देखो -*
किसी को बार-बार उसके पाप-दोष गिनाने से सुधार नहीं होता, वह धर्म से दूर होता है। उससे पूछो – “तुम्हारा भगवान कैसा है? तुम्हारा गुरु कैसा है?” वर्तमान पर्याय चाहे जैसी हो, यदि आदर्श सच्चा है तो परिवर्तन संभव है।
*महाराज जी के 5 प्रमुख संदेश -*
1. पहले भगवान को जानो, फिर मानो।
2. सत्य केवल बोलना नहीं, यथार्थ को जानना है।
3. सच्चे गुरु की पहचान ज्ञान-तप-संयम से करो।
4. किसी के दोष गिनाकर उसे मत तोड़ो, दिशा देखो।
5. सम्यक दर्शन की नींव सच्चे देव, शास्त्र, गुरु की पहचान है।
धर्मसभा में चक्रवर्ती सपना मनीष गोधा अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन डॉ जैनेन्द्र जैन हुकमकाका संजय पाटोदी श्रुत जैन भुपेंद्र जैन विजय धुर्रा अक्षय कासलीवाल राहुल स्पोर्ट्स सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे

*प्रेषक – राजेश जैन दद्दू, मीडिया प्रभारी*

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