दिगम्बर जैन मंदिर थाटीपुर में मार्दव धर्म पर भजन प्रतियोगिता आयोजित
भक्तिमय प्रस्तुतियों से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, माधुरी संजय जैन ने प्राप्त किया प्रथम पुरस्कार
ग्वालियर। दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर दिगम्बर जैन मंदिर थाटीपुर में भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में समाज के प्रतिभागियों ने धर्म, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश देने वाले भजनों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। भजनों की मधुर धुन और आध्यात्मिक भावों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया तथा उपस्थित धर्मावलंबी भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम का आयोजन प्रबंध समिति दिगम्बर जैन मंदिर थाटीपुर द्वारा किया गया। इसमें जैन मिलन युगल शाखा आदि-पार्श्व ने विशेष सहयोग प्रदान किया। प्रतियोगिता के माध्यम से श्रद्धालुओं को दशलक्षण महापर्व में वर्णित उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाया गया। कार्यक्रम में जैन समाज के महिला-पुरुषों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए भक्तिमय भजन
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि भजन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक धार्मिक प्रस्तुतियां दीं। भजनों के माध्यम से भगवान जिनेन्द्र की भक्ति, आत्मकल्याण, अहंकार के त्याग और विनम्रता के भाव को प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगियों की मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रतिभागियों ने मार्दव धर्म के संदेश को सरल और प्रभावशाली ढंग से भजनों में पिरोया। धर्मावलंबियों ने तालियों के साथ सभी प्रस्तुतियों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक दशलक्षण धर्म की शिक्षाएं पहुंचाना था।
माधुरी संजय जैन को मिला प्रथम पुरस्कार
प्रतियोगिता के परिणाम में श्रीमती माधुरी संजय जैन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। श्री अजय ममता जैन को द्वितीय और श्रीमती चेष्टा कपिल जैन को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। श्रीमती कुसुमलता सिंघई को उनकी विशेष प्रस्तुति के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों का आयोजन समिति और उपस्थित समाजजनों ने तालियों के साथ अभिनंदन किया। आयोजकों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रत्येक प्रस्तुति में भक्ति और धर्म के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई दिया। इस तरह की प्रतियोगिताएं प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ धार्मिक संस्कारों को मजबूत करती हैं।
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका वीर अभिषेक जैन और दिगम्बर जैन मंदिर थाटीपुर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष धर्मचंद जैन ने निभाई। दोनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति, भक्ति भाव, स्वर, लय और विषय की प्रासंगिकता के आधार पर विजेताओं का चयन किया।
वर्षा नितिन जैन ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती वर्षा नितिन जैन ने किया। उन्होंने भजन प्रतियोगिता की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हुए प्रतिभागियों का परिचय कराया। साथ ही दशलक्षण महापर्व और मार्दव धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक जयकारे लगाए और भजनों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
इस अवसर पर शलज टडैया, रज्जन कुमार जैन, पीयूष सिंघई, संजय जैन, उर्मिला जैन, निक्की टडैया, रविन्द्र सिंघई, किशोर भारिल्ल, रोली जैन और साकेत जैन सहित बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित रहे। सभी ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यक्रम की सराहना की।
जैन मिलन युगल शाखा आदि-पार्श्व के अध्यक्ष अतिवीर विमल-कमलेश जैन तथा कोषाध्यक्ष वीर मनोज-श्वेता जैन सहित शाखा के अनेक सदस्यों ने आयोजन में सक्रिय सहभागिता की। शाखा सदस्यों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
अहंकार के त्याग का संदेश देता है मार्दव धर्म
आयोजन में वक्ताओं ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म मनुष्य को अहंकार और अभिमान छोड़कर विनम्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। ज्ञान, धन, पद, प्रतिष्ठा, जाति और शक्ति का अहंकार आत्मकल्याण के मार्ग में बाधा बनता है। मार्दव धर्म व्यक्ति को सरल, सहज और विनम्र बनने का संदेश देता है।
वक्ताओं ने कहा कि सच्ची धार्मिकता केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। धर्म का वास्तविक उद्देश्य अपने आचरण और विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। जब व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार को समाप्त करता है, तभी उसके जीवन में विनम्रता और मधुरता का विकास होता है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने दशलक्षण महापर्व के दौरान बताए गए सिद्धांतों को जीवन में अपनाने तथा मार्दव धर्म के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया। प्रतियोगिता भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
