रजोहरण स्पर्शना कार्यक्रम में नागदा जंक्शन में श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था। बाल संस्कार शिविर में बच्चों को धर्म, संस्कार, अनुशासन और मानवता का प्रेरक संदेश दिया गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रजोहरण स्पर्शना: नागदा में श्रद्धा का अद्भुत संगम, बाल संस्कार शिविर में बच्चों को मिले जीवन के अनमोल संस्कार
नागदा | संवाददाता : जीवनलाल जैन
नागदा जंक्शन में रविवार को आयोजित रजोहरण स्पर्शना कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। परम पूज्य साध्वी अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-4 के पावन सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। इसी अवसर पर आयोजित बाल संस्कार शिविर में बच्चों को धर्म, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और मानवता जैसे जीवन मूल्यों की प्रेरणा दी गई।
रजोहरण स्पर्शना में उमड़ी श्रद्धा
रविवार प्रातः श्री पार्श्वप्रधान पाठशाला भवन, नागदा जंक्शन में आयोजित रजोहरण स्पर्शना कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं ने साध्वी भगवंतों के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव से ओत-प्रोत रहा।
लाभार्थियों का सम्मान
इस पावन आयोजन के लाभार्थी श्री अजय कुमार जी, श्री सुनील कुमार जी एवं श्री मयंक जी गांग (राजेन्द्र स्वीट्स परिवार) रहे। परिवार ने श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम की सेवा का लाभ लेकर समाज के सामने धार्मिक सेवा का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
साध्वी श्रीजी का प्रेरक संदेश
परम पूज्य साध्वी अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. ने अपने प्रेरक प्रवचन में श्रावक-श्राविकाओं को जैन धर्म के नियमों का पालन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म केवल पूजा तक सीमित न रहकर जीवन का व्यवहार बनना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने जीवन में संयम, सत्य और अहिंसा को अपनाता है तो उसका जीवन सफल बन सकता है।
उन्होंने बच्चों में संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को धर्म से जोड़ना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
भक्ति संगीत से भक्तिमय वातावरण
युवा संगीतकार आयुष बोहरा ने मधुर भक्ति प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन दिखाई दिए।
बाल संस्कार शिविर में बच्चों ने लिया उत्साह से भाग
दोपहर में आयोजित बाल संस्कार शिविर में 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक जीवन के साथ भारतीय संस्कृति और जैन धर्म के मूल संस्कारों से जोड़ना था।
बच्चों ने विभिन्न धार्मिक गतिविधियों, प्रश्नोत्तरी, प्रेरक खेल और संस्कारपरक कार्यक्रमों में भाग लेकर आनंद के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त किया।
धर्म और संस्कारों की शिक्षा
शिविर में बच्चों को निम्न विषयों पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया—
- धर्म का महत्व
- अच्छे संस्कार
- अनुशासन
- आत्मविश्वास
- सदाचार
- मानवता
- माता-पिता का सम्मान
- गुरु भक्ति
- समय का सदुपयोग
- सकारात्मक सोच
इन विषयों पर दिए गए प्रेरक संदेशों ने बच्चों को बेहतर नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित किया।
आज के लाभार्थी
बाल संस्कार शिविर के लाभार्थी सरदार मलजी जी – विमलचंद जी एवं परिवार, नागदा रहे। उनके सहयोग से बच्चों के लिए प्रभावना एवं स्वल्पाहार की सुंदर व्यवस्था की गई।
प्रभावना एवं स्वल्पाहार
शिविर के समापन अवसर पर सभी बच्चों को प्रभावना वितरित की गई तथा स्वल्पाहार कराया गया। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और प्रसन्नता साफ दिखाई दे रही थी।
आयोजकों का संदेश
यह संपूर्ण आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ, नागदा जंक्शन एवं आत्मलक्षी चातुर्मास समिति के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
आयोजकों ने समाज से अधिक से अधिक बच्चों को ऐसे संस्कारमय शिविरों से जोड़ने की अपील करते हुए कहा—
“आज के संस्कार ही कल का उज्ज्वल भविष्य हैं।”
उन्होंने कहा कि बच्चों में धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों का विकास समाज को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
निष्कर्ष
रजोहरण स्पर्शना एवं बाल संस्कार शिविर केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिकता से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जैन धर्म के आदर्शों से जोड़कर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नागदा में आयोजित यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और संस्कार का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

