पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन जैन समाज ने की विशेष पूजा-अर्चना, उमड़ी भक्तों की भीड़
पर्यूषण पर्व पर जैन समाज ने किया पंचामृत अभिषेक, उत्तम मार्दव की हुई पूजन, चढ़ाए महाअर्घ्य।
मार्दव धर्म हमें झुकना, विनम्र और घमंड रहित होना सिखाता है — आचार्य श्री चैत्य सागरजी
पर्युषण के दूसरे दिन भक्तिमय माहौल में हुई आराधना
Gwalior में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन गुरुवार को पूरे शहर के जैन समाज में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। आत्म साधना पावन वर्षायोग एवं सकल जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के इस दूसरे दिन सुबह दाना ओली स्थित दिगंबर बीस पंथी चंपाबाग जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा के साथ विशेष उत्तम मार्दव की पूजन अर्चना संपन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और पूरे मनोयोग से इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। इसी दौरान आचार्य श्री चैत्य सागर एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के मंगल प्रवचन भी आयोजित हुए, जिन्हें सुनने के लिए भक्तजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

विधि-विधान से संपन्न हुआ पंचामृत अभिषेक
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ आनंद प्रकाश शास्त्री के कुशल मार्गदर्शन में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान जैन समाज के श्रद्धालुओं ने कलशों में जल, चंदन, औषधिका, घी, दही और पुष्प आदि भरकर श्रीजी का अभिषेक किया, जिसके साथ पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। वहीं आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज द्वारा बताए गए मुख्य बिंदु से शांतिधार करने का विशेष सौभाग्य विकास गंगवाल और संजीव अजमेरा को प्राप्त हुआ, जिसमें जैन समाज के अन्य सदस्यों ने भी सहभागिता निभाई। अनुष्ठान के समापन पर श्रीजी की दीपकों से भव्य आरती उतारी गई।

उत्तम मार्दव की हुई पूजन, भक्तों ने चढ़ाए महा अर्घ्य
इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ आनंद प्रकाश शास्त्री ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजन के साथ-साथ पंचमेरु पूजन और दस लक्षण पूजन भी संपन्न कराई। इस धार्मिक आयोजन में महिलाओं, पुरुषों और बालिकाओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और अष्ट द्रव्य से पूजन करते हुए उत्तम मार्दव और दस लक्षण धर्म की गहरी भक्ति भावना के साथ आराधना की। श्रद्धालुओं ने भगवान को महा अर्घ्य समर्पित कर अपनी आस्था प्रकट की। वहीं शाम के समय दिगम्बर जैन महिला परिषद की ओर से एक विशेष धार्मिक तम्बोला कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
“मार्दव धर्म हमें झुकना और घमंड रहित होना सिखाता है” — आचार्य श्री चैत्य सागरजी
धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म में मार्दव धर्म हमें झुकना, विनम्र होना और घमंड रहित जीवन जीना सिखाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जितना अधिक विनम्र होता चला जाता है, वह उतना ही परमात्मा के निकट पहुंचता जाता है, जबकि अहंकार जीवन में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन से अहंकार को त्याग कर विनय भाव धारण करें, क्योंकि विनय के बिना परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि अहंकार पाप, दुख और संताप का कारण बनता है, जबकि मृदुता प्राप्त करने के लिए ही मनुष्य जन्म मिलता है। उन्होंने इस भौतिकवादी संसार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यहां हर व्यक्ति स्वयं को बड़ा और दूसरों को छोटा समझने की भूल करता है, जो जीवन को अधोगति की ओर ले जाता है।
उन्होंने भक्तों से संयमित जीवन जीने की अपील की और बताया कि इसी में सच्चा कल्याण निहित है। इस अवसर पर आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समिति के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल जैन, प्रशांत गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा और संजय गोधा सहित कई गणमान्य लोगों ने अपनी श्रद्धा समर्पित की। जैन समाज के अनुसार आज 18 सितम्बर को उत्तम आर्जव धर्म की पूजन आयोजित की जाएगी।

“अहंकार मनुष्य को कठोर बनाता है, विनम्रता नम्र बनाती है” — मुनिश्री
मुनि श्री अनुमान सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अहंकार और घमंड का पूर्णतः त्याग कर जीवन में विनम्रता, सरलता और कोमलता को अपनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहंकार मनुष्य को कठोर और असंवेदनशील बना देता है, जबकि विनम्रता व्यक्ति को नम्र और सहज बनाती है। उनके अनुसार जो व्यक्ति मन में कोमलता और व्यवहार में नर्मता बनाए रखता है, वही वास्तव में मार्दव धर्म का सच्चा पालन करता है।
भगवान के समक्ष भक्ति नृत्य में झूमे समाजजन
कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय माहौल तब और गहरा हो गया जब जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन के अनुसार समाजजनों ने भजनों की धुन पर भगवान के समक्ष भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। “मेरे वीर प्रभु के द्वार ढोल बाजे रे…”, “छोटे बाबा रे पधारो मोरे अंगना…”, “जब खिड़की खोलूं तो तेरा दर्शन हो जाए” जैसे भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस से सराबोर हो उठा।

