स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय नागदा में हिंदी पखवाड़ा एवं एनएसएस अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
संवाददाता: जीवनलाल जैन
मुख्य वक्ता श्यामलाल चौधरी ने विद्यार्थियों से मातृभाषा में हस्ताक्षर करने का किया आह्वान, एनएसएस के ध्येय वाक्य ‘मैं नहीं, आप’ का समझाया अर्थ
नागदा। स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय नागदा में 18 सितंबर 2026 को हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विशेष व्याख्यान एवं राष्ट्रीय सेवा योजना अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व से परिचित कराने के साथ उनमें मातृभाषा के प्रति सम्मान, सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भगतसिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जावरा, जिला रतलाम के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक श्यामलाल चौधरी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल, रोचक और प्रभावशाली शैली में हिंदी भाषा एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य वक्ता श्यामलाल चौधरी का पुष्पहार से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। हिंदी पखवाड़े और एनएसएस अभिमुखीकरण को एक साथ आयोजित कर विद्यार्थियों को भाषा, संस्कृति तथा समाजसेवा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना भी है।
हिंदी को दैनिक व्यवहार में अपनाने का संदेश
स्वागत वक्तव्य देते हुए सचिन तिवारी ने विद्यार्थियों से हिंदी को केवल अध्ययन, परीक्षा और औपचारिक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग दैनिक जीवन, व्यवहार और संवाद में किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भाषा का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसका प्रयोग सामान्य बोलचाल, लेखन और कामकाज में किया जाए। अपनी भाषा के प्रति सम्मान रखना सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
सचिन तिवारी ने विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य पढ़ने, लेखन का अभ्यास करने और अपने विचारों को सरल एवं प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित किया।
मातृभाषा के प्रति गौरव रखें: डॉ. प्रसाद
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार प्रसाद ने विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा का सम्मान करने और उसके प्रति गौरव की भावना रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ती है।
डॉ. प्रसाद ने कहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ अपनी मातृभाषा की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। विद्यार्थियों को हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनएसएस विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ समाज के वास्तविक जीवन और समस्याओं को समझने का अवसर प्रदान करती है। इसके माध्यम से युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
मातृभाषा में करें हस्ताक्षर: श्यामलाल चौधरी
मुख्य वक्ता श्यामलाल चौधरी ने अपने प्रभावशाली और रोचक उद्बोधन से विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान केवल भाषणों और आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह हमारे दैनिक व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने हस्ताक्षर मातृभाषा में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी भाषा में हस्ताक्षर करता है तो यह उसके भाषाई स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है।
श्यामलाल चौधरी ने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति आत्मीयता का भाव विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी में ज्ञान, साहित्य और अभिव्यक्ति की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को आधुनिक तकनीक और संचार माध्यमों में भी हिंदी का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
‘मैं नहीं, आप’ का समझाया महत्व
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और समाजसेवा में उसकी भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने एनएसएस के ध्येय वाक्य ‘मैं नहीं, आप’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह वाक्य व्यक्ति को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और जरूरतमंदों की सेवा करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि एनएसएस का स्वयंसेवक समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होता है और समाधान में अपनी भूमिका निभाता है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सद्भाव जैसे क्षेत्रों में एनएसएस स्वयंसेवक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम को सहभागितापूर्ण बनाते हुए श्यामलाल चौधरी ने विद्यार्थियों को एनएसएस क्लैप सिखाई। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को एनएसएस गीत ‘नौजवान आओ रे…’ भी सिखाया। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया।
सेवा और अनुशासन से होता है व्यक्तित्व विकास
डॉ. ओ.पी. परमार ने हिंदी भाषा के महत्व तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से विद्यार्थियों में विकसित होने वाले मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एनएसएस सेवा, अनुशासन, नेतृत्व, सहयोग और सामाजिक दायित्व की भावना विकसित करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से महाविद्यालयीन जीवन में एनएसएस की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाजसेवा के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलता है और उनका व्यक्तित्व अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार बनता है।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. मिति शर्मा ने किया। राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी कविता कौर चौहान ने मुख्य अतिथि, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
