तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान के तहत दिल्ली के ऋषभ विहार में आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में 11.11 लाख रुपये का तीर्थ रक्षा कलश स्थापित किया गया। जानें भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र रक्षा कमेटी का उद्देश्य, राजेश जैन दद्दू का संदेश और अभियान की पूरी जानकारी।
तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान: 11.11 लाख का ऐतिहासिक कलश, तीर्थ बचेंगे तो धर्म बचेगा
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू | इंदौर/दिल्ली
दिल्ली। तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान के अंतर्गत श्रमण संस्कृति के महाश्रमण पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ के वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में दिल्ली के ऋषभ विहार में 11 लाख 11 हजार रुपये का तीर्थ रक्षार्थ मंगल कलश श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। यह अभियान देशभर के चातुर्मास स्थलों पर संचालित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य जैन समाज की प्राचीन तीर्थ धरोहरों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार है।
तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान क्या है?
तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र रक्षा कमेटी द्वारा प्रारंभ किया गया एक राष्ट्रीय धार्मिक एवं सामाजिक अभियान है। इसका उद्देश्य देशभर में स्थित प्राचीन जैन तीर्थों के संरक्षण, सुरक्षा, जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए समाज को एक सूत्र में जोड़ना है।
दिल्ली में स्थापित हुआ 11.11 लाख रुपये का तीर्थ रक्षा कलश
श्रमण संस्कृति के महाश्रमण पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में वर्षायोग के दौरान ऋषभ विहार, दिल्ली में 11 लाख 11 हजार रुपये का तीर्थ रक्षार्थ मंगल कलश स्थापित किया गया।यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जैन समाज की धरोहरों को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है।
राजेश जैन दद्दू ने किया देशव्यापी अभियान का आह्वान
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष देशभर के सभी चातुर्मास स्थलों पर तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान चलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि—
“यदि तीर्थ सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियां धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी रहेंगी। इसलिए प्रत्येक जैन परिवार को इस अभियान से जुड़ना चाहिए।”
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का संदेश
आचार्य भगवंत श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि आज अनेक प्राचीन जैन तीर्थ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। समय रहते उनके संरक्षण के लिए समाज को आगे आना होगा।उन्होंने कहा कि“तीर्थ केवल मंदिर नहीं हैं, वे हमारी आस्था, इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान के केन्द्र हैं।”
कलश की राशि का उपयोग कैसे होगा?
भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र रक्षा कमेटी के अनुसार कलशों के माध्यम से प्राप्त होने वाली सम्पूर्ण राशि समिति को समर्पित की जाएगी।इस राशि का उपयोग निम्न कार्यों में किया जाएगा—
- प्राचीन जैन तीर्थों का संरक्षण
- जीर्णोद्धार कार्य
- आवश्यक मरम्मत
- सुरक्षा व्यवस्था
- आधारभूत सुविधाओं का विकास
- तीर्थ क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण
- भावी पीढ़ियों के लिए धरोहर संरक्षण
भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र रक्षा कमेटी का समाज से आह्वान
समिति ने देशभर के जैन समाज से अपील की है कि जहां-जहां वर्षायोग एवं चातुर्मास स्थापित हो रहे हैं, वहां तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान के अंतर्गत प्रत्येक नगर एवं ग्राम में कम से कम एक तीर्थ रक्षा कलश अवश्य स्थापित किया जाए।समिति का मानना है कि समाज के छोटे-छोटे सहयोग से करोड़ों रुपये का संरक्षण कोष तैयार हो सकता है, जिससे देश के सैकड़ों प्राचीन तीर्थों का संरक्षण संभव होगा।
“तीर्थ बचेगा तो धर्म बचेगा”
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक संदेश रहा—“तीर्थ बचेगा तो धर्म बचेगा।”यही संदेश पूरे देश में चलाए जा रहे तीर्थ रक्षार्थ कलश स्थापना अभियान का मूल उद्देश्य है।
