मेनका गांधी Jain Samaj विवाद को लेकर इंदौर में जैन समाज ने कड़ा विरोध जताया है। राजेश जैन दद्दू सहित समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनके बयान को निराधार बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।
राजेश जैन दद्दू
इंदौर
मेनका गांधी Jain Samaj विवाद: धार्मिक भावनाएं आहत करने पर माफी की मांग
Indore। मेनका गांधी Jain Samaj विवाद को लेकर देशभर के जैन समाज में नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है। हाल ही में दिल्ली में विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज एवं समाजजनों की उपस्थिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा दिए गए एक बयान पर विश्व जैन समाज और विभिन्न जैन संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
मेनका गांधी ने अपने वक्तव्य में कथित रूप से कहा था कि “जैन साधु-संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छिका के कारण हर वर्ष 15 लाख मोरों की हत्या की जाती है।” इस बयान को लेकर जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे बेबुनियाद, तथ्यहीन और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।
मेनका गांधी के बयान पर Jain Samaj की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि मेनका गांधी का यह बयान न केवल तथ्यहीन है बल्कि इससे करोड़ों जैन अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।उन्होंने कहा कि जैन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन अहिंसा प्रधान धर्म है, जिसकी मूल भावना “जियो और जीने दो” पर आधारित है। ऐसा धर्म किसी भी जीव की हिंसा को प्रोत्साहित नहीं कर सकता।
राजेश जैन दद्दू ने क्या कहा?
राजेश जैन दद्दू ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस पिच्छिका की बात मेनका गांधी कर रही हैं, उसका उपयोग जैन साधु-संत सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन के लिए करते हैं।उन्होंने कहा कि जैन धर्म में एकेंद्रिय से लेकर पंचेंद्रिय जीवों तक सभी की रक्षा का संदेश दिया जाता है। ऐसे में यह कहना कि जैन साधु-संतों की वजह से मोरों की हत्या होती है, पूरी तरह निराधार और गलत है।
पिच्छिका क्या होती है?
पिच्छिका जैन साधु-संतों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक धार्मिक उपकरण है, जिसका उद्देश्य चलने, बैठने या धार्मिक क्रियाओं के दौरान सूक्ष्म जीवों को हटाना होता है ताकि उनकी हिंसा न हो।जैन धर्म में अहिंसा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। पिच्छिका का उपयोग भी इसी सिद्धांत का हिस्सा माना जाता है।
मोर पंख और जैन परंपरा का संबंध
जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पदाधिकारियों ने बताया कि मोर अपने पंख प्राकृतिक रूप से वर्ष में एक बार स्वयं त्याग देता है। जैन साधु-संत उन्हीं त्यागे गए पंखों का उपयोग करते हैं।समाज के अनुसार, प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोर पंखों की डंडी पूर्णतः सफेद होती है, जबकि हिंसा के माध्यम से प्राप्त पंखों में रक्त के कारण डंडी का हिस्सा काला पड़ जाता है।समाज के नेताओं का कहना है कि जैन साधु-संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छिका में केवल प्राकृतिक रूप से प्राप्त मोर पंखों का ही उपयोग किया जाता है।
वरिष्ठ समाजजनों ने बताया बयान को अप्रमाणिक
इस विषय पर समाज के वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन, राकेश जैन, मयंक जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, अमित कासलीवाल, हंसमुख गांधी, टी.के. वेद सहित अनेक समाजजनों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर मेनका गांधी की टिप्पणी का विरोध किया।डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि जैन धर्म एक अहिंसक धर्म है और इसकी परंपराएं जीव संरक्षण पर आधारित हैं। ऐसे में इस प्रकार के आरोप जैन धर्म और उसकी संस्कृति के प्रति गलत संदेश देने वाले हैं।
सनातन और मुस्लिम समाज की भावनाओं का भी मुद्दा उठाया
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि मोर पंख का उपयोग केवल जैन धर्म तक सीमित नहीं है।उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण तथा खाटू श्याम जी की पूजा-अर्चना में भी मोर पंख का उपयोग होता है। वहीं कई स्थानों पर मुस्लिम समाज द्वारा भी धार्मिक स्थलों में इसका उपयोग किया जाता है।इसलिए किसी भी धार्मिक परंपरा को बिना तथ्यात्मक जानकारी के कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
माफी नहीं मांगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने संयुक्त रूप से कहा है कि मेनका गांधी के बयान से देशभर के Jain Samaj की भावनाएं आहत हुई हैं।संगठनों ने मांग की है कि मेनका गांधी सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें और समाज से क्षमा याचना करें।साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द माफी नहीं मांगी गई तो समाज कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
निष्कर्ष
मेनका गांधी Jain Samaj विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। जैन समाज का कहना है कि किसी भी धर्म या उसकी परंपराओं पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जांच आवश्यक है। वहीं समाज के विभिन्न संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा है और पिच्छिका का उपयोग भी जीव रक्षा के उद्देश्य से किया जाता है।अब सभी की निगाहें मेनका गांधी की प्रतिक्रिया और इस पूरे विवाद के आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
