तूफान में ढहा यात्री प्रतीक्षालय, एक माह बाद भी नहीं हुआ पुनर्निर्माण, धूप-बारिश में परेशान हो रहे ग्रामीण और यात्री
गुलावता तिराहे पर यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों ने प्रशासन से लगाई शीघ्र कार्रवाई की गुहार
संवाददाता : मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना/सारंगपुर (राजगढ़)। सारंगपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मऊ के गुलावता तिराहे पर यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया शासकीय टिनसेट यात्री प्रतीक्षालय पिछले महीने आए तेज आंधी-तूफान में पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। घटना को एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक इसका पुनर्निर्माण या पुनर्स्थापना नहीं की गई है। परिणामस्वरूप प्रतिदिन यहां से गुजरने वाले सैकड़ों यात्रियों को धूप, बारिश और बदलते मौसम के बीच खुले आसमान के नीचे बसों और अन्य वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक यात्री प्रतीक्षालय का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की दैनिक जरूरत से जुड़ा विषय है। महिलाओं, बुजुर्गों, स्कूली विद्यार्थियों, मजदूरों और किसानों को प्रतिदिन भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
आंधी-तूफान में धराशायी हुआ विधायक निधि से बना प्रतीक्षालय
ग्रामीणों के अनुसार गुलावता तिराहे पर यह टिनसेट यात्री प्रतीक्षालय तत्कालीन विधायक कुंवर कोठार के कार्यकाल में विधायक निधि से यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया था। वर्षों तक यह प्रतीक्षालय क्षेत्र के लोगों के लिए राहत का केंद्र बना रहा।
लेकिन पिछले महीने आए तेज आंधी और तूफान में यह टिनसेट पूरी तरह गिर गया। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि संबंधित विभाग जल्द ही इसे हटाकर दोबारा स्थापित करेगा, लेकिन एक महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गिरे हुए ढांचे के कारण यात्रियों को पहले से अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
एकमात्र पीडब्ल्यूडी शेड पर बढ़ा दबाव
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पहले जब इस मार्ग पर यात्रियों की संख्या बढ़ी तो लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा भी एक अलग यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया था।
अब विधायक निधि से बना टिनसेट गिर जाने के बाद पूरे क्षेत्र के यात्रियों का भार केवल पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए गए एकमात्र प्रतीक्षालय पर आ गया है।
सुबह और शाम के समय जब बसें आती हैं, तब दर्जनों यात्री एक साथ वहां पहुंचते हैं। लेकिन सीमित क्षमता होने के कारण सभी लोगों को उसमें जगह नहीं मिल पाती।
ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों को सड़क किनारे धूप, बारिश और तेज हवाओं के बीच खड़े रहकर या खुले में बैठकर वाहन का इंतजार करना पड़ता है।
महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र सबसे अधिक प्रभावित
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतीक्षालय के अभाव का सबसे अधिक असर महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को सुबह जल्दी बस पकड़ने के लिए काफी समय तक सड़क किनारे इंतजार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में भीगना उनकी मजबूरी बन गया है।
इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज, बाजार या अन्य कार्यों के लिए आने वाली महिलाओं और बुजुर्गों को भी पर्याप्त बैठने की सुविधा नहीं मिल रही है।
गर्मी के मौसम में तेज धूप और बरसात के दौरान लगातार बारिश के बीच खुले में खड़े रहना स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा कर रहा है।
कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण है गुलावता तिराहा
ग्रामीणों ने बताया कि गुलावता तिराहा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र है।
यहां से प्रतिदिन गुलावता, तुकोगंज, धामंदा, खुजनेर, भेसवा माताजी सहित आसपास के अनेक गांवों के लोग आवागमन करते हैं।
कृषि कार्य, धार्मिक यात्राएं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
इसी कारण यहां यात्रियों की संख्या हमेशा अधिक रहती है और एक सुदृढ़ प्रतीक्षालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
धार्मिक और कृषि क्षेत्र का प्रमुख मार्ग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मार्ग केवल ग्रामीण परिवहन तक सीमित नहीं है।
इस मार्ग से धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालु, कृषि उपज लेकर मंडियों तक पहुंचने वाले किसान तथा मजदूरी के लिए आने-जाने वाले श्रमिक भी बड़ी संख्या में गुजरते हैं।
ऐसे में यात्रियों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त प्रतीक्षालय का होना अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही नया प्रतीक्षालय नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में बरसात और सर्दी के मौसम में लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ जाएगी
एक महीने बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन अब तक न तो क्षतिग्रस्त ढांचे को हटाया गया और न ही उसके पुनर्निर्माण की दिशा में कोई कार्रवाई शुरू हुई।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम नागरिकों को रोजाना परेशान होना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने मौके का निरीक्षण किया होता तो अब तक यह समस्या काफी हद तक हल हो चुकी होती।
पड़ाना के गांधी चौक स्थित प्रतीक्षालय की भी बदहाल स्थिति
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि समस्या केवल मऊ गांव तक सीमित नहीं है।
ग्राम पंचायत पड़ाना के गांधी चौक स्थित टेंपो स्टैंड पर भी तत्कालीन विधायक के कार्यकाल में बनाया गया टिनसेट यात्री प्रतीक्षालय लंबे समय से जर्जर अवस्था में पड़ा हुआ है।
वर्तमान में यह प्रतीक्षालय उपयोग के बजाय बायपास किनारे खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और पुनर्स्थापना की जाती तो यात्रियों को इसका लाभ मिल सकता था।
ग्रामीणों ने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और यात्रियों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।
उन्होंने मांग की है कि—
- गुलावता तिराहे पर गिरे हुए टिनसेट यात्री प्रतीक्षालय का तत्काल पुनर्निर्माण किया जाए।
- क्षतिग्रस्त ढांचे को हटाकर सुरक्षित स्थान पर नया शेड स्थापित किया जाए।
- पड़ाना के गांधी चौक स्थित जर्जर प्रतीक्षालय का जीर्णोद्धार किया जाए।
- यात्रियों की संख्या को देखते हुए बड़े आकार का आधुनिक प्रतीक्षालय बनाया जाए।
- महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान है।
बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी पर नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई छोटी-छोटी सुविधाएं भी उपेक्षा का शिकार हो रही हैं।
एक साधारण यात्री प्रतीक्षालय का महीनों तक पुनर्निर्माण नहीं होना संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर मरम्मत और रखरखाव किया जाए तो सरकारी संपत्तियां वर्षों तक उपयोगी बनी रह सकती हैं।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद
क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें और शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।
ग्रामीणों का कहना है कि यात्रियों को धूप, बारिश और सर्दी में खुले आसमान के नीचे खड़ा रहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते पहल करता है तो हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी और यह मार्ग फिर से सुरक्षित एवं सुविधाजनक बन सकेगा।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और जिम्मेदार विभागों पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही गुलावता तिराहे पर नया यात्री प्रतीक्षालय स्थापित किया जाएगा और पड़ाना के गांधी चौक स्थित जर्जर प्रतीक्षालय का भी पुनर्निर्माण कर आम नागरिकों को राहत प्रदान की जाएगी।
