श्रुत पंचमी महोत्सव Vidisha 2026 के द्वितीय दिवस श्री योगसार विधान भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। पंडित अनुभव शास्त्री ने श्रुत परंपरा, श्रुत केवली और जैन आगमों के संरक्षण पर विस्तृत प्रकाश डाला।
श्रुत पंचमी महोत्सव Vidisha 2026: द्वितीय दिवस श्री योगसार विधान सम्पन्न, श्रुत परंपरा का हुआ विस्तृत वर्णन
Vidisha श्रुत पंचमी महोत्सव विदिशा 2026 के अंतर्गत श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय धार्मिक महोत्सव के दूसरे दिन श्री योगसार लघु विधान अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
प्रवक्ता डॉ. मक्खनलाल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 जून से 21 जून 2026 तक आयोजित इस विशेष धार्मिक आयोजन में श्री चौबीस तीर्थंकर लघु विधान, श्री योगसार लघु विधान एवं श्री द्रव्यसंग्रह विधान का आयोजन किया जा रहा है।
श्रुत पंचमी महोत्सव Vidisha 2026 का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में श्रुत पंचमी का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व जैन आगम, शास्त्रों एवं श्रुत ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसी उद्देश्य से विदिशा में आयोजित श्रुत पंचमी महोत्सव विदिशा 2026 में श्रद्धालुओं को धर्म और ज्ञान की महत्ता से अवगत कराया जा रहा है।
श्री योगसार विधान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
महोत्सव के द्वितीय दिवस आयोजित श्री योगसार लघु विधान में समाज के अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पूजा, अर्चना, विधान एवं धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए।विधान के माध्यम से आत्मकल्याण, संयम, तप और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक पूजन कर पुण्यार्जन किया।
श्रुत पंचमी महोत्सव Vidisha 2026 में श्रुत परंपरा का विस्तृत वर्णन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित अनुभव शास्त्री (करेली) ने जैन श्रुत परंपरा का व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि श्रुत प्रवाह भगवान आदिनाथ से प्रारंभ हुआ। समय-समय पर ऐसे अवसर आए जब धर्म और धर्मी दोनों का अभाव हो गया, लेकिन वर्तमान में जो धार्मिक वातावरण प्राप्त है, वह अत्यंत सौभाग्य का विषय है।
केवल ज्ञान की परंपरा
पंडित अनुभव शास्त्री ने बताया कि केवल ज्ञान की परंपरा श्रीधर केवली तक चली। इसके पश्चात श्रुत केवली युग का प्रारंभ हुआ।
श्रुत केवली युग का इतिहास
श्रुत केवली युग लगभग 100 वर्षों तक चला। इस काल में:
- विष्णु
- नन्दिमित्र
- अपराजित
- गोवर्धन
- भद्रबाहु
जैसे महान आचार्य हुए जो 11 अंग और 14 पूर्वों के ज्ञाता थे।
11 अंग और 10 पूर्व के ज्ञाता मुनिराज
इसके बाद लगभग 183 वर्षों तक 11 मुनिराजों को 11 अंग और 10 पूर्वों का ज्ञान रहा।धर्म ज्ञान की यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही और समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती रही।
11 अंगधारी मुनियों का काल
इसके बाद 220 वर्षों तक:
- क्षत्र
- जयपाल
- पांडु
- ध्रुवसेन
- कंस
इन पांच महान मुनिराजों ने 11 अंगों का ज्ञान सुरक्षित रखा।
आचारांग का लोप और श्रुत लेखन की आवश्यकता
पंडित अनुभव शास्त्री ने बताया कि इसके पश्चात 118 वर्षों तक:
- सुभद्र
- यशोभद्र
- भद्रबाहु
- लोहाचार्य
केवल एक अंग के ज्ञाता रहे।इसी काल में आचारांग का भी लोप हो गया। धीरे-धीरे श्रुत ज्ञान के संरक्षण की आवश्यकता अनुभव की गई।
श्रुत लेखन की परंपरा क्यों शुरू हुई?
धर्मसभा में बताया गया कि जब मौखिक परंपरा कमजोर होने लगी तब श्रुत लेखन की आवश्यकता महसूस हुई।इसी के परिणामस्वरूप जैन आगमों और धर्म ग्रंथों को लिखित रूप में सुरक्षित रखने की परंपरा विकसित हुई।आज आवश्यकता है कि समाज श्रुत ज्ञान, जैन साहित्य और धार्मिक ग्रंथों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए।
धर्म संरक्षण का दिया संदेश
पंडित अनुभव शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में श्रुत ज्ञान का संरक्षण प्रत्येक जैन श्रद्धालु का कर्तव्य है।जिनवाणी और आगम साहित्य का अध्ययन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार आने वाली पीढ़ियों को धर्म से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
21 जून को होंगे विशेष धार्मिक कार्यक्रम
ट्रस्ट द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 21 जून 2026 को:
- प्रातः 7:30 बजे – प्रक्षाल पूजन
- श्री द्रव्यसंग्रह लघु विधान
- प्रातः 9:00 बजे – धर्म प्रवचन
- रात्रि 8:00 से 8:30 बजे – भक्ति कार्यक्रम
- रात्रि 8:30 बजे – विशेष प्रवचन
आयोजित किए जाएंगे।
श्रद्धालुओं से धर्म लाभ लेने की अपील
श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मलूकचंद जैन एवं समस्त ट्रस्टियों ने समाज के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।
डॉ. मक्खनलाल जैन
प्रवक्ता
श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, विदिशा
मो.: 9826271575



