Ujjain Simhastha 2028: बोहरा समाज ने स्वयं हटाना शुरू किया हुसामी मस्जिद का हिस्सा, सड़क चौड़ीकरण में किया सहयोग
दैनिक स्वराज वाणी, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच सामाजिक समन्वय का उदाहरण सामने आया है। गोपाल मंदिर के सामने छत्री चौक क्षेत्र में स्थित बोहरा समाज की हुसामी मस्जिद का निर्धारित हिस्सा समाज के लोगों ने स्वयं हटाना शुरू कर दिया। समाज के सदस्य अपने हाथों से हथौड़ा चलाकर निर्माण के उस हिस्से को हटाते दिखाई दिए, जो प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आ रहा है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी अचानक लिए गए निर्णय के तहत नहीं की गई है। संबंधित पक्ष को पहले सूचना और नोटिस दिया गया था। इसके बाद प्रशासन तथा बोहरा समाज के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई और आपसी सहमति बनने पर मस्जिद का निर्धारित हिस्सा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
कंठाल से गोपाल मंदिर तक चौड़ी हो रही सड़क
सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में प्रमुख मार्गों के विस्तार और आधारभूत संरचना से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कंठाल से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है।
यह मार्ग पुराने और घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, श्रद्धालुओं और वाहनों का आवागमन रहता है। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान इस इलाके में यातायात का दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन अभी से प्रमुख सड़कों, चौराहों और यातायात मार्गों को व्यवस्थित करने में लगा है।
प्रशासन ने बताया साढ़े आठ फीट हिस्सा दायरे में
नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण की निर्धारित सीमा में हुसामी मस्जिद का करीब आठ से साढ़े आठ फीट हिस्सा आ रहा है। उसी हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। बोहरा समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद आपसी सहमति से काम आगे बढ़ाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सड़क चौड़ीकरण योजना के अंतर्गत की जा रही है।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, आसपास के दुकानदारों के अनुरोध पर काम को कुछ समय के लिए रोका भी गया, ताकि प्रभावित हिस्से और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से संबंधित व्यवस्था बनाई जा सके। आगामी दिनों में निर्धारित कार्रवाई पूरी किए जाने की संभावना बताई गई है।
समाज ने बताया चार से साढ़े चार फीट का हिस्सा
हटाए जाने वाले हिस्से की चौड़ाई को लेकर नगर निगम और बोहरा समाज की ओर से अलग-अलग जानकारी सामने आई है। नगर निगम के अधिकारी इसे करीब आठ से साढ़े आठ फीट बता रहे हैं। वहीं बोहरा समाज के वरिष्ठजनों के अनुसार मस्जिद का लगभग चार से साढ़े चार फीट हिस्सा सड़क चौड़ीकरण में जा रहा है।
इस अंतर का कारण सड़क की निर्धारित लाइन, बाहरी निर्माण, दीवार और वास्तविक धार्मिक परिसर की माप अलग-अलग होना हो सकता है। हालांकि इसकी अंतिम तकनीकी स्थिति नगर निगम की अधिकृत नाप और दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
खबर में दोनों पक्षों के आंकड़ों का उल्लेख जरूरी है, क्योंकि समाज की ओर से बताई गई माप और नगर निगम की ओर से घोषित माप एक जैसी नहीं है।
करीब 200 वर्ष पुरानी बताई जा रही हुसामी मस्जिद
बोहरा समाज के वरिष्ठ सदस्यों के अनुसार, छत्री चौक स्थित हुसामी मस्जिद करीब 200 वर्ष या उससे अधिक पुरानी है। यह मस्जिद समाज की धार्मिक आस्था के साथ उज्जैन के पुराने शहरी इतिहास का भी हिस्सा मानी जाती है।
इतनी पुरानी धार्मिक इमारत के एक हिस्से को हटाने का निर्णय समाज के लिए आसान नहीं रहा होगा। इसके बावजूद समाज के प्रतिनिधियों ने शहर के विकास और सिंहस्थ की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन के साथ सहयोग करने की बात कही है।
मस्जिद की वास्तविक आयु से संबंधित कोई आधिकारिक पुरातात्विक दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे बोहरा समाज के वरिष्ठजनों द्वारा दी गई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सैयदना साहब के निर्देश का किया उल्लेख
समाज के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का काम आपसी सहमति से किया जा रहा है। उनके अनुसार सैयदना साहब का निर्देश है कि शासन-प्रशासन द्वारा शहर के विकास के लिए निर्धारित प्रक्रिया में सहयोग किया जाए।
इसी सहमति के बाद समाज के सदस्यों ने स्वयं मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाने का निर्णय लिया। कार्रवाई के दौरान समाज के लोग स्वयं हथौड़े और दूसरे उपकरणों से निर्माण हटाते नजर आए।
यह घटनाक्रम संवेदनशील धार्मिक मामलों में बातचीत और समन्वय के माध्यम से समाधान निकालने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। प्रशासन के लिए जरूरी है कि कार्रवाई के दौरान धार्मिक गरिमा, सुरक्षा और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाए।
आसपास की दुकानों पर भी होगी कार्रवाई
नगर निगम के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण की सीमा में केवल मस्जिद का हिस्सा ही नहीं, बल्कि सामने स्थित कुछ दुकानें भी आ रही हैं। हुसामी मस्जिद के निर्धारित हिस्से का काम पूरा होने के बाद दुकानों से जुड़े प्रभावित निर्माण भी हटाए जा सकते हैं।
इस प्रक्रिया से प्रभावित व्यापारियों को अपने प्रतिष्ठानों और सामान को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त समय दिए जाने की मांग भी सामने आ सकती है। पुराने बाजार क्षेत्र में किसी निर्माण को हटाने का असर संबंधित दुकानदारों के साथ आसपास की यातायात और व्यापारिक व्यवस्था पर भी पड़ता है।
नगर निगम को कार्रवाई से पहले सीमांकन, नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था जैसे विषयों को स्पष्ट रखना होगा, ताकि विवाद की स्थिति पैदा न हो।
सिंहस्थ से पहले यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होना है। इस दौरान शहर में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आवास जैसी व्यवस्थाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होंगी।
इसी कारण प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। पुराने शहर में कई सड़कें संकरी हैं और सामान्य दिनों में भी यहां जाम की स्थिति बनती है। सिंहस्थ के समय आपातकालीन वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मार्गों का पर्याप्त चौड़ा होना जरूरी माना जा रहा है।
हालांकि विकास कार्यों के दौरान धार्मिक स्थलों, पुरानी इमारतों, मकानों और दुकानों के प्रभावित होने से संवेदनशील परिस्थितियां भी बन सकती हैं। ऐसे में प्रशासन को प्रत्येक मामले में कानूनी प्रक्रिया और प्रभावित पक्षों से संवाद को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
आपसी सहमति से निकला रास्ता
हुसामी मस्जिद के प्रभावित हिस्से को बोहरा समाज द्वारा स्वयं हटाए जाने को प्रशासन और समाज के बीच समन्वय के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। समाज ने अपनी धार्मिक आस्था का सम्मान बनाए रखते हुए शहर के विकास में सहयोग करने की पहल की है।
अब नगर निगम की जिम्मेदारी है कि शेष कार्रवाई सावधानीपूर्वक पूरी कराई जाए। हटाए गए हिस्से की मरम्मत, धार्मिक परिसर की सुरक्षा और आसपास की दुकानों से संबंधित प्रक्रिया भी बातचीत के आधार पर तय की जानी चाहिए।
सिंहस्थ-2028 की तैयारी में चल रहे विकास कार्यों के बीच यह मामला बताता है कि संवेदनशील स्थलों से जुड़े मुद्दों का समाधान बल प्रयोग की जगह पारदर्शी संवाद, उचित नोटिस और आपसी सहमति से किया जा सकता है।
