आर. के. मैना जैन रानेका तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान से सम्मानित हुए। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125वें स्थापना वर्ष पर उन्हें यह गौरव मिला। उन्होंने तीर्थ संरक्षण हेतु ₹1 लाख का अंशदान भी प्रदान किया।
रिपोर्टर : राजेश जैन दद्दू
स्थान : इंदौर
125वें स्थापना वर्ष का ऐतिहासिक सम्मान: जैन रत्न आर. के. मैना जैन रानेका बने ‘तीर्थ चक्रवर्ती’, ₹1 लाख का प्रेरणादायी अंशदान
इंदौर।
आर. के. मैना जैन रानेका तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान जैन समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया है। जैन समाज की सर्वोच्च संस्थाओं में शामिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी इस वर्ष अपना 125वां स्थापना वर्ष (शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष) मना रही है। यह ऐतिहासिक महोत्सव 22 अक्टूबर 2026 से 22 अक्टूबर 2027 तक पूरे देश में धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजनों के साथ मनाया जाएगा।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस विशेष अवसर पर कमेटी देशभर के उन दानवीर, धर्मप्रेमी एवं समाजसेवी व्यक्तित्वों को “तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान पत्र” प्रदान कर रही है, जिन्होंने जिनशासन की प्रभावना, जैन संस्कृति के संरक्षण तथा पावन तीर्थ क्षेत्रों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
आर. के. मैना जैन रानेका को मिला ‘तीर्थ चक्रवर्ती’ सम्मान
इसी क्रम में सर सेठ हुकुमचंद जी की नगरी इंदौर के प्रतिष्ठित उद्योगपति, वरिष्ठ समाजसेवी एवं सरल व्यक्तित्व के धनी जैन रत्न आर. के. मैना जैन रानेका को “तीर्थ चक्रवर्ती” सम्मान से विभूषित किया गया। यह सम्मान उनके वर्षों से किए जा रहे धार्मिक, सामाजिक एवं तीर्थ संरक्षण कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रतीक माना जा रहा है।
आर. के. मैना जैन रानेका तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान ने इंदौर सहित देशभर के जैन समाज में हर्ष का वातावरण बना दिया है।
तीर्थ संरक्षण के लिए ₹1 लाख का पावन अंशदान
सम्मान प्राप्त करने के साथ ही श्री आर. के. मैना जैन रानेका ने भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के माध्यम से तीर्थ संरक्षण हेतु ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का पावन अंशदान भी प्रदान किया।
कमेटी ने इसे केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि श्रमण संस्कृति, जिनवाणी के प्रचार-प्रसार और प्राचीन जैन तीर्थों के संरक्षण के प्रति समर्पित भावना का प्रतीक बताया।
कमेटी ने प्रशस्ति पत्र में कही यह बात
कमेटी द्वारा जारी अभिनंदन एवं प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया—
“आपके हृदय में तरंगित अनुकरणीय श्रद्धा, अगाध समर्पण एवं अटूट भक्ति के प्रति हम कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। आपका यह सहयोग मात्र वित्तीय नहीं है, बल्कि यह श्रमण संस्कृति के उत्कर्ष, जिनवाणी के प्रचार तथा अनादि-निधन जैन तीर्थों के गौरव को अक्षुण्ण बनाए रखने वाला प्रेरणादायी संबल है।”
प्रशस्ति पत्र में आगे लिखा गया—
“दान भोग नाश तिसरी गति होय, दान बिना धन सफल न होय।”
कमेटी ने कहा कि श्री रानेका की यह दानवीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
इस अवसर पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के—
- राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन
- राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंढारी
- शतकोत्तर स्थापना वर्ष के चेयरमैन जवाहर लाल जैन
ने श्री आर. के. मैना जैन रानेका एवं उनके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर धर्ममय जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
इंदौर के समाजजनों ने दी बधाई
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर इंदौर के अनेक वरिष्ठ समाजसेवियों एवं सामाजिक संगठनों ने श्री रानेका को शुभकामनाएं दीं।
बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से—
- डॉ. जैनेन्द्र जैन
- अमित कासलीवाल (महावीर ट्रस्ट अध्यक्ष)
- मनोहर झांझरी (फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष)
- आनंद नवीन गोधा
- आजाद जी जैन
- हंसमुख गांधी
- टीके वेद
- डीके जैन
- डीएसपी सुशील पांड्या
- होलास सोनी
- श्रीमती पुष्पा कासलीवाल (फेडरेशन की शिरोमणि संरक्षिका)
- श्रीमती मुक्ता जैन (महिला परिषद् संभागीय अध्यक्ष)
- श्रीमती रेखा जैन श्रीफल
- श्रीमती साधना दगडे
सहित अनेक समाजजनों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके यशस्वी, स्वस्थ एवं धर्ममय जीवन की मंगलकामना की।
निष्कर्ष
आर. के. मैना जैन रानेका तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जैन समाज में सेवा, समर्पण और तीर्थ संरक्षण के प्रति उनकी निष्ठा का राष्ट्रीय सम्मान है। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125वें स्थापना वर्ष में मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत माना जाएगा।
