Mandleshwar में उत्तम आर्जव धर्म की आराधना, मायाचारी छोड़ने का दिया संदेश
दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्री अनंतनाथ भगवान के समवशरण में हुए विशेष धार्मिक अनुष्ठान
Mandleshwar। परम पूज्य आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी के मार्गदर्शन में वर्षायोग 2026 के अंतर्गत श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जी मंडलेश्वर में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर श्री अनंतनाथ भगवान जी के समवशरण में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।
अभिषेक और शांतिधारा में श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातः मंगलाष्टक के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पुण्यार्जन किया। प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य ज्ञायक अश्विन जैन को प्राप्त हुआ, जबकि द्वितीय शांतिधारा का लाभ निलय प्रदीप जैन (बर्तन) ने लिया।
धार्मिक अनुष्ठान में द्रव्य सामग्री पुण्यार्जन का लाभ अंतिम जैन एवं अविनाश जैन को प्राप्त हुआ। वहीं दशलक्षण महामंडल विधान में श्रीफल चढ़ाने का सौभाग्य श्रीमती सुधाबाई जिनेन्द्र जैन को मिला।
मन, वचन और काय की सरलता है आर्जव धर्म
उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए आर्यिका माताजी ने श्रद्धालुओं को जीवन में सरलता और निष्कपटता अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मन, वचन और काय की सरलता ही आर्जव धर्म है। मनुष्य को छल, कपट और कुटिलता जैसी प्रवृत्तियों का त्याग करते हुए अपने विचार, वाणी और आचरण में एकरूपता रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक जीवन का उद्देश्य केवल बाहरी आडंबर या दिखावे तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने अंतर्मन की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। कथनी और करनी में अंतर न हो तथा व्यवहार में सरलता और सच्चाई बनी रहे, यही आर्जव धर्म की भावना है।
रात्रि में आरती और भक्ति कार्यक्रम
रात्रि में आरती एवं भक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से सरलता, निष्कपटता और आत्मशुद्धि को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
प्रवचन के दौरान धर्म के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में उतारने तथा मन में किसी प्रकार के छल-कपट को स्थान नहीं देने की प्रेरणा दी गई। श्रद्धालुओं ने धार्मिक वातावरण में प्रवचन का श्रवण कर धर्माराधना की।
प्रतिदिन हो रहे धार्मिक आयोजन
दशलक्षण महापर्व के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें अभिषेक, शांतिधारा, महामंडल विधान, पूजन, प्रवचन, पाठशाला, प्रतिक्रमण, सामायिक, गुरु भक्ति, आरती एवं भक्ति कार्यक्रम शामिल हैं।
महापर्व के चलते मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की धार्मिक गतिविधियां जारी हैं। समाज के पदाधिकारी एवं विभिन्न समितियों के सदस्य कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। आयोजन के माध्यम से समाज के लोगों को दशलक्षण धर्म के विभिन्न गुणों को समझने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।
उक्त जानकारी समाज अध्यक्ष रक्षित जैन ने दी।
स्वराज वाणी संवाददाता | जिला ब्यूरो चीफ, मंडलेश्वर
