आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह के तहत Damoh के नन्हे मंदिर में भव्य आयोजन हुआ। सात परिवारों को चांदी के कलश स्थापना का सौभाग्य मिला।
आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह: नन्हे मंदिर में सात परिवारों को मिला चांदी के कलश स्थापना का सौभाग्य
संवाददाता : सोनू अठया | स्वराज वाणी | Damoh (मध्य प्रदेश)
Damoh शहर के नन्हे मंदिर में आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के बीच चांदी के सात कलशों की स्थापना कर चातुर्मास का शुभारंभ किया गया। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना कर आत्मकल्याण, संयम तथा आध्यात्मिक साधना का संकल्प लिया।
नन्हे मंदिर में हुआ भव्य आयोजन
Damoh के प्रसिद्ध नन्हे मंदिर में आयोजित आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आर्यिका संघ के सान्निध्य में मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में भाग लेकर धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
चातुर्मास के शुभ अवसर पर मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया था। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
सात परिवारों को मिला चांदी के कलश स्थापना का सौभाग्य
समारोह का सबसे विशेष आकर्षण चांदी के सात कलशों की स्थापना रही। विभिन्न श्रद्धालु परिवारों को यह पुण्य अवसर प्राप्त हुआ।
- प्रथम कलश – विपिन जैन परिवार
- द्वितीय कलश – अरविंद ईटोरिया परिवार
- तृतीय कलश – मीनू सेठ एवं विजयश्री आयरन परिवार
- चतुर्थ कलश – विनय मलैया परिवार
- पंचम कलश – नवीन निराला परिवार
- षष्ठम कलश – राजकुमार रानू परिवार
- सप्तम कलश – महेंद्र-करुणा वेजीटेरियन परिवार
सभी परिवारों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर चांदी के कलश स्थापित किए और धर्म प्रभावना का संदेश दिया।
श्रद्धालुओं ने लिया धर्म आराधना का संकल्प
आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने चातुर्मास को आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक साधना का सर्वोत्तम समय बताया। आर्यिका माताजी के सान्निध्य में सभी ने नियमित पूजा, स्वाध्याय, सामायिक, प्रवचन एवं धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का संकल्प लिया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मकल्याण और संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर भी है। समाज के युवाओं और बच्चों को भी धर्म से जोड़ने की प्रेरणा इस आयोजन से मिली।
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के चार महीनों में साधु-साध्वियां एक ही स्थान पर विराजमान होकर धर्म प्रवचन, तप, स्वाध्याय और साधना करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु अधिकाधिक धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने का प्रयास करते हैं।आर्यिका चिंतनमती माताजी के सान्निध्य में आयोजित यह समारोह श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायक रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
निष्कर्ष
Damoh के नन्हे मंदिर में आयोजित आर्यिका चिंतनमती माताजी चातुर्मास स्थापना समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बना। सात परिवारों को चांदी के कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त हुआ और पूरे आयोजन में धर्म प्रभावना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के दौरान नियमित धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का संकल्प लिया।


