महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल: NCP की डिप्टी CM पद की दावेदारी, राजनीतिक सियासी तकरार बढ़ी
पिछले हफ्ते महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और NCP नेता अजित अनंतराव पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया, जिससे राज्य की राजनीति में अचानक बड़ा शून्य और असमंजस पैदा हो गया है। उनके जाने से खाली हुए पद और विभागों को लेकर गठबंधन सरकार में शामिल NCP के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है, ताकि NCP अपनी शक्ति और हिस्सेदारी को बरक़रार रख सके। इस बात की तीव्र चर्चा है कि NCP के नेताओं ने फडणवीस से देवनागरी सरकार में फिर से चर्चा की, खासकर डिप्टी सीएम पद और अहम विभागों की बंटवारे को लेकर।
NCP के दावे: विभाग और सत्ता हिस्सेदारी
NCP के वरिष्ठ नेताओं — प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल — ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वित्त (Finance), राज्य उत्पाद शुल्क (State Excise) और खेल विभाग (Sports)’ जैसे प्रमुख विभागों पर अपना दावा रखा है। ये वे विभाग हैं जिनपर पहले अजित पवार का नियंत्रण था और प्रदेश की राजनीतिक और आर्थिक नीति में अहम भूमिका निभाते थे। अब ये विभाग किसके पास रहेंगे, यह तय करना NCP के लिए बड़ी चुनौती है—और इसमें अब डिप्टी सीएम पद भी शामिल है। NCP इस बैठक में एक औपचारिक पत्र देने की तैयारी कर रही है, जिसमें यह मांग दर्ज की जा सकती है कि अजित पवार के विभाग उसी पार्टी के खाते से फिर से भरे जाएं।
सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की नई डिप्टी CM!
अब राज्य में डिप्टी सीएम की खाली हुई कुर्सी भरने पर भी तेज चर्चा चल रही है। NCP के भीतर सुनेत्रा पवार — जिन्हें कई वरिष्ठ नेता दोबारा डिप्टी सीएम बनाने की वकालत कर रहे हैं — का नाम तेजी से सामने आ रहा है। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद और अजित पवार की पत्नी हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि उन्हें यह पद देने से न सिर्फ पारिवारिक और राजनीतिक विरासत बरकरार रहेगी बल्कि पार्टी संगठन को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा पवार परिवार के बाहर भी वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जो संभवतः डिप्टी सीएम पद के लिए देखे जा सकते हैं।
NCP के भीतर बदलाव की संभावनाएँ
अजित पवार के अचानक निधन के बाद NCP के अंदर पार्टी नेतृत्व और संगठन की एकता को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। लंबे समय से पार्टी के भीतर दो प्रमुख धड़े सक्रिय हैं — एक शरद पवार के नेतृत्व वाला और दूसरा अजित पवार का धड़ा। पिछले कुछ महीनों में दोनों धड़ों के बीच मेलजोल और संभावित एकीकरण की चर्चाएँ भी जोर पकड़ रही थीं। अब राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अजित पवार के निधन के बाद यह अवसर दोनों धड़ों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कई वरिष्ठ नेता यह सुझाव दे रहे हैं कि अगर दोनों धड़े मिलकर आगे बढ़ें, तो न केवल पार्टी की साख मजबूत होगी, बल्कि उसकी ताकत और प्रभाव राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में भी बढ़ जाएगा। ऐसे में NCP के भविष्य और गठबंधन सरकार में उसकी भूमिका अगले कुछ हफ्तों में तय हो सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर प्रभाव
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक बदलाव आया है। राज्य का राजनीतिक ढांचा तेजी से बदल रहा है और गठबंधन सरकार के निर्णय, विभागों का बंटवारा और सत्ता का संतुलन अब दावों पर निर्भर करेगा। पार्टी की इस समय की रणनीति और दबदबा सरकार की स्थिरता को सीधे प्रभावित करेगा। NCP यह सुनिश्चित करना चाहती है कि डिप्टी मुख्यमंत्री पद और अहम विभाग उनके नियंत्रण में बने रहें। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले कुछ दिनों में इस मामले में गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ सकता है। सवाल यह है कि कितनी मजबूती से अपने दावों को आगे बढ़ा पाएगी और राज्य सरकार में अपनी भूमिका बनाए रख पाएगी या नहीं।
