—Advertisement—

ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से

Author Picture
Published On: 16 September 2026
FEWEW

—Advertisement—

ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से

मरम्मत की अवधि को लेकर अलग-अलग अनुमान; पाइपलाइन बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव

वर्ल्ड डेस्क। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने नुकसान की गंभीरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तस्वीरों में पाइपलाइन के एक पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े जले हुए हिस्से, काली पड़ी जमीन और ढांचागत क्षति दिखाई दे रही है। हमले के बाद सऊदी अरब ने सुरक्षा कारणों से पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

पाइपलाइन के दोबारा पूरी क्षमता से शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। कुछ उद्योग सूत्रों ने मरम्मत में पांच से छह सप्ताह लगने की आशंका जताई है, जबकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि पाइपलाइन कुछ दिनों में फिर शुरू हो सकती है। आंशिक संचालन पूर्ण मरम्मत से पहले शुरू होने की संभावना भी जताई जा रही है। सऊदी अरब या सरकारी तेल कंपनी अरामको ने मरम्मत की अंतिम समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है।

हमले से पहले और बाद की तस्वीरों में बड़ा अंतर

Copernicus और अन्य वाणिज्यिक उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों में हमले से पहले और बाद की स्थिति का अंतर दिखाई देता है। सात और नौ सितंबर की तस्वीरों में संबंधित पंपिंग स्टेशन तथा आसपास का क्षेत्र सामान्य नजर आ रहा था।

10 सितंबर को ली गई तस्वीर में उसी इलाके से गहरे रंग के धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। उपग्रह आधारित अग्नि निगरानी प्रणाली ने भी क्षेत्र में असामान्य तापीय गतिविधि दर्ज की। 11 और 12 सितंबर की तस्वीरों में धुएं का गुबार दिखाई नहीं दिया, लेकिन पंपिंग स्टेशन के आसपास जमीन का बड़ा हिस्सा काला और जला हुआ नजर आया।

सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से आग और सतही नुकसान की पुष्टि होती है, लेकिन केवल तस्वीरों के आधार पर भूमिगत पाइप, पंप और नियंत्रण व्यवस्था को हुए पूरे नुकसान का आकलन करना संभव नहीं है।

1,200 किलोमीटर लंबी है महत्वपूर्ण पाइपलाइन

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पेट्रोलाइन के नाम से भी जाना जाता है। यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।

इस पाइपलाइन का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि इसके माध्यम से सऊदी अरब अपना कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजारे बिना लाल सागर तक पहुंचा सकता है। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग पर दबाव बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने इस पाइपलाइन के माध्यम से तेल भेजने की मात्रा बढ़ा दी थी।

हमले से पहले पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल कच्चे तेल का परिवहन किए जाने की रिपोर्ट है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग चार से पांच प्रतिशत के बराबर है। पाइपलाइन की अधिकतम क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है।

किसने किया हमला, स्थिति अभी स्पष्ट नहीं

सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। इराकी अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू की और कथित लॉन्च क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रशासनिक कदम भी उठाए। हालांकि किसी संगठन ने सार्वजनिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

अमेरिका ने ईरान समर्थित समूहों की भूमिका को लेकर संदेह जताया है, लेकिन ईरान ने प्रत्यक्ष संलिप्तता से इनकार किया है। हमले के लिए जिम्मेदारी तय करने का प्रश्न अभी विवादित है और स्वतंत्र जांच पूरी होने तक किसी एक देश या संगठन को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

वैश्विक तेल कीमतों में आया उछाल

पाइपलाइन बंद होने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड एक समय 108 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। यूरोपीय बाजार में कुछ वास्तविक तेल कार्गो की कीमतें इससे भी ऊपर जाने की रिपोर्ट सामने आई।

कारोबारियों को आशंका है कि यदि पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो यानबू बंदरगाह पर उपलब्ध तेल भंडार तेजी से कम हो सकता है। इससे यूरोप और एशिया के खरीदारों को मिलने वाली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

कुछ सितंबर कार्गो रद्द या विलंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि आपूर्ति में वास्तविक कमी का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन का आंशिक संचालन कितनी जल्दी शुरू होता है और सऊदी अरब वैकल्पिक मार्गों से कितनी मात्रा भेज पाता है।

वैकल्पिक रास्तों से तेल भेजने की कोशिश

पाइपलाइन में व्यवधान के बाद सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र के रास तनूरा और जुअयमा बंदरगाहों से तेल लोडिंग बढ़ा रहा है। इसके अलावा ओमान के सोहार तट के पास जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरित कर एशियाई खरीदारों को आपूर्ति करने के विकल्प का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल संकट कम कर सकती हैं, लेकिन उनकी क्षमता और लागत सीमित हो सकती है। यानबू बंदरगाह से तेल भेजना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से बचा जा सकता था।

यदि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब—तीनों मार्गों पर एक साथ दबाव बना रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए जोखिम काफी बढ़ सकता है।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो पेट्रोलियम उत्पादों की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

हालांकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की औसत कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, सरकारी कर तथा तेल विपणन कंपनियों का मूल्य निर्धारण शामिल है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि पाइपलाइन का आंशिक या पूर्ण संचालन कितनी जल्दी बहाल होता है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने कुछ दिनों में संचालन शुरू होने की उम्मीद जताई है, लेकिन उद्योग सूत्रों का अनुमान इससे अधिक समय का है। आधिकारिक क्षति आकलन आने तक मरम्मत अवधि और वैश्विक आपूर्ति पर वास्तविक प्रभाव अनिश्चित बना रहेगा।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp