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Rajya Sabha Elections 2026: 2 सीटों पर तीन उम्मीदवारों से मुकाबला दिलचस्प, क्रॉस वोटिंग की आशंका ने बढ़ाई सियासी हलचल

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Published On: 18 June 2026
Rajya Sabha Elections 2026: 2 सीटों पर तीन उम्मीदवारों से मुकाबला दिलचस्प, क्रॉस वोटिंग की आशंका ने बढ़ाई सियासी हलचल

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Rajya Sabha Elections 2026: दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों से मुकाबला दिलचस्प, 

आज राज्यसभा चुनाव के लिए होगा मतदान

Rajya Sabha Elections 2026: झारखंड में आज राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान होने जा रहा है। सामान्य परिस्थितियों में दो सीटों पर चुनाव होने और दो प्रमुख उम्मीदवारों के मैदान में होने पर परिणाम लगभग तय माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है और चुनावी मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं, क्योंकि एक भी वोट का इधर-उधर होना चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में पिछले कई दिनों से लगातार बैठकों, रणनीति निर्माण और राजनीतिक गणित का दौर जारी है। सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन जहां अपने संख्याबल के आधार पर दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहा है, वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसे में चुनाव परिणाम को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

क्यों खाली हुईं राज्यसभा की दो सीटें?

झारखंड में जिन दो सीटों के लिए मतदान हो रहा है, उनमें से एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक नेताओं में शामिल और पार्टी के संरक्षक रहे शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई है। शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का बड़ा चेहरा थे और लंबे समय तक आदिवासी राजनीति तथा राज्य आंदोलन की पहचान बने रहे। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई, जिसे भरने के लिए चुनाव कराया जा रहा है।

दूसरी सीट भारतीय जनता पार्टी के सांसद दीपक प्रकाश के कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है। उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को पूरा हो रहा है। इस सीट के लिए भी चुनाव कराया जा रहा है। दोनों सीटों पर एक साथ मतदान होने के कारण राजनीतिक समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं।

किसने किसे बनाया उम्मीदवार?

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन की रिक्त हुई सीट के लिए बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का मानना है कि गठबंधन के संख्याबल के आधार पर उनकी जीत सुनिश्चित है।

वहीं कांग्रेस ने दूसरी सीट के लिए प्रणव झा को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले में अपनी दावेदारी पेश की है। कांग्रेस को उम्मीद है कि गठबंधन के सभी घटक दल एकजुट रहेंगे और उसे पर्याप्त समर्थन मिलेगा।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने सीधे तौर पर अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है, लेकिन उसने उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी को समर्थन देकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा के इस कदम को राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे कांग्रेस की राह मुश्किल हो सकती है।

विधानसभा का वर्तमान गणित क्या कहता है?

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होती है। दो सीटों पर जीत के लिए कुल 56 वोटों का समर्थन जरूरी माना जाता है।

वर्तमान में INDIA गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34 विधायक, कांग्रेस के 16 विधायक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 विधायक और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं।

वहीं भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा आजसू के 1 विधायक, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 1 विधायक और जनता दल (यूनाइटेड) के 1 विधायक का समर्थन भी भाजपा समर्थित खेमे को प्राप्त है। इस प्रकार NDA के पास कुल 24 विधायक हैं।

संख्याबल के आधार पर देखा जाए तो INDIA गठबंधन दोनों सीटें जीत सकता है, लेकिन इसके लिए सभी सहयोगी दलों का एकजुट रहना जरूरी है। यहीं पर चुनावी मुकाबला दिलचस्प बन जाता है।

पहली सीट पर JMM की स्थिति मजबूत

झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास अकेले 34 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए केवल 28 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में पार्टी उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

यदि JMM अपने 28 वोट अपने उम्मीदवार को दिला देती है तो वह आसानी से चुनाव जीत जाएंगे। इसके बाद पार्टी के पास 6 अतिरिक्त वोट बचेंगे। यही 6 वोट दूसरी सीट के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहली सीट पर किसी प्रकार का बड़ा उलटफेर होने की संभावना बेहद कम है। असली मुकाबला दूसरी सीट पर देखने को मिलेगा।

दूसरी सीट पर कांग्रेस और भाजपा समर्थित उम्मीदवार आमने-सामने

दूसरी सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा मैदान में हैं। कांग्रेस के पास अपने 16 विधायक हैं। यदि JMM के 6 अतिरिक्त विधायक और गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के विधायक भी उनका समर्थन करते हैं तो उनकी जीत सुनिश्चित हो सकती है।

हालांकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी भी मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं। उन्हें NDA के 24 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। जीत के लिए उन्हें चार अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।

यही कारण है कि सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान के दौरान कौन-सा विधायक किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करता है।

क्रॉस वोटिंग बन सकती है गेम चेंजर

राज्यसभा चुनावों में कई बार क्रॉस वोटिंग के कारण अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं। झारखंड में भी इस बार यही आशंका राजनीतिक दलों को परेशान कर रही है।

यदि INDIA गठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार की जीत आसान हो सकती है। लेकिन यदि कुछ विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो स्थिति बदल सकती है।

विशेष रूप से राजद के चार विधायकों की भूमिका पर नजर रखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ये विधायक भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी के पक्ष में मतदान करते हैं तो चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल सकता है।

हालांकि अभी तक किसी भी दल की ओर से ऐसी संभावना को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में क्रॉस वोटिंग सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

भाजपा की रणनीति ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने सीधे तौर पर अपना उम्मीदवार मैदान में न उतारकर रणनीतिक चाल चली है। परिमल नथवानी को समर्थन देकर भाजपा ने कांग्रेस के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।

यदि भाजपा अपना आधिकारिक उम्मीदवार उतारती तो मुकाबला सीधा राजनीतिक दलों के बीच होता। लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने से भाजपा उन विधायकों को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रही है जो किसी कारणवश कांग्रेस या गठबंधन से असंतुष्ट हो सकते हैं।

यही वजह है कि कांग्रेस और JMM दोनों अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं।

विधायकों की निगरानी और राजनीतिक गतिविधियां तेज

राज्यसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने विधायकों के संपर्क में बने हुए हैं। कई दलों ने अपने विधायकों के लिए विशेष बैठकें आयोजित की हैं और मतदान प्रक्रिया की जानकारी भी दी है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव से पहले जिस तरह की सक्रियता दिखाई दे रही है, वह इस बात का संकेत है कि दल किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या असंतोष की संभावना को लेकर सतर्क हैं।

कुछ विधायकों से व्यक्तिगत स्तर पर भी बातचीत की गई है ताकि मतदान के समय कोई अप्रत्याशित स्थिति न बने।

Rajya Sabha Elections 2026 में हर वोट क्यों है महत्वपूर्ण?

राज्यसभा चुनाव में मतदान सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में अलग होता है। यहां विधायकों को अपनी प्राथमिकता के अनुसार मतदान करना होता है और दलों के लिए अपने वोटों का सही प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

यदि किसी दल के विधायक निर्धारित रणनीति के अनुसार मतदान नहीं करते हैं तो इसका सीधा असर परिणाम पर पड़ सकता है। यही कारण है कि राज्यसभा चुनावों में अक्सर राजनीतिक गणित और रणनीति अहम भूमिका निभाते हैं।

झारखंड में भी इस बार हर वोट की कीमत बढ़ गई है। एक तरफ INDIA गठबंधन अपनी संख्या के दम पर दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा समर्थित उम्मीदवार मुकाबले को रोचक बनाए हुए हैं।

नतीजों पर पूरे देश की नजर

झारखंड का यह चुनाव केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में संख्या बल के लिहाज से भी यह चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक दलों की नजरें इस चुनाव पर टिकी हुई हैं।

यदि INDIA गठबंधन दोनों सीटें जीतता है तो यह उसके लिए बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जाएगी। वहीं यदि भाजपा समर्थित उम्मीदवार दूसरी सीट जीतने में सफल रहते हैं तो इसे विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

क्या होगा अंतिम परिणाम?

फिलहाल सभी समीकरण कागज पर INDIA गठबंधन के पक्ष में दिखाई देते हैं। लेकिन राज्यसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि अंतिम परिणाम केवल संख्याबल से तय नहीं होते। कई बार रणनीति, राजनीतिक समीकरण और क्रॉस वोटिंग भी नतीजों को प्रभावित करती है।

इसी कारण झारखंड में होने वाला यह चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। पहली सीट पर JMM उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के बीच मुकाबला रोमांचक हो सकता है।

अब सभी की निगाहें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि INDIA गठबंधन अपने सभी वोट सुरक्षित रख पाता है या भाजपा समर्थित उम्मीदवार राजनीतिक समीकरणों में सेंध लगाने में सफल होते हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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