शिक्षा का दीप जलाकर सेवानिवृत्त हुए नारायण दास बैरागी, भावुक विदाई में नम हुईं आंखें
निष्ठा, समर्पण और स्नेहपूर्ण सेवाओं के लिए शाला परिवार और विद्यार्थियों ने किया सम्मान
Jhabua(मनीष कुमट)। शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक अपनी निस्वार्थ सेवाओं, समर्पण और वात्सल्यपूर्ण मार्गदर्शन से सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक नारायण दास बैरागी के सेवानिवृत्त होने पर शाला परिवार द्वारा भव्य एवं भावुक विदाई समारोह आयोजित किया गया।
विद्यालय परिसर इस अवसर पर सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं से सराबोर नजर आया। सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शाला परिवार के सदस्यों ने नारायण दास बैरागी के योगदान को याद करते हुए उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से भावभीनी विदाई दी।

ज्ञान और संस्कारों के स्तंभ रहे बैरागी
नारायण दास बैरागी का संपूर्ण सेवाकाल केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शिक्षा को जीवन निर्माण का माध्यम माना। उन्होंने अपने लंबे शिक्षकीय कार्यकाल में बच्चों को विषयों की जानकारी देने के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
उनका मानना था कि एक शिक्षक का वास्तविक दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने हर विद्यार्थी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उनमें आत्मविश्वास, मेहनत तथा सकारात्मक सोच का विकास किया।
विद्यालय में उनका व्यवहार हमेशा सरल, सहज और आत्मीय रहा। वे विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करने का प्रयास करते थे। कई विद्यार्थियों के लिए वे शिक्षक के साथ-साथ एक मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका में भी रहे। उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार और सहयोगी भावना ने उन्हें विद्यार्थियों और सहकर्मियों के बीच विशेष स्थान दिलाया।
सहकर्मियों के साथ भी उनका संबंध हमेशा मधुर और सहयोगपूर्ण रहा। उनके अनुशासन, समय पालन और कार्य के प्रति समर्पण ने शाला परिवार को लगातार प्रेरित किया। उन्होंने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों और मानवीय मूल्यों से युक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना है।
नारायण दास बैरागी की सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों के जीवन में सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।
फूल-मालाओं और स्मृति चिह्न से किया सम्मान
विदाई समारोह में उपस्थित अतिथियों और शाला स्टाफ ने नारायण दास बैरागी का शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। इस दौरान सेवानिवृत्त शिक्षक राकेश कुमार मग, भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़, मंडल उपाध्यक्ष परीक्षित सिंह राठौर, राजेश कांसवा, युवक कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह राठौर सेमलिया, राजेंद्र मिस्त्री, पालक शिक्षक संघ अध्यक्ष एफ.सी. माली सहित अनेक गणमान्य नागरिक और विद्यालय स्टाफ मौजूद रहे।
विद्यार्थियों ने अपने प्रिय शिक्षक के सम्मान में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और पुष्पवर्षा कर उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

“शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता”
संकुल प्राचार्य रमेश कुमार चौरसिया ने कहा कि नारायण दास बैरागी का विद्यालय से सेवानिवृत्त होना शाला परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अनुशासित जीवन, समय की पाबंदी और विद्यार्थियों के प्रति प्रेम हमेशा सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षक सरकारी सेवा से भले ही निवृत्त हो जाता है, लेकिन उसके द्वारा दिए गए ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन का प्रभाव हमेशा समाज में बना रहता है।
अनुभव साझा करते हुए भावुक हुए बैरागी
कार्यक्रम के अंतिम चरण में नारायण दास बैरागी ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा किए और शाला परिवार, सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके संबोधन के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
विद्यालय परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुखद और दीर्घायु जीवन की मंगल कामना की।

बग्गी और बैंड-बाजों के साथ दी गई यादगार विदाई
सेवानिवृत्ति समारोह के समापन के बाद शाला परिवार ने नारायण दास बैरागी को विशेष अंदाज में विदाई दी। उन्हें बग्गी में बैठाकर बैंड-बाजों के साथ विद्यालय परिसर से विदा किया गया।
इस दौरान विद्यार्थी खुशी से झूमते नजर आए और आतिशबाजी कर अपने प्रिय शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त किया। रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पमाला पहनाकर बैरागी का स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न मालवीय ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन हेमेंद्र कुमार जोशी ने माना। इस अवसर पर झकनावदा संकुल स्टाफ, विद्यार्थियों और बैरागी परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
