प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान को शिक्षा विभाग से संस्कृति विभाग में स्थानांतरित करने के निर्णय के विरोध में जैन समाज की मुहिम को बड़ी सफलता मिली। बिहार सरकार ने रिपोर्ट तलब कर जैन प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक बैठक की।
प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान पर सरकार से सकारात्मक वार्ता, राज्यपाल ने तलब की रिपोर्ट
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू, इंदौर
प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान को लेकर जैन समाज की ओर से चलाए गए व्यापक जनजागरण एवं ज्ञापन अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली वैशाली में स्थित इस महत्वपूर्ण संस्थान को बिहार सरकार द्वारा शिक्षा विभाग से संस्कृति विभाग में स्थानांतरित करने और शैक्षणिक गतिविधियों को बंद करने के प्रस्ताव के विरोध में देशभर के जैन समाज ने एकजुट होकर आवाज उठाई।
भारत वर्षीय जैन समाज और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के बाद बिहार के माननीय राज्यपाल द्वारा इस विषय में संस्कृति विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। जैन समाज इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देख रहा है।
प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान का महत्व
प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान वैशाली में स्थित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र है। यह संस्थान प्राकृत भाषा, जैन दर्शन, अहिंसा और भारतीय संस्कृति से जुड़े शोध एवं अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
जैन समाज का मानना है कि इस संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय न केवल जैन समाज बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
जैन समाज ने चलाया व्यापक ज्ञापन अभियान
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के राकेश जैन गोहिल ने बताया कि संस्थान को शिक्षा विभाग से संस्कृति विभाग में स्थानांतरित करने के निर्णय के विरोध में पूरे देश में व्यापक ज्ञापन अभियान चलाया गयायह अभियान परम पूज्य निर्यापक श्रमण श्री 108 सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद तथा पूज्य श्री 108 अभय सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
देश के विभिन्न राज्यों से समाज के प्रतिनिधियों ने बिहार सरकार तक अपनी बात पहुंचाई और संस्थान की शैक्षणिक पहचान को बनाए रखने की मांग की।
राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट
जैन समाज की एकजुटता और निरंतर प्रयासों का परिणाम यह रहा कि बिहार के माननीय राज्यपाल ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संस्कृति विभाग से रिपोर्ट तलब की।समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यह कदम सरकार की संवेदनशीलता और संवाद की सकारात्मक पहल को दर्शाता है।
16 जून को हुई महत्वपूर्ण बैठक
16 जून को बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के मुख्य सचिव के साथ जैन समाज के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक में समाज की ओर से संस्थान की वर्तमान स्थिति, उसकी शैक्षणिक भूमिका और जैन समाज की भावनाओं को विस्तार से रखा गया।इस दौरान विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक पक्षों पर चर्चा हुई।
सरकार ने दिखाई सकारात्मकता
धर्म समाज प्रचारक एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि बैठक का वातावरण अत्यंत सकारात्मक रहा।उन्होंने कहा कि जैन समाज द्वारा प्रस्तुत मांगों और भावनाओं को सरकार ने गंभीरता से सुना तथा विषय पर सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित किया।बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में संस्थान के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।
पराग जैन सहित कई समाजजन रहे सक्रिय
बैठक को सफल बनाने में पराग जैन (मानद मंत्री, बिहार राज्य तीर्थ क्षेत्र कमेटी), राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ तथा अन्य विशिष्ट महानुभावों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।जैन समाज के प्रतिनिधियों ने लगातार सरकार के साथ संवाद बनाए रखा और संस्थान की उपयोगिता को प्रभावी ढंग से रखा।
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ की भूमिका
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने इस पूरे विषय में समन्वयक की भूमिका निभाई।संघ के पदाधिकारियों ने देशभर के जैन समाज को एक मंच पर लाकर संस्थान के संरक्षण की दिशा में प्रयास किए।संघ ने स्पष्ट किया है कि समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर भविष्य में भी इसी प्रकार संगठित प्रयास जारी रहेंगे।
जल्द जारी होगा विस्तृत विवरण
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के अनुसार बैठक की कार्यवाही का विस्तृत विवरण शीघ्र ही समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।संघ ने कहा कि पूज्य संतों के मार्गदर्शन में समाज के दायित्ववान एवं विशिष्ट जनों के साथ निरंतर संवाद जारी है और संस्थान के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान को लेकर जैन समाज द्वारा चलाया गया संगठित अभियान अब सकारात्मक दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्यपाल द्वारा रिपोर्ट तलब किया जाना और सरकार के साथ हुई सकारात्मक बैठक इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। जैन समाज को उम्मीद है कि संस्थान की शैक्षणिक गरिमा और मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।
