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महाकाल मित्र मंडल की 8वीं पैदल कांवड़ यात्रा ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ उज्जैन रवाना, माही नदी के पवित्र जल से होगा बाबा महाकाल का जलाभिषेक

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Published On: 6 August 2026
Devotees of Mahakal Mitra Mandal begin their 8th annual Kanwar Yatra from Jhaknavda carrying holy water from the Mahi River for Jalabhishek at Shri Mahakaleshwar Temple in Ujjain during the holy month of Shravan.
— Devotees of Mahakal Mitra Mandal begin their 8th annual Kanwar Yatra from Jhaknavda carrying holy water from the Mahi River for Jalabhishek at Shri Mahakaleshwar Temple in Ujjain during the holy month of Shravan.

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महाकाल मित्र मंडल की 8वीं पैदल कांवड़ यात्रा ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ उज्जैन रवाना, माही नदी के पवित्र जल से होगा बाबा महाकाल का जलाभिषेक

संवाददाता: मनीष कुमट

झकनावदा। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। पूरे देश में इस पावन माह के दौरान शिवभक्ति अपने चरम पर होती है और श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। इसी कड़ी में झाबुआ जिले के झकनावदा स्थित समाजसेवी संगठन महाकाल मित्र मंडल द्वारा आयोजित 8वीं पैदल कांवड़ यात्रा बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई। यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर पूरा क्षेत्र “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से भक्तिमय हो उठा।

करीब 40 शिवभक्त कांवड़ियों का यह जत्था झाबुआ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्रृंगेश्वर महादेव धाम पहुंचा, जहां पवित्र माही नदी से कांवड़ में जल भरकर भगवान श्री महाकालेश्वर के जलाभिषेक के लिए अपनी पांच दिवसीय पैदल यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के चेहरे पर उत्साह, भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास साफ दिखाई दे रहा था।

माही नदी के पवित्र जल से शुरू हुई आस्था की यात्रा

यात्रा का शुभारंभ श्रृंगेश्वर महादेव धाम में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर किया गया। सभी शिवभक्तों ने सर्वप्रथम पवित्र माही नदी में स्नान कर जल भरा और भगवान श्रृंगेश्वर महादेव के दर्शन किए। इसके बाद पंचमुखी हनुमानजी महाराज एवं ब्रह्मलीन महंत श्री श्री 1008 श्री काशीगिरीजी महाराज की समाधि पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद सभी श्रद्धालु कांवड़ लेकर उज्जैन की ओर पैदल रवाना हुए। पूरे मार्ग में “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी यात्रा में शामिल होकर शिवभक्तों का उत्साहवर्धन किया।

लगातार आठवें वर्ष निकाली जा रही है पैदल कांवड़ यात्रा

महाकाल मित्र मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि यह यात्रा मंडल द्वारा लगातार आठवें वर्ष आयोजित की जा रही है। हर वर्ष श्रावण मास में माही नदी के पवित्र जल से भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक करने की परंपरा को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाया जाता है।

मंडल का उद्देश्य केवल धार्मिक यात्रा निकालना नहीं, बल्कि युवाओं में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में युवा इस यात्रा से जुड़ते हैं और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

पांच दिनों तक चलेगी यात्रा, चार स्थानों पर होगा रात्रि विश्राम

महाकाल मित्र मंडल के अनुसार यह पैदल कांवड़ यात्रा लगभग पांच दिनों तक चलेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन निर्धारित दूरी पैदल तय करेंगे तथा चार अलग-अलग स्थानों पर रात्रि विश्राम करेंगे।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंडल द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। भोजन, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, विश्राम स्थल, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा प्रबंध स्वयं मंडल के सदस्य कर रहे हैं। अनुभवी स्वयंसेवक पूरी यात्रा में कांवड़ियों के साथ रहकर उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखेंगे।

भगवान महाकालेश्वर का होगा माही नदी के जल से अभिषेक

यात्रा पूरी होने पर सभी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। इसके पश्चात माही नदी से लाए गए पवित्र जल से भगवान महाकाल का विशेष जलाभिषेक किया जाएगा।

श्रद्धालुओं का मानना है कि श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति का वास होता है। इसी भावना के साथ सभी कांवड़िये अपने घर-परिवार, गांव, प्रदेश और देश की खुशहाली एवं समृद्धि की कामना करेंगे।

शिवभक्ति से सराबोर हुआ पूरा क्षेत्र

श्रावण मास में निकली इस कांवड़ यात्रा ने पूरे झकनावदा एवं आसपास के क्षेत्र को शिवमय बना दिया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के हाथों में सजी-धजी कांवड़, भगवा वस्त्र, माथे पर चंदन-भस्म का तिलक और भगवान शिव के जयघोष ने भक्तिमय वातावरण का निर्माण कर दिया।

मार्ग में अनेक स्थानों पर ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। लोगों ने यात्रा की सफलता एवं सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा के लिए भगवान शिव से प्रार्थना भी की।

शनि मंदिर परिसर में हुआ भव्य स्वागत

कांवड़ यात्रा के प्रस्थान से पूर्व झकनावदा स्थित शनि मंदिर परिसर में महाकाल मित्र मंडल के सभी कांवड़ियों का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

वरिष्ठ समाजसेवी रणछोड़लाल अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवी श्रेणिक कोठारी, समाजसेवी राजेंद्र मिस्त्री, मंडल के उपाध्यक्ष परीक्षित सिंह राठौर, नारायण प्रजापत, हेमेंद्र कुमार जोशी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने कांवड़ियों को पुष्पमालाएं पहनाकर, दुपट्टा ओढ़ाकर एवं भगवान शिव के जयघोष के साथ उनकी मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

सभी अतिथियों ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति और सेवा का विशेष महत्व है तथा ऐसी धार्मिक यात्राएं समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करती हैं।

सामाजिक समरसता और सेवा का भी संदेश

महाकाल मित्र मंडल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा के विभिन्न कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। मंडल के सदस्यों ने बताया कि यात्रा के दौरान अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा आपसी सहयोग का विशेष ध्यान रखा जाता है।

कांवड़ यात्रा समाज में भाईचारा, सहयोग और सेवा की भावना को भी मजबूत करती है। अलग-अलग आयु वर्ग के लोग एक साथ पैदल चलकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता का संदेश भी प्रसारित होता है।

श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे माह में लाखों श्रद्धालु नदियों से पवित्र जल लाकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि गंगाजल अथवा किसी पवित्र नदी के जल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

माही नदी का जल भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी कारण महाकाल मित्र मंडल के श्रद्धालु हर वर्ष इसी नदी से जल लेकर उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का जलाभिषेक करते हैं।

श्रद्धालुओं ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

यात्रा पर रवाना होने से पहले सभी शिवभक्तों ने भगवान शिव से अपने परिवार, समाज, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान महाकाल की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना सदैव बनी रहे।

महाकाल मित्र मंडल की यह 8वीं पैदल कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, सेवा, अनुशासन और सनातन संस्कृति के संरक्षण का भी प्रेरणादायक संदेश दे रही है। श्रावण मास में निकली इस यात्रा ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया और भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

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