आंधी का कहर: 100 साल पुराना पेड़ गिरने से 26 घंटे से बंद Bagli-Dhawadiya मुख्य मार्ग, 10 गांवों का संपर्क बाधित
बागली/देवास। सोमवार दोपहर अचानक चली तेज आंधी और बूंदाबांदी ने देवास जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज हवाओं के कारण Bagli-Dhawadiya मुख्य मार्ग पर चैनपुरा गांव के समीप लगभग 100 वर्ष पुराना विशाल पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे सड़क पर गिर गया, जिससे पूरा मार्ग अवरुद्ध हो गया। घटना के 26 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सड़क पर आवागमन बहाल नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और असंतोष देखा जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह घटना सोमवार को लगभग दोपहर तीन बजे हुई, जब अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। इसी दौरान धावड़िया गाड़ी स्थित मोड़ पर सड़क किनारे खड़ा एक विशाल पुराना पेड़ तेज हवा के दबाव में जड़ सहित उखड़कर बीच सड़क पर आ गिरा। पेड़ का तना इतना मोटा था कि उसने सड़क के दोनों ओर का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। इसकी विशाल शाखाएं और टहनियां पूरे मार्ग पर फैल गईं, जिससे किसी भी प्रकार के वाहन का गुजरना असंभव हो गया।
गनीमत रही, टल गया बड़ा हादसा
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि घटना के समय सड़क पर यातायात कम था, जिसके कारण एक बड़ा हादसा टल गया। यदि उस समय कोई वाहन या बस वहां से गुजर रही होती तो जान-माल की भारी क्षति हो सकती थी। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन सड़क बंद होने से अब भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं।
10 से अधिक गांवों का आवागमन पूरी तरह बाधित
इस मुख्य मार्ग से बीड़गांव, बावड़ीखेड़ा, पांजरिया, खेड़ा, रामपुरा, गुवाड़ी सहित लगभग 10 से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। यह मार्ग ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा की तरह है, जिससे वे अस्पताल, मंडी, स्कूल और इंदौर जैसे बड़े शहरों तक पहुंचते हैं। लेकिन पेड़ गिरने के बाद से यह मार्ग पूरी तरह बंद है, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग बंद होने के कारण उन्हें अब 10 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि ईंधन और परिवहन खर्च भी बढ़ गया है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों और आपात स्थिति में अस्पताल जाने वालों को हो रही है, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
जिम्मेदारी तय न होने से नहीं शुरू हुआ हटाने का कार्य
घटना के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कार्यरत विभाग के सब इंजीनियर संतोष मंसारे मौके पर पहुंचे थे। लेकिन पेड़ का आकार अत्यधिक बड़ा होने और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण तत्काल हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के 26 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभिन्न विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य राम सिंह ओसारी ने बताया कि लगातार सूचना देने के बावजूद अभी तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। वहीं पूर्व सरपंच तेज सिंह ओसारी ने कहा कि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पेड़ हटाने का कार्य उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए स्थानीय स्तर पर ही समाधान निकालने की बात कही गई है।
बिजली आपूर्ति भी प्रभावित, ग्रामीण परेशान
पेड़ गिरने की घटना के दौरान पास से गुजर रही बिजली लाइनें भी उसकी चपेट में आ गईं, जिससे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। कई गांवों में बिजली गुल होने से ग्रामीणों को अंधेरे और पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल भी प्रभावित हुए हैं, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
संसाधनों की कमी बनी बड़ी बाधा
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सब इंजीनियर संतोष मंसारे ने बताया कि पेड़ काफी बड़ा, पुराना और भारी है, जिसे हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लकड़ी काटने वाले मजदूरों से संपर्क किया गया है और जल्द ही पेड़ काटकर हटाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मौसम और सुरक्षा को देखते हुए कार्य में कुछ समय लग सकता है, लेकिन एक से दो दिनों के भीतर मार्ग को पुनः चालू करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
मार्ग बंद होने से ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अब लंबा और कठिन रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे कई बार आपात स्थिति में जोखिम भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पेड़ हटाकर मार्ग को पुनः चालू किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
मानकुंड में भी आंधी से बड़ा नुकसान, तीन मकान गिरे
इधर हाटपीपल्या क्षेत्र के ग्राम मानकुंड में भी तेज आंधी ने भारी नुकसान पहुंचाया। गांव में शासकीय विद्यालय के सामने स्थित ईंट-कवेलू से बने तीन मकान अचानक गिर गए। प्रभावित मकान कैलाश पाटीदार, राधेश्याम पाटीदार और संजय पाटीदार के बताए गए हैं।
तेज हवाओं के कारण मकानों की दीवारें गिरने से पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन परिवारों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से राहत राशि प्रदान करने की मांग की है ताकि वे अपने घरों की पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकें।
फोरलेन निर्माण में उड़ती राखड़ से ग्रामीण परेशान
सुंद्रेल-बिजवाड़ क्षेत्र में इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान डाली जा रही राखड़ भी स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। तेज हवा चलने पर राखड़ उड़कर गांवों और आसपास के इलाकों में फैल जाती है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ के कारण घरों के अंदर तक धूल भर जाती है और दृश्यता भी प्रभावित होती है। वाहन चालकों को भी सड़क पर चलने में कठिनाई होती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
बिजवाड़ पंचायत के सरपंच संतोष धाकड़ ने बताया कि यह समस्या रोजाना बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि तेज हवा के समय पूरा गांव धूल और सफेद राखड़ के गुबार से ढक जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो रही हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि उड़ती राखड़ को नियंत्रित किया जा सके और पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को रोका जा सके।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
पूरे क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है। सड़क बंद होने, बिजली बाधित होने और अन्य समस्याओं के कारण ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। लोग लगातार प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही पेड़ नहीं हटाया गया तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी हैं, लेकिन संसाधनों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
