मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में शामिल हुए। आचार्य समय सागर महाराज से आशीर्वाद लिया, मूकमाटी महाकाव्य भेंट मिला और संसघ को राजकीय अतिथि घोषित किया। पूरी खबर पढ़ें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में पहुंचे, आचार्य समय सागर महाराज से लिया आशीर्वाद
रिपोर्टर : राजेश जैन दद्दू
स्थान : भोपाल
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में शामिल होकर जैन समाज के आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बने। कार्यक्रम में उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य महाश्रमण आचार्य श्री समय सागर महाराज के चरणों का पाद-प्रक्षालन किया, श्रीफल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में आचार्य श्री समय सागर महाराज से राजधानी भोपाल में चातुर्मास करने का विनम्र आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का सान्निध्य प्रदेशवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
आचार्य समय सागर महाराज ने दिया अहिंसा और सेवा का संदेश
अपने प्रवचन में आचार्य श्री समय सागर महाराज ने कहा कि संसार के सभी प्राणी प्रभु और गुरु के चरणों में आकर शांति और आत्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में जब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का चातुर्मास हुआ था, तब भी श्रद्धा और भक्ति का ऐसा ही वातावरण देखने को मिला था और आज वर्ष 2026 में वही दृश्य पुनः दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज की परिकल्पना से निर्मित विशाल पाषाण मंदिर समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्य गुरुदेव की प्रेरणा, आशीर्वाद और समाज के समर्पित सहयोग से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है।
अहिंसा केवल जैन समाज की नहीं, पूरे विश्व की धरोहर
आचार्य श्री ने कहा कि अहिंसा धर्म केवल जैन समाज का धर्म नहीं बल्कि पूरे विश्व का धर्म है। जिसके मन में करुणा, दया और संवेदना है, वही वास्तविक अर्थों में अहिंसा का उपासक है। उन्होंने समाज से प्रेम, सेवा और मानवता को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
सेवा कार्यों का किया उल्लेख
आचार्य श्री समय सागर महाराज ने अपने प्रवचन में भाग्योदय तीर्थ सागर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज निरंतर जनकल्याण का कार्य कर रहा है।उन्होंने बताया कि जबलपुर स्थित पूर्णायु आयुर्वेदिक चिकित्सालय, प्रतिभास्थली विद्यालय, हथकरघा परियोजना तथा अन्य सेवा संस्थानों के माध्यम से सभी वर्गों के लोगों को लाभ मिल रहा है। ये संस्थान समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
प्रदेशभर से पहुंचे श्रद्धालु
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग सहित इंदौर, उज्जैन, सागर, नागपुर, ललितपुर, विदिशा, इटारसी तथा देश के अनेक शहरों से हजारों गुरु भक्त उपस्थित हुए।सागर जिले से भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरे आयोजन में धार्मिक उल्लास, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा ने किया।
मुख्यमंत्री को भेंट की गई ‘मूकमाटी’
समारोह के दौरान आचार्य श्री समय सागर महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य ‘मूकमाटी’ भेंट किया।मुख्यमंत्री ने इसे अपने लिए सौभाग्य बताते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज का साहित्य समाज को सदैव नई दिशा देता रहेगा।
संसघ को मिला राजकीय अतिथि का दर्जा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए आचार्य श्री समय सागर जी महाराज संसघ को मध्यप्रदेश का राजकीय अतिथि घोषित किया।इस घोषणा का उपस्थित श्रद्धालुओं ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया। समाजजनों ने इसे जैन समाज के प्रति प्रदेश सरकार के सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक बताया।
आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता का संदेश
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में सेवा, संस्कार, अहिंसा और समरसता का संदेश देने वाला ऐतिहासिक अवसर भी बना। आचार्य श्री समय सागर महाराज के प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, सेवा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ाया तथा सरकार और संत समाज के बीच सकारात्मक संवाद का संदेश दिया।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में उनकी सहभागिता, आचार्य समय सागर महाराज से आशीर्वाद ग्रहण करना, भोपाल में चातुर्मास का आग्रह करना तथा संसघ को राजकीय अतिथि घोषित करने की घोषणा इस आयोजन की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। धार्मिक आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण यह कार्यक्रम लंबे समय तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में बना रहेगा।
