आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज चातुर्मास 2026 के शुभ अवसर पर ग्वालियर में 8 संतों के चातुर्मास हेतु भव्य मंगल कलश स्थापना हुई। पढ़ें पूरी खबर।
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज चातुर्मास 2026: ग्वालियर में भव्य एवं दिव्य 8 संतों का मंगल कलश स्थापना समारोह
रिपोर्ट: सचिन जैन | ग्वालियर
ग्वालियर। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज चातुर्मास 2026 के पावन अवसर पर मंगलवार को ग्वालियर के चंपाबाग बगीची में आत्म साधना पावन वर्षायोग चातुर्मास का भव्य शुभारंभ हुआ। परम पूज्य आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ की सन्निधि में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में आठ संतों के चातुर्मास हेतु मंगल कलश स्थापना विधिवत सम्पन्न हुई। शुभ चौघड़िया मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित मंगल कलश ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
ग्वालियर में हुआ भव्य चातुर्मास कलश स्थापना समारोह
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित चंद्र प्रकाश जैन एवं पंडित विपिन जैन द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया गया।इसके बाद जैन पंचरंगी ध्वज का ध्वजारोहण डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, निर्मल जैन मार्शसंस एवं नरेश रांवका द्वारा किया गया।भगवान जिनेंद्र देव एवं आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज से चातुर्मास करने की आज्ञा प्राप्त की गई।
आयोजन समिति में रहे ये प्रमुख पदाधिकारी
इस अवसर पर चातुर्मास समिति के
- अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल
- सचिव निर्मल पाटनी
- मुख्य संयोजक विनय कासलीवाल
- कोषाध्यक्ष पंकज छाबड़ा
सहित
- बालचंद्र जैन
- महेंद्र टोंग्या
- संजय गोधा
एवं जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन विनय कासलीवाल द्वारा किया गया।
वैदिक मंत्रों के बीच स्थापित हुआ मंगल कलश
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के मुखारविंद से मंगल कलश में
- कपूर
- हल्दी
- सुपारी
- लौंग
- चांदी के सिक्के
आदि शुभ सामग्री विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रों के साथ स्थापित की गई।यह मंगल कलश श्री संजय गोश, सचिन गोधा परिवार द्वारा स्थापित कराया गया।कलश स्थापना का उद्देश्य
- विश्व शांति
- विश्व कल्याण
- वर्षायोग की निर्विघ्न सम्पन्नता
- धर्म एवं अहिंसा का संदेश
बताया गया।
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने दिया प्रेरणादायक संदेश
इस अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा—“वर्षा ऋतु में असंख्य जीवों की उत्पत्ति होती है। इसलिए जैन साधु चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना और स्वाध्याय करते हैं। यह जीवदया, संयम और अहिंसा का अनुपम पर्व है।”उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, धर्म साधना एवं समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का सर्वोत्तम अवसर है।
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा एवं मंगल कलश कार्यक्रम
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि 29 जुलाई को प्रातः 9 बजे चंपाबाग बगीची में
- गुरु पूर्णिमा महोत्सव
- चित्र अनावरण
- दीप प्रज्वलन
- शास्त्र भेंट
- गुरु पूजन
- मंगल प्रवचन
- मंगल कलश स्थापना
का आयोजन किया जाएगा।इस अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज का मंगल आशीर्वाद एवं धर्मोपदेश प्राप्त होगा।
धार्मिक दृष्टि से चातुर्मास का महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में जीवों की रक्षा के लिए साधु-संत एक ही स्थान पर निवास करते हैं तथा धर्म, तप, स्वाध्याय, प्रवचन एवं आध्यात्मिक साधना द्वारा समाज को संयम, करुणा और अहिंसा का संदेश देते हैं।
निष्कर्ष
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज चातुर्मास 2026 का शुभारंभ ग्वालियर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। आठ संतों के चातुर्मास के लिए स्थापित मंगल कलश विश्व शांति एवं मानव कल्याण का प्रतीक बना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।




