Sagar Liquor Seized: रानीपुरा के जंगल में मिला ₹30 लाख की ब्रांडेड शराब का जखीरा, तस्करी और नकली शराब की आशंका
दैनिक स्वराज वाणी, सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली एवं कथित नकली शराब से हुई मौतों के बाद भी अवैध शराब का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है। बहेरिया थाना क्षेत्र के रानीपुरा जंगल में बड़ी मात्रा में अंग्रेजी ब्रांड के नाम वाली शराब लावारिस हालत में मिली है। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 25 से 30 लाख रुपए बताई जा रही है।
जंगल में शराब का इतना बड़ा जखीरा मिलने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक रूप से आशंका जताई जा रही है कि शराब की अवैध तस्करी की जा रही थी और कार्रवाई के डर से तस्कर खेप को जंगल में छोड़कर फरार हो गए। हालांकि शराब असली है या नामी ब्रांड के नाम पर तैयार की गई नकली सामग्री, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रानीपुरा के जंगल में लावारिस मिली शराब
जानकारी के अनुसार, बहेरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रानीपुरा के जंगल में बड़ी संख्या में शराब की पेटियां और बोतलें मिलीं। सुनसान जंगल में लावारिस रखी गई शराब की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरी खेप को अपने कब्जे में लिया।
बरामद शराब पर विभिन्न अंग्रेजी ब्रांड के लेबल लगे होने की बात सामने आई है। लेकिन केवल बोतल पर ब्रांड का नाम या लेबल मौजूद होने से यह प्रमाणित नहीं होता कि शराब संबंधित अधिकृत कंपनी की ही है। हाल में सागर जिले में नकली रैपर, बोतल और क्यूआर कोड के इस्तेमाल के आरोप सामने आने के कारण जांच एजेंसियां इस बरामदगी को गंभीरता से देख रही हैं।
₹25 से ₹30 लाख बताई जा रही कीमत
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जंगल से बरामद शराब की कीमत लगभग 25 से 30 लाख रुपए हो सकती है। हालांकि शराब की कुल मात्रा, ब्रांड, बोतलों की संख्या और आधिकारिक मूल्यांकन की विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
इतनी बड़ी कीमत की शराब को जंगल में छिपाकर रखने से संगठित तस्करी की आशंका पैदा हो रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि शराब वैध दुकान या गोदाम से निकली थी अथवा इसे किसी अवैध इकाई में तैयार करके ब्रांडेड बोतलों में भरा गया था।
पिकअप वाहन से शराब उतारने की आशंका
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि तस्कर शराब की खेप को किसी पिकअप वाहन में लेकर जंगल तक पहुंचे होंगे। पुलिस अथवा आबकारी विभाग की कार्रवाई की भनक लगने के बाद आरोपियों ने शराब को जंगल में उतार दिया और वहां से भाग निकले।
फिलहाल यह केवल जांच का एक संभावित पहलू है। पुलिस ने आधिकारिक रूप से वाहन और आरोपियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों, टोल नाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों की जानकारी खंगाली जा सकती है।
वाहन का पता चलने पर शराब के स्रोत और उसके संभावित गंतव्य तक पहुंचना आसान हो सकता है। पुलिस संबंधित वाहन मालिक, चालक और खेप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है।
खुली बोतलों से बढ़ा संदेह
जंगल में बरामद सामग्री के बीच कुछ खुली बोतलें मिलने की बात भी सामने आई है। इससे यह सवाल पैदा हुआ है कि क्या बोतलों में भरी शराब की गुणवत्ता या सामग्री की जांच की जा रही थी अथवा ब्रांडेड बोतलों का इस्तेमाल नकली शराब भरने के लिए किया गया।
खुली बोतलों की मौजूदगी अपने आप में नकली शराब का प्रमाण नहीं है। इसकी वास्तविकता जानने के लिए नमूने लेकर प्रयोगशाला में रासायनिक परीक्षण कराना जरूरी होगा। जांच से ही पता चलेगा कि बोतलों में मानक शराब थी, मिलावटी सामग्री थी या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कोई रसायन मौजूद था।
बोतलों के ढक्कन, सील, बैच नंबर, होलोग्राम, रैपर और क्यूआर कोड की भी जांच की जा सकती है। संबंधित शराब निर्माता कंपनी से संपर्क करके बैच और सप्लाई रिकॉर्ड का सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा।
बंडा-शाहगढ़ त्रासदी के बाद बड़ी बरामदगी
यह शराब ऐसे समय बरामद हुई है, जब सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में कथित जहरीली एवं नकली शराब से हुई मौतों का मामला चर्चा में है। इस त्रासदी में मृतकों की संख्या समय के साथ बढ़ी है और अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अलग आंकड़े प्रकाशित हुए हैं। इसलिए मृतकों की अंतिम अधिकृत संख्या जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम बुलेटिन के आधार पर ही मानी जानी चाहिए।
प्रारंभिक रिपोर्टों में मौतों की संख्या कम बताई गई थी, जबकि बाद की खबरों में यह आंकड़ा दो दर्जन या उससे अधिक बताया गया। घटना के बाद प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सर्वे किया और बीमार लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया।
जहरीली शराब प्रकरण में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़े कथित नेटवर्क की भी जांच किए जाने की खबरें सामने आई थीं। शराब की बोतलों पर नकली रैपर और क्यूआर कोड लगाए जाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।
क्या दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है?
रानीपुरा जंगल से मिली शराब और बंडा-शाहगढ़ जहरीली शराब प्रकरण के बीच अभी किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों घटनाएं एक ही जिले से संबंधित होने के कारण आशंका जरूर पैदा हो रही है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इन्हें एक ही नेटवर्क का हिस्सा बताना उचित नहीं होगा।
पुलिस और आबकारी विभाग को बरामद शराब के स्रोत, बैच नंबर, परिवहन मार्ग और संभावित खरीदारों की जांच करनी होगी। यदि किसी आरोपी या सप्लाई चैन का संबंध पहले से जांच के दायरे में मौजूद नेटवर्क से मिलता है, तभी दोनों घटनाओं के बीच संबंध स्थापित हो सकेगा।
शराब की गुणवत्ता की होगी जांच
बरामद शराब के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे जाने की संभावना है। जांच में अल्कोहल की मात्रा, इस्तेमाल किए गए रसायन और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों की मौजूदगी देखी जाएगी।
यदि शराब अधिकृत कंपनी की पाई जाती है तो उसके परिवहन दस्तावेज, परमिट और कर भुगतान की जांच की जाएगी। यदि बोतलों में नकली या मिलावटी शराब मिलती है तो मामला गंभीर आपराधिक साजिश और जनस्वास्थ्य से जुड़े अपराध का रूप ले सकता है।
जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि शराब मध्यप्रदेश में बिक्री के लिए अधिकृत थी या किसी दूसरे राज्य से अवैध रूप से लाई गई थी।
पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल
मामले की जांच में शराब जंगल तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, वाहन रिकॉर्ड और स्थानीय मुखबिर तंत्र की सहायता ली जा सकती है।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में शराब का स्रोत, परिवहन में इस्तेमाल वाहन, इसे प्राप्त करने वाले संभावित व्यक्ति, संबंधित लाइसेंसधारी दुकान या गोदाम और ब्रांडेड बोतलों की प्रामाणिकता शामिल हैं।
यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि शराब जंगल में अस्थायी रूप से छिपाई गई थी या वहां से छोटी मात्रा में अलग-अलग स्थानों पर भेजने की योजना थी।
अवैध शराब कारोबार पर निगरानी की चुनौती
सागर शराब त्रासदी के बाद प्रदेशभर में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जंगल में लाखों रुपए की खेप मिलना तस्करी नेटवर्क की सक्रियता की ओर संकेत करता है।
अवैध शराब का कारोबार केवल आबकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि लोगों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। नकली शराब में मेथनॉल जैसे जहरीले तत्व होने पर कम मात्रा में सेवन भी जानलेवा हो सकता है।
फिलहाल बरामद शराब को जब्त कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शराब असली थी या नकली और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था।
