Indore : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की Indore खंडपीठ ने Chinese मांझे (घातक पतंग डोर) के मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कोई नाबालिग बच्चा चीनी मांझे का इस्तेमाल करता है और हादसा होता है, तो उसके माता-पिता कानूनी तौर पर जिम्मेदार होंगे।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि चीनी मांझे बेचने वाले के खिलाफ मौत या गंभीर चोट के मामले में मामला चलाया जा सकता है। Indore पीठ ने यह आदेश जनहित याचिका के आधार पर लिया, जिसमें चीनी मांझे के कारण हुई दुर्घटनाओं और मौतों को लेकर चिंता जताई गई थी।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकार जनता में जागरूकता फैलाए कि Chinese मांझे केवल खेल का साधन नहीं, बल्कि जानलेवा हथियार भी हो सकता है।
पैरेंट्स की कानूनी जिम्मेदारी
कोर्ट ने यह साफ किया कि नाबालिग बच्चों द्वारा चीनी मांझे के उपयोग पर उनके पैरेंट्स कानूनी तौर पर जिम्मेदार होंगे।
- अगर किसी हादसे में मौत या गंभीर चोट होती है, तो माता-पिता लापरवाही के तहत मुकदमा झेल सकते हैं।
- कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि लोगों के बीच प्रचार किया जाए कि चीनी मांझे का उपयोग और बिक्री गंभीर अपराध है।
- हाईकोर्ट ने चेताया कि पतंग उड़ाने में सुरक्षा को अनदेखा करना अब केवल व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि कानूनी अपराध माना जाएगा।
यह आदेश बच्चों की सुरक्षा और समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सख्त और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
Chinese मांझे: खतरा और हादसों का कारण
Chinese मांझा अक्सर पतंगबाजी में इस्तेमाल होता है, लेकिन यह केवल एक साधारण डोर नहीं है।
- यह केमिकल और ग्लास फाइबर से बना होता है, जिससे यह अत्यंत तेज और खतरनाक बन जाता है।
- बिजली के खंभों या ट्रांसफार्मर से संपर्क में आने पर विद्युत्-घात का कारण बन सकता है।
- कई बार सड़क पर गिरने या पतंग काटने की कोशिश में लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
पिछले साल 11 दिसंबर को हुई घटनाओं के कारण हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी मांझा केवल बच्चों का खेल नहीं, बल्कि बड़े लोगों के लिए भी गंभीर खतरा है।
राज्य सरकार की तैयारी और कदम
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि:
- चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए पहले ही कदम उठाए गए हैं।
- पतंग उड़ाने के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।
- जनता को जागरूक करने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार अभियान चलाया जाएगा।
- स्कूलों और स्थानीय समुदायों में भी सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि पतंगबाजी के त्योहारों के दौरान विशेष निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
हाईकोर्ट का आदेश: जागरूकता और सुरक्षा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनता को यह जानकारी होनी चाहिए कि:
- चीनी मांझे का उपयोग और बिक्री कानूनन अपराध है।
- इसके कारण होने वाली मृत्यु या गंभीर चोट पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों के व्यवहार में अहम भूमिका निभाती है।
कोर्ट ने कहा कि पतंगबाजी की परंपरा को जारी रखना सही है, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
पतंगबाजी और संस्कृति के बीच संतुलन
पतंगबाजी भारतीय संस्कृति और त्योहारों का अहम हिस्सा है।
लेकिन चीनी मांझे ने इस परंपरा को खतरे में डाल दिया है।
- माता-पिता को बच्चों को सुरक्षित तरीके से पतंग उड़ाने के तरीके सिखाने चाहिए।
- पतंग उत्सवों के दौरान सुरक्षित डोर और उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य होना चाहिए।
- सरकारी दिशा-निर्देशों और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया गया, तो यह केवल व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि कानूनी अपराध बन जाएगा।
हादसों की रोकथाम के उपाय
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वे लोग:
- स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को सुरक्षित पतंग उड़ाने के तरीके सिखाएं।
- पटाखों और खतरनाक डोर के खिलाफ विशेष जागरूकता अभियान चलाएं।
- हर साल पतंग उत्सवों के समय सुरक्षा निरीक्षण और निगरानी बढ़ाएं।
सरकारी अधिकारी भी पतंग उत्सवों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे।
निष्कर्ष: सुरक्षा पहले, परंपरा बाद में
हाईकोर्ट का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि खेल और सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।
- बच्चों और युवा दोनों के लिए पतंगबाजी को सुरक्षित बनाया जाए।
- माता-पिता अपनी जिम्मेदारी समझें और बच्चों को सुरक्षित डोर और उपकरणों के बारे में शिक्षित करें।
- सरकार और न्यायपालिका मिलकर जनता में जागरूकता फैलाएं और हादसों की रोकथाम सुनिश्चित करें।
इंदौर हाईकोर्ट का यह आदेश न केवल बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अहम है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने और कानून की स्थिति स्पष्ट करने का भी मार्ग प्रशस्त करता है।

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