World Sickle Cell Day पर थांदला में रक्तदान शिविर, कलेक्टर ने किया रक्तदाताओं का सम्मान
‘जीवन धारा अभियान’ के तहत जागरूकता और स्वैच्छिक रक्तदान पर जोर
झाबुआ (मनीष कुमट)
World Sickle Cell Day के अवसर पर झाबुआ जिले के थांदला स्थित सिविल अस्पताल परिसर में जिला प्रशासन द्वारा विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह आयोजन “जीवन धारा अभियान – एक बूंद उम्मीद की” के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य सिकल सेल रोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, रक्तदान को प्रोत्साहित करना और जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया और उनके प्रयासों की सराहना की।
रक्तदान को बताया मानवता की सबसे बड़ी सेवा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त किसी गंभीर मरीज की जान बचा सकता है और यह समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने बताया कि रक्तदान को लेकर समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां फैली हुई हैं, जिनमें सबसे सामान्य यह धारणा है कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह गलत है, क्योंकि रक्तदान के बाद शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
World Sickle Cell Day: जनजातीय क्षेत्रों की बड़ी चुनौती
कलेक्टर ने कहा कि झाबुआ एक जनजातीय जिला है, जहां सिकल सेल बीमारी के मामले अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं। यह एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसके कारण मरीजों को समय-समय पर रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों के लिए नियमित रक्त आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है, और इसमें स्वैच्छिक रक्तदान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति को आगे आकर इस अभियान में योगदान देना चाहिए।
2047 तक सिकल सेल उन्मूलन का लक्ष्य
कलेक्टर ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जागरूकता, समय पर जांच, उपचार और रक्त उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
रक्त उपलब्धता के लिए वर्षभर की योजना
जिला प्रशासन द्वारा रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत वार्षिक कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके तहत पूरे वर्ष विभिन्न अवसरों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले को रक्त की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को रक्त की कमी का सामना न करना पड़े।

‘जीवन धारा अभियान’ से बढ़ी जागरूकता
“जीवन धारा अभियान – एक बूंद उम्मीद की” के तहत आयोजित यह शिविर सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना। अभियान के तहत लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं।
सिविल अस्पताल परिसर में स्थापित ब्लड डोनेशन काउंटर और ब्लड डोनेशन बस के माध्यम से स्वैच्छिक रक्तदान की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सके।
युवाओं और नागरिकों की उत्साही भागीदारी
शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर समाज सेवा में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
रक्तदाताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल लोगों की जान बचाने में मदद करते हैं, बल्कि समाज में सेवा और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं।
अधिकारियों की उपस्थिति और सहयोग
कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) थांदला भास्कर गाचले सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और स्वयंसेवी भी उपस्थित रहे।
सभी अधिकारियों ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाते हैं।
सिकल सेल रोग उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह रक्तदान शिविर सिकल सेल रोग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित अंतराल पर आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर और व्यापक जागरूकता अभियानों के माध्यम से इस बीमारी से प्रभावित मरीजों को समय पर आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
प्रशासन के अनुसार, सिकल सेल रोग एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसके उपचार और प्रबंधन में निरंतर रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।
इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन लगातार और व्यापक स्तर पर किए जाएंगे, ताकि न केवल रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके बल्कि लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता और सहभागिता भी बढ़ाई जा सके। इससे जिले की स्वास्थ्य सेवाएं अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
निष्कर्ष
थांदला में आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता का मजबूत संदेश बनकर सामने आया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह साबित किया कि यदि समाज एकजुट होकर आगे आए तो गंभीर बीमारियों के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाया जा सकता है।
कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की उपस्थिति और प्रेरक संदेश ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया, जिससे सिकल सेल रोग उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में एक सकारात्मक कदम आगे बढ़ा है।
