भोपाल फर्जी पासपोर्ट मामले में STF की बड़ी कार्रवाई, दो और संदिग्ध हिरासत में
अन्नानगर से जुड़े मामले में अब तक 70 संदिग्ध पासपोर्ट मिले, संख्या 200 तक पहुंचने की आशंका; विदेशी फंडिंग और पुलिस सत्यापन की भूमिका भी जांच के दायरे में
भोपाल। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए दो और संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में एक कैफे संचालक बताया जा रहा है, जबकि दूसरा इस प्रकरण के मुख्य आरोपी बताए जा रहे रियाल चौधरी के केयरटेकर के रूप में काम कर चुका है। एसटीएफ दोनों से पूछताछ कर कथित नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का प्रयास कर रही है।
मामले में इससे पहले रियाल चौधरी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह मामला केवल कुछ फर्जी पासपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अलग-अलग जिलों तक फैला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। हालांकि हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में एसटीएफ की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पांच जिलों से अब तक 70 संदिग्ध पासपोर्ट मिलने का दावा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसटीएफ की जांच में अभी तक मध्य प्रदेश के पांच जिलों से बने करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट की जानकारी सामने आई है। इनमें से लगभग 40 पासपोर्ट भोपाल के अन्नानगर स्थित बौद्ध मठ से जुड़े पते पर बनाए जाने की बात कही जा रही है।
जांच एजेंसी को आशंका है कि संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर बनवाए गए पासपोर्ट की वास्तविक संख्या 200 तक पहुंच सकती है। अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन पासपोर्ट के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, दस्तावेज कहां तैयार किए गए और आवेदन से लेकर पुलिस सत्यापन तक किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या एक ही पते का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों के पासपोर्ट बनवाने में किया गया। यदि ऐसा हुआ है तो संबंधित मकान, संस्था या परिसर से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
अन्नानगर में करीब डेढ़ वर्ष रहा रियाल चौधरी
अन्नानगर स्थित बौद्ध मठ के आसपास रहने वाले लोगों से एसटीएफ ने पूछताछ की है। स्थानीय लोगों ने जांच टीम को बताया कि मुख्य आरोपी रियाल चौधरी करीब डेढ़ वर्ष से इस इलाके में रह रहा था। उसकी गतिविधियां आसपास के लोगों को संदिग्ध लगती थीं।
बताया जा रहा है कि रियाल अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन पर बातचीत करने में बिताता था और स्थानीय लोगों से ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था। एसटीएफ उसके मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।
कैफे संचालक और केयरटेकर से पूछताछ जारी
एसटीएफ ने जिन दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है, उनमें शामिल कैफे संचालक की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी उससे यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या उसके कैफे या उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल पासपोर्ट आवेदन, दस्तावेज स्कैन करने अथवा ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए किया गया था।
दूसरा संदिग्ध रियाल चौधरी का केयरटेकर बताया गया है। उससे रियाल के रहने, आने-जाने वाले लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। फिलहाल दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की सूचना है। जांच पूरी होने से पहले उनकी कथित भूमिका को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
बच्चों की मदद के नाम पर चंदा जुटाने की जानकारी
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि रियाल चौधरी ने अलग-अलग गतिविधियों और बच्चों की सहायता के नाम पर लोगों से चंदा एकत्र किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चंदे की राशि पांच हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक बताई जा रही है।
एसटीएफ अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह पैसा किन लोगों से लिया गया, इसे किन खातों में जमा कराया गया और बाद में इसका उपयोग कहां किया गया। जांच एजेंसी संबंधित बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी खंगाल सकती है।
विदेशी फंडिंग की आशंका की भी जांच
फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में संभावित विदेशी फंडिंग का पहलू भी एसटीएफ की जांच के दायरे में है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों या उनसे जुड़े लोगों को विदेश से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई थी या नहीं।
यदि विदेशी स्रोतों से धन आने की जानकारी मिलती है तो संबंधित बैंक खातों, लेन-देन और रकम भेजने वालों की पहचान की जाएगी। फिलहाल विदेशी फंडिंग के संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है और जांच जारी है।
पुलिस सत्यापन करने वाले कर्मचारियों से भी होगी पूछताछ
पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इस मामले में दस से अधिक पुलिसकर्मियों द्वारा संबंधित आवेदनों का सत्यापन कर हरी झंडी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। एसटीएफ इन पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
जांच में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि सत्यापन के दौरान आवेदकों के पते, पहचान और दस्तावेजों की जांच किस प्रकार की गई। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सत्यापन प्रक्रिया में केवल लापरवाही हुई या किसी स्तर पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
एसटीएफ की कार्रवाई से संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। संदिग्ध पासपोर्ट धारकों, दस्तावेज तैयार करने वालों, ऑनलाइन आवेदन में सहायता करने वालों और पुलिस सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर जांची जा रही है।
फिलहाल मामले में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने तथा एसटीएफ का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और फर्जी दस्तावेजों पर बनवाए गए पासपोर्ट का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाना था।
