हरिहर कथा में बह रही ज्ञान और भक्ति की गंगा, श्रद्धालु ले रहे आध्यात्मिक लाभ
झाबुआ में धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
Jhabua। अग्रणी पद्मवंशीय राठौड़ (तेली) समाज, राजपूत, ब्रजवासी, भांटी (सेन), कंडारा एवं पंवार परिवार सहित सकल समाज की महिलाओं एवं समस्त हरि-हर भक्तों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दिव्य हरिहर कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। रात्रि 8 से 9 बजे तक आयोजित हो रही इस कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान हरि-हर की महिमा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा स्थल पर प्रतिदिन भक्तिमय वातावरण देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ कथा पंडाल में पहुंचते हैं और व्यास पीठ से प्रवाहित होने वाली ज्ञान गंगा में डुबकी लगाकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। आयोजन में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है।
पंडित कैलाश त्रिपाठी के मुखारविंद से हो रहा कथा रसपान
हरिहर कथा के दौरान नगर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित कैलाश जी त्रिपाठी (अमरगढ़ वाले) व्यास पीठ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करवा रहे हैं। अपने सरल, प्रभावशाली और भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से वे भगवान हरि-हर की महिमा, धार्मिक प्रसंगों, जीवन मूल्यों और संस्कारों का महत्व समझा रहे हैं।
पंडित त्रिपाठी अपने प्रवचनों में धर्म के मार्ग पर चलने, सत्य, सेवा, संस्कार और सदाचार को जीवन में अपनाने का संदेश दे रहे हैं। उनकी वाणी से निकलने वाले आध्यात्मिक विचार श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।
कथा के दौरान भगवान के विभिन्न स्वरूपों, धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला जा रहा है। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कथा श्रवण कर भक्ति भाव में लीन नजर आ रहे हैं।
आचार्य तुषार त्रिपाठी के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान
इस धार्मिक आयोजन की विशेषता यह है कि आचार्य पंडित तुषार त्रिपाठी के सानिध्य में विद्वान ब्राह्मण मंडली द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। मां आद्यशक्ति अनुष्ठान केंद्र झाबुआ के माध्यम से प्रतिदिन श्रीसूक्त पाठ एवं मां महालक्ष्मी का सहस्त्रार्चन किया जा रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीसूक्त पाठ और महालक्ष्मी सहस्त्रार्चन को समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है। इसी उद्देश्य से प्रतिदिन विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जा रही है।
इसके साथ ही श्रीफल को मंत्रोच्चार के साथ अभिमंत्रित किया जा रहा है। कथा विश्रांति दिवस पर पंडित कैलाश त्रिपाठी द्वारा इन अभिमंत्रित श्रीफलों को कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं को प्रदान किया जाएगा।
भक्ति के साथ सामाजिक एकता का संदेश दे रहा आयोजन
हरिहर कथा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का भी संदेश दे रही है। विभिन्न समाजों और परिवारों के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि धार्मिक कार्यक्रम समाज में संस्कारों के संरक्षण, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म के साथ-साथ समाज सेवा और मानव कल्याण की भावना का संदेश भी दिया जा रहा है।
30 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा आयोजन
आयोजकों ने बताया कि यह दिव्य हरिहर कथा 30 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही है। प्रतिदिन रात्रि 8 से 9 बजे तक कथा का आयोजन किया जा रहा है।
कथा समिति के सदस्यों ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लें और इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाएं।
समाजजनों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
हरिहर कथा के सफल आयोजन में समाज के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कथा समिति के सदस्य बंटी ब्रजवासी, भेरूसिंह सांकला, भंवरसिंह कंडारा, रमेशचंद्र पंवार, लक्ष्मीनारायण चौहान, घनश्याम भांटी सहित समाज के अनेक लोग व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।
समाज की महिलाओं ने भी आयोजन में विशेष उत्साह दिखाते हुए व्यवस्थाओं में सहयोग किया है। सभी के सामूहिक प्रयासों से कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
श्रद्धालुओं ने किया कथावाचक का स्वागत
कथा में पहुंच रहे श्रद्धालुओं ने कथावाचक पंडित कैलाश त्रिपाठी का पुष्पमाला, पगड़ी एवं दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। भक्तों ने उनके द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि कथा श्रवण से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों का विस्तार होता है।
भक्ति और संस्कारों से सराबोर हुआ कथा स्थल
हरिहर कथा आयोजन के दौरान प्रतिदिन कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु भगवान के जयकारों के साथ कथा का आनंद ले रहे हैं। वातावरण में धार्मिक मंत्रोच्चार, भजन और आध्यात्मिक विचारों की गूंज सुनाई दे रही है।
आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह कथा समाज में धर्म, संस्कार और एकता का संदेश पहुंचाने में सफल होगी। हरिहर कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति के साथ जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा मिल रही है।
