धर्मोत्कर्ष वर्षावास में वर्षितप आराधक पवन नाहर ने पूर्ण की अट्ठाई तप की दीर्घ आराधना
पर्युषण पर्व में बाल, युवा और प्रौढ़ आराधकों ने की उत्कृष्ट तप साधना; श्रीसंघ ने तपस्वियों का किया बहुमान
Thandla । तप प्रधान जैन शासन में पर्युषण पर्व को आध्यात्मिक आराधना की दृष्टि से विशेष महत्व दिया गया है। पर्युषण पर्व का अंतिम दिन संवत्सरी और क्षमापर्व के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर साधक आत्मावलोकन करते हुए मान-अभिमान का त्याग कर क्षमा भाव को धारण करने का संकल्प लेते हैं। धर्मोत्कर्ष वर्षावास के दौरान थांदला में भी पर्युषण पर्व की विशेष धार्मिक आराधना का आयोजन हुआ।
तत्वज्ञश्री धर्मेन्द्रमुनिजी महाराज साहब, रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी महाराज साहब आदि ठाणा-8 तथा विराजित महासती श्री निखिलशीलाजी महाराज साहब आदि ठाणा-4 के पावन सानिध्य में श्रद्धालुओं ने विभिन्न तप और धार्मिक साधनाओं में सहभागिता की। इस दौरान बाल, युवा और प्रौढ़ आयु वर्ग के अनेक आराधकों ने अट्ठाई तप सहित विभिन्न तपस्याएं पूर्ण कीं।
इन तपस्वियों में वर्षितप आराधक पारस कुमठ, भावना शाहजी, आशुका लोढ़ा और पवन नाहर ने भी अट्ठाई तप की दीर्घ एवं कठिन आराधना पूर्ण की।

सात वर्षों से कर रहे वर्षितप
विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े जीवदया प्रेमी पवन नाहर पिछले सात वर्षों से वर्षितप की आराधना कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने वर्षितप के साथ अट्ठाई तप की साधना भी की। उन्होंने बताया कि तत्वज्ञश्री सहित सभी महापुरुषों के आशीर्वाद और अपने शुभ पुण्यों के साथ यह तप पूर्ण करने का अवसर मिला।
पवन नाहर ने बताया कि पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद अध्यक्ष एवं 22 वर्षों से वर्षितप आराधक भरत भंसाली द्वारा नन्दचक्र की दीर्घ तपस्या कर तप में तप जोड़ने के पुरुषार्थ से भी उन्हें प्रेरणा मिली। इसी प्रेरणा और गुरुजनों के आशीर्वाद से उन्होंने अट्ठाई तप की आराधना का संकल्प लिया और उसे पूर्ण किया।
व्होरा परिवार ने लिया सामूहिक तप बहुमान का लाभ
क्षमापर्व के अवसर पर संघ के समाजसेवी संजय, आदित्य और गौतम व्होरा परिवार ने सामूहिक तप बहुमान का लाभ लिया। परिवार की ओर से वर्षितप सहित विभिन्न तपस्याओं के पारणों में सहभागिता की गई। गुरु दर्शन के लिए आने वाले दर्शनार्थियों तथा स्थानीय श्वेतांबर संघ के स्वामीवात्सल्य का लाभ भी परिवार द्वारा लिया गया।
धर्मोत्कर्ष वर्षावास के दौरान संघ में बड़ी संख्या में तप आराधनाएं संपन्न हुईं। आयोजकों के अनुसार संघ में 13 मासक्षमण, पर्युषण पर्व के दौरान 130 से अधिक तेले तप और 46 अट्ठाई तप की आराधनाएं पूर्ण हुईं। इसके अलावा पांच अर्धमासक्षमण, दो सिद्धितप और एक मेरुतप भी पूर्ण हो चुके हैं। वहीं चार सिद्धितप, तीन से अधिक मासक्षमण सहित अन्य दीर्घ तपस्याएं अभी गतिमान हैं।

तपस्वियों का किया बहुमान
पर्युषण पर्व के दौरान तप आराधना पूर्ण करने वाले तपस्वियों का श्रीसंघ, धर्मोत्कर्ष परिवार और विभिन्न लाभार्थी परिवारों एवं संस्थाओं की ओर से बहुमान किया गया। संजय व्होरा परिवार, नरेंद्रकुमार परिवार, मयंक श्रीश्रीमाल परिवार, प्रांजल लोढ़ा परिवार सहित अनेक परिवारों और संस्थाओं ने तपस्वियों के प्रति अनुमोदना व्यक्त की।
श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, सचिव हितेश शाहजी, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी सहित संघ के समस्त पदाधिकारियों ने तपस्वियों की सुखसाता की कामना करते हुए उनके उत्कृष्ट तप की अनुमोदना की। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने संयम, तप, क्षमा और आत्मशुद्धि के भाव को जीवन में उतारने का संदेश दिया।
